सेक्स का ज्ञान न तो मुझे ही था और न ही इशानी को.. यह सब उत्तेजना में अपने आप ही होता जा रहा था.. उसकी योनि को मुँह में भरते ही इशानी के मुँह से चीख निकल गई और उसने मेरे सर के ऊपर अपने दोनों हाथों को रखा और अपनी योनि पर दबाने लगी..
उसने जो बोला, सुन कर मेरे होश ही उड़ गए.. उसने मुझे बताया कि वो बचपन से ही मेरे बारे में सिर्फ अच्छा ही सुनती आ रही है और मन ही मन मुझे प्यार करती है...
रीटा बोली- नहीं, थोड़ा ऊपर करिये तो बताती हूँ. बहादुर ने हाथ थोड़ा ऊपर सरका दिया- बेबी, अब कुछ आराम आया? रीटा सरसराते स्वर में बोली- नहीं, थोड़ा सा और ऊपर
रीटा भी नम्बर एक की मां की लौड़ी थी, अपनी शर्ट के ऊपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली- बहादुर बिल्कुल यहाँ लगाना है, टिप पे, जरा जल्दी करो.
राजू का लण्ड अब रीटा की चूत की झिल्ली पर दबाव डाल रहा था पल भर के लिये दोनों ठहर से गये और राजू ने रीटा की झील सी आँखों में झाँख कर पूछा- चोदूँ?
रीटा की स्कर्ट अब उलट चुकी थी और उसकी कसमसाती गोरी गोरी मखमली गाण्ड बाहर झाँक रही थी. स्कूल ड्रैस और कुतिया स्टाईल में रीटा और भी सैक्सी लगने लगी थी.
मेरा नाम राजवीर कपूर है। यह मेरी अन्तर्वासना की पहली कहानी है। प्यार से लोग मुझे राज कहते हैं। मैं जालंधर का रहने वाला हूँ। यहाँ मेरे मम्मी, पापा मेरी बहन
प्रेषक : शमशेर कुमार दोस्तो, मेरा नाम शमशेर कुमार है, मैं हरियाणा से हूँ। मेरी उम्र 18 साल है, सन् 2011 में 10+2 पास की हैँ बल्कि प्रथम आया हूँ। बात उस
सभी को मेरा नमस्कार! मेरा नाम आदित्य है(बदला हुआ नाम) आज मैं अपनी पहली कहानी लेकर आपके सामने आया हूं। मैं बहुत दिनों से इसे लिखने की कोशिश कर रहा हूँ मगर
धीरे धीरे मेरे होंठ अपने आप उसके गले से होते उरोजों की घाटियों तक पहुँच गए। सिमरन ने मेरा सिर अपनी छाती से लगा कर भींच लिया। आह... उस गुदाज रस भरे उरोजों का स्पर्श पा कर मैं तो अपने होश ही जैसे खो बैठा।
एक नटखट, नाज़ुक, चुलबुली और नादान कलि मेरे हाथों के खुरदरे स्पर्श और तपिश में डूब कर फूल बन गई और और अपनी खुशबूओं को फिजा में बिखेर कर किसी हसीन फरेब (छलावे) के मानिंद सदा सदा के लिए मेरी आँखों से ओझल हो गई।
मैंने कमरे में उसको दबोच लिया, वो बिस्तर पर गिर गई। मैंने उसकी टीशर्ट में हाथ घुसा कर पहले बगलों में गुदगुदी की फिर उसके मम्मों को मसलने लगा। उसके चुचूकों को चुटकी में भर कर मसला.
योनि खाली हुई लेकिन सिर्फ थोड़ी देर के लिए। उसकी अगली परीक्षाएँ बाकी थीं। सुरेश को दिया वादा दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था,‘जो इज्जत केले को मिली है
वह फिर मुझ पर झुक गई। कम से कम आधा केला अभी अन्दर ही था। 'खट खट खट !'... दरवाजे पर दस्तक हुई। मैं सन्न। वे दोनों भी सन्न। यह क्या हुआ? 'खट खट खट'...
नेहा ने जब एक उजला टिशू पेपर मेरे होंठों के बीच दबाकर उसका गीलापन दिखाया तब मैंने समझा कि मैं किस स्तर तक गिर चुकी हूँ। एक अजीब सी गंध, मेरे बदन की, मेरी
ओ ओ ओ ओ ओ ह... खुद को शर्म में भिगोती एक बड़ी लहर, रोशनी के अनार की फुलझड़ी... आह.. एक चौंधभरे अंधेरे में चेतना गुम हो जाती है। 'यह तो नहीं हुआ? वैसे ही
मैं कुछ नहीं सुन पा रही थी, कुछ नहीं समझ पा रही थी। कानों में यंत्रवत आवाज आ रही थी- निशा… बी ब्रेव…! यह सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगा…..!' मेरी आँखों के
क्षितिज कहीं पास दिख रहा था। मैंने उस तक पहुँचने के लिए और जोर लगा दिया... कोई लहर आ रही है... कोई मुझे बाँहों में कस ले, मुझे चूर दे... ओह... कि तभी 'खट
मैंने योनि के छेद पर उंगली फिराई। थोड़ा-सा गूदा घिसकर उसमें जमा हो गया था। 'तुम्हें भी केले का स्वाद लग गया है !' मैंने उससे हँसी की। मैंने उस जमे गूदे को
मुझे उसके दोस्तों को देखकर उत्सुकता तो होती पर मैं उनसे दूर ही रहती। शायद नेहा की बातों और व्यवहार की प्रतिक्रिया में मेरा लड़कों से दूरी बरतना कुछ ज्यादा
प्रिय पाठको, आपने मेरी पिछली कहानियों स्वीटी और पुष्पा का पुष्प को जितना तहेदिल से पसंद किया है उससे मेरे इस विश्वास को बल मिला है कि हिन्दी में
मैंने उसे चित लेटा दिया। उसके गुलाबी होंठ, तनी हुई गोल चुंचियां, गहरी नाभि, पतली कमर, सपाट चिकना पेट और दो मोटी मोटी जाँघों के बीच फंसी पाव रोटी की तरह फूली छोटी सी चूत।
अंकित ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टीशर्ट उतारने की कोशिश की, मैंने उसका पूरा साथ दिया और हाथ ऊँचे करके उठ कर टी शर्ट उतरवा ली।
इस बार उसके मुँह से दर्द से एक चीख निकल ही गई थी, मैंने उसकी टांगो को छोड़ कर दोनों हाथों को उसके दोनों स्तनों पर रख कर उसके स्तन दबाने लगा और होंठों से
हम दोनों घाट से उठे, मैंने अपनी चप्पल हाथों में ही ले ली और और खाना खाने के लिए चल दिए और खाना खाकर कमरे की तरफ चल दिए... कमरे में पहुँच कर पलक ने अपना
वो कहते कहते रुक गई ... "मैंने पूछा और क्या ...?" तो बोली- और तुझे यह भी बताना है कि मैं यह सब अंकित के साथ क्यों नहीं कर रही हूँ.. मैं तेरे साथ ही क्यों
मैंने कहा,"अब मत रोक ! नहीं तो तेरा देह शोषण हो जायेगा मुझ से।" वो बोली," ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन मैं चाहती हूँ मेरी जो इच्छा है वो हर इच्छा पूरी हो तो
पर पलक ने ड्राईवर के लिए सीधे मना कर दिया और बोली," मैं सरिता को साथ में लेकर चली जाऊँगी गाड़ी चलाने के लिए पर नो ड्राईवर !" मेरे ऊपर भड़कते हुए बोली,"गधे,
लेखक : सन्दीप शर्मा मैं कुछ कहता या समझता वो उसके पहले ही कैफे से बाहर थी, मैं मेरे गाल को सहला रहा था और बिल माँगा तो पता चला कि आज मोहतरमा पहले ही पैसे
लेखक : सन्दीप शर्मा यह कहानी मेरी और मेरी एक दोस्त की है जो आज से कुछ साल पहले घटी थी उसका नाम बदल कर मैं पलक लिख रहा हूँ। मेरी पिछली कहानी को पढ़ने के बाद
मैंने तान्या को बाल पकड़ कर उठाया और एक रण्डी की तरह बिस्तर पर पटक दिया. उसके बाद तान्या अपनी चूत में अपनी उंगली डालने लगी.
कुछ क्षणों पहले हाथ भी नहीं लगाने दे रही थी। अभी मस्ती में सराबोर है। मैं और उत्साहित होकर थूथन घुसा घुसाकर उसके गड्ढे को कुरेदता हूँ। उसके मुँह से कुछ
पुष्पा का पुष्प। पैंटी के नीचे ढका हुआ... सुरक्षित, कोमल, सुगंधित, रसभरा... दो हिस्सों में फटी मांसल स्पंज, जिसके बीच की फाँक को मैं कंधों से उसकी जांघों को फैलाकर चौड़ा करता हूँ!
उसकी पनीली आँखों में, जिनमें एक अजब-सा मर्म को छूता भाव उमड़ रहा था। शर्म से लाल गालों पर झूलती लट, बालों के बीच सफेद मांग ! खाली। मेरे भीतर कुछ उमड़ आया।
मैंने उसके नितम्बों को बाँहों में घेरा और कमर के नीचे उस स्थान पर जहाँ भीतर जांघों का संधिस्थल था उसमें मुँह घुसाकर जोर से चूम लिया।
बाथरूम से निकलते हुए कुसुम की नजर जब रीतेश के कमरे की ओर गई तो उसने देखा कि दरवाजा आधा खुला था और मिनी अपने को किसी से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। उसे लगा
मेरी सेक्स कहानी का पहला भाग : सिमरन मैडम गोवा में-1 हम दोनों घूम कर होटल जाने को थे कि मैंने सिमरन से कहा- तुम चलो, मैं आता हूँ. मैंने पास में मार्केट से
हेलो दोस्तो! मेरा नाम अमित है। मेरा रंग गोरा है, मेरा कद 6 फुट 1 इंच, जिम तो नहीं जाता पर अपने शरीर का मैं पूरा ध्यान रखता हूँ। अन्तर्वासना पर पहली कहानी
उसने मुझे सीधी लिटाया और बीच में बैठ सुपारे को दाने से रगड़ा तो मस्ती के मारे मेरी आँखें बंद हो गई और उसने मेरे होंठ अपने होंठों में लेते हुए झटका दिया।
एक रात बुआ की बेटी को चोदते समय मैंने उससे कहा- मुझे अमिता की चूत मारनी है! तो वो नाराज हो गई और बोली- उस रण्डी की चूत क्या मेरी से ज्यादा अच्छी है?
उसने कहा- भोसड़ी के, क्या-क्या चाटेगा और कहाँ-कहाँ घुसेगा? मैंने कहा- मादरचोद, तेरे हर छेद में आज अपना लौड़ा डालूँगा ! तो वो बोली- जहाँ डालना हो वहाँ बाद में डालना पर पहले साले मेरे मुँह में अपना लौड़ा डाल पहले !
रंजना एक मस्त, गोरी और जबरदस्त लड़की थी। उसकी बदनाकृति 34-30-34 थी, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी मस्त थी रंजना। मैं हमेशा रंजना को पटाने की सोचता था, कहते हैं ना कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं !
मुझे रंजना को पटाने का मौका भी जल्दी ही मिल गया।
बीच बीच में वो मुझे प्रेम भरे चुम्बन देता... धीरे धीरे उसके धक्के तेज़ होने लगे ... चूत में मुझे खिंचाव महसूस होने लगा... खुद ब खुद मैं उसके धक्कों से ताल
नमस्कार दोस्तो, मैं हूँ अभिषेक और मैं 18 साल का लंबा, हट्टा-कट्टा पंजाबी लड़का हूँ। मैंने यहाँ काफ़ी कहानियाँ पढ़ीं हैं, पर अपना अनुभव आज पहली बार लिखने जा
लेखिका : वृंदा मुझे अपने टांगों के बीच कुछ रिसता हुआ सा महसूस हो रहा था... मेरी अन्तर्वासना मुझे सारी हदें भूल जाने को कह रही थी.. मैं इसी उधेड़बुन में थी
वेदांत मेरे पास आया.. उसने मुझे गले लगा लिया.. उसकी तरफ देख कर बोला... : दोस्त है यह मेरी, प्यार करता हूँ इससे.. हाथ तो क्या आँख भी उठाई ना.. तो उस दिन के
अब धीरे धीरे मेरे शरीर में भी बदलाव होने लगे.. झांघें जो पहले तिलियों सी पतली थी अब थोड़ी भर गई.. ऊपरी हिस्से में भी काफी बदलाव हुए... छाती.. स्तनों के रूप
लेखिका : वृन्दा बस इसी तरह समय बीतता रहा.. हम समय के साथ बड़े हो रहे थे.. हम दोनों ही यौवन द्वार पर खड़े थे... वो दिन मेरे लिए बेहद कठिन था.. मेरे जीवन की
वेदांत : अब दर्द कैसा है .. खाना खा लिया..?? मैंने ना में सर हिला दिया.. वेदांत : आ जा ! मैं भी अकेला हूँ ! साथ में खाते हैं... मैंने लंच उठाया और उसकी
चूत की मल्लिकाओ और लण्डों के पुजारी आज तुम्हारा भोंसड़ा फाड़ने की बारी है हमारी जहाँपनाह के दरबार में चूत सजी भयानक काले लण्ड के इन्तजार में... सर्दियों का
मैं वृंदा, एक बार फिर से हाज़िर हूँ आपके सामने एक नई कथा लेकर ! आपने मेरी पिछली कहानी राजा का फ़रमान-1 पढ़ी होगी, काफी अच्छा लगा यह जानकार कि आप सबको वो
अब मेरी कुंवारी गाण्ड के लिया दर्द सहना बहुत कठिन हो गया था क्योंकि मैं जानती थी कि उसका लण्ड मेरी गाण्ड के लिये मोटा है और मैं उसको सहन नहीं कर पाऊँगी।
शायद ज्योति ने उससे पहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई थी, मगर मैंने उसकी एक भी ना सुनी और उसके दोनों चूतड़ों के बीच में अपना लण्ड घुसाने लगा.
प्रेषक : आकाश अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार। क्योंकि अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है इसलिए अगर भाषा में कुछ गड़बड़ी हो जाये तो मुझे माफ़ कर
कैसे हो दोस्तो! मैं बड़ौदा, गुजरात का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 22 साल है। मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ, मैंने आपकी बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं।
नमस्कार दोस्तो, मेरी पहली कहानी मीना के साथ बिताये रंगीन पल-1 की प्रतिक्रिया में मुझे आपके बहुत सारे ईमेल मिले। मेरी कहानी में मैंने आपको बताया था कि मैं
मैंने अपनी चूत से खड़े खड़े ही पेशाब की धार छोड़ी, मुकेश मेरे सामने खड़ा रह कर मेरी जांघों से बह कर मेरे पेशाब की धार को देख रहा था.
वो मुझ पर चढ़ गया और मेरे निप्पल को अपने मुँह में ले चूसने लगा. असर चूत पर होने लगा. चूत गीली होने लगी, मुझे लगा कि मेरी चूत इतनी जल्दी हथियार क्या डाल देती है.
जब तक किसी लड़की की चुदाई नहीं होती, तब तक तो कोई बात नहीं, लेकिन लौड़ा खाने के बाद तो चूत हमेशा चाहती है कि कोई न कोई लौड़ा हमेशा उसमें घुसा रहे.
प्रेषक : सागर सिंह मेरा नाम सागर है, उम्र 22 साल और मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। मेरे दोस्त ने मुझे एक बार अन्तर्वासना के बारे में बताया तब से मैं इसका
मेरा नाम सागर है मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 23 साल है। आज मैं जो आपको सुनाने जा रहा हूँ वो एक सच्ची कहानी है! यह घटना कुछ समय पहले की है जब
वो बिस्तर पर कूद गया और पागलों की तरह मेरे मम्मे चूसने लगा, कभी चुचूक चूसता, काट देता! मैंने भी उसके अंडरवीयर को उतार फेंका, लौड़े को पकड़ मुठ मारने लगी।
मेरी उम्र बीस साल की है, मैं बी.ए प्रथम वर्ष की छात्रा हूँ। वैसे तो मेरे इस वक़्त कई बॉयफ्रेंड हैं और मैं सबको एक साथ सम्भालना भी जानती हूँ। हर किसी को उसकी जगह पर रखना मुझे खूब आता है। क्या करूँ बचपन भी एक चालू से माहौल में बीता, फिर स्कूल में ही चालू लड़कियों से मेरी दोस्ती हो गई।
संपादक : मारवाड़ी लड़का मेरा नाम विक्की, राजकोट (गुजरात) में रहता हूँ। यह मेरी तीसरी कहानी है अन्तर्वासना पर। यह कहानी है मेरे दोस्त विशाल की प्रेमिका
उसने घुटने तक लम्बा गाउन पहना था। मेरी नजर नीचे गई, क्या मस्त गांड लग रही थी फूली-फूली! उसकी गांड मसलने को मन कर रहा था मेरा!
वो बोले जा रहे थी, मैंने ध्यान से सुना, वो कह रही थी- मेरी लो! और आहें भर रही थी। मुझे लगा कि शायद उसने शराब पी रखी है। मैंने उसको ब्रा पहनाई।
हम रोज़ मिलते तो वो मेरे स्तन दबा देता था और कभी मेरे चूतड़ भी। वो मुझे फ़ोन पर ब्लू फिल्म दिखाया करता था तो मेरे चुदने की तो बहुत इच्छा होती थी।
मैं हर जगह अपने लिए मर्द तलाशती फ़िरती हूँ, अपना बदन दिखाती फ़िरती हूँ, अक्सर सड़क पर चलते-चलते मैं मर्दों की पैन्ट का उभार सहला देती हूँ, कहीं बैठती हूँ तो टांगें फ़ैला कर! ताकि लोग मेरी चूत के दर्शन कर सकें!
अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज प्रिय पाठको, यह मेरी कहानी प्रिया की नथ का तीसरा भाग है, मैंने प्रिया के साथ जब से सम्बन्ध बनाये तो मेरी तो चांदी हो गई थी, जब भी मेरा मन करता मैं उसे
दोस्तो, यह मेरी पिछली कहानी 'प्रिया की नथ' का दूसरा भाग है, मैंने पहले भाग में बताया था कि मैं प्रिया की नथ उतार चुका था और वो मुझसे प्यार करने लगी थी।