निगोड़ी जवानी-4
मैं उनके बालों को सहलाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के गर्व से फूली नहीं समा रही थी। फिर मैंने माफ़ी मांगते हुए उन्हें सारी सच्चाई बता दी तो वो हँसते
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार चुदाई की कहानी कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
मैं उनके बालों को सहलाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के गर्व से फूली नहीं समा रही थी। फिर मैंने माफ़ी मांगते हुए उन्हें सारी सच्चाई बता दी तो वो हँसते
मैंने सर को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया, वो भी मेरे ऊपर आकर मेरे से लिपट गए, मेरे चेहरे को थामकर मेरे होंठों का रसपान करने लगे। उनका खड़ा लंड मुझे अपनी नाभि
सभी पाठकों को रोनी का प्यार भरा नमस्कार ! आज की कहानी विनीता की है जो उसने मुझे सुनाई थी, उसी को मैंने उसी के शब्दों की माला में पिरोकर आपके समक्ष पेश कर
मेरा नाम अदित है, आज मैं अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ, आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएगी। हमारे परिवार बचपन से ही काफी करीब रहे हैं तो काफी आना जाना होता
प्रेषक : सचिन मेरी कहानी 'ज्योमेट्री के साथ सेक्स' को अन्तर्वासना पर जगह मिली, धन्यवाद। दोस्तो, आपके मेल मिले बहुत अच्छा लगा और स्फूर्ति मिली। मैं कहानी
तभी अचानक मुझे अपने अन्दर झरना सा चलता महसूस हुआ। अरूण का प्रेम दण्ड मेरे अन्दर प्रेमवर्षा करने लगा। अरूण के हाथ खुद ही ढीले हो गये... और उसी पल...
उन्होंने अपने हाथ से मेरी ठोड़ी को पकड़ कर ऊपर किया और मेरी आँखों में झांकते हुए विनती सी करने लगे जैसे कह रहे हों, "प्लीज, मुझे अपनी प्राकृतिक अवस्था
अरूण मेरे बिल्कुल नजदीक आ गये। मेरी सांस धौंकनी की तरह चलने लगी। अरूण ने चेहरा ऊपर करके अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिया। आहहहह... कितना मीठा अहसास था।
आखिर इंतजार की घड़ी समाप्त हुई और बुधवार भी आ ही गया। संजय के जाते ही मैंने अरूण के मोबाइल पर फोन किया। तो उन्होंने कहा, "बस एक घंटे में गाड़ी दिल्ली
मुझे पुरूष देह की आवश्यकता महसूस होने लगी थी। काश: इस समय कोई पुरूष मेरे पास होता जो आकर मुझे निचोड़ देता... मेरा रोम रोम आनन्दित कर देता... मैं तो
दोनों लड़कियाँ आपस में एक दूसरे से अपनी योनि रगड़ रही थी। ऊफ़्फ़...!! मेरी उत्तेजना भी लगातार बढ़ने लगी। परन्तु मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या
इस सच्ची घटना के द्वारा मैं सबको यही बताना चाहती हूँ कि अगर पति-पत्नी थोड़ी समझदारी से काम लें तो एक नर्क भरी जिंदगी भी स्वर्ग बन जाती है। डॉक्टर अनुराधा
"... यार, अठारह से अट्ठाईस साल की लड़कियाँ देखते ही कुछ होने लगता है...!" पतिदेव थे, फ़ोन पर शायद अपने किसी दोस्त से बातें कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने
प्रणाम पाठको, आपका अपना शिमत वापिस आ गया है अपनी नई कहानी को लेकर, वैसे आपने मेरी पहले वाली बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं ! आज मैं आप को अपनी एक नई और सच्ची
लेखिका : श्रेया अहूजा हाय श्रेया मैं देव... डिग्री कॉलेज वाला देव भटनागर ! सोचा बहुत दिन हो गए, बात नहीं हुई ! आखरी बार जब बात हुई थी अब तुमने पूछा था-
दोस्तो, मैं रोमा आप लोगों के साथ कहानी के माध्यम से मैंने अपना सेक्स अनुभव शेयर किया था..'इंटर कोलेज कम्पीटीशन' ! उस मादक और उत्तेजक सेक्स अनुभव के बाद
उसने कहा- यह तो मैंने मन की बात कही है सिर्फ। मैं ऐसा कोई भी कदम शादी से पहले नहीं उठाऊँगी। और यह कहकर वो आकर मेरे सीने में सिमट गई। आज पहली बार मैंने उसे
मेरी सहेली का बेटा मुझे कामुक नज़रों से देखने लगा, वो मेरे वक्ष को घूर रहा था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी और मैक्सी भी टाइट थी गहरे गले की! शायद इसलिए उसको मेरे उरोज दिख रहे होंगे।
19 साल की ही तो हुई थी मैं, जब मुझे कुछ रुपयों रूपये के बदले में पैंतालीस साल के सेठ नवीन कुमार को बेच दिया गया था। भले लोग कहते रहें कि मेरी शादी हुई थी
लेखिका : शीनू जैन एक बार मेरे मौसी की शादी में हम सभी गए थे। जिस होटल में शादी हुई थी, उसी होटल में सबके लिए कमरे बुक थे। मेरे चाचा, पापा, मॉम और मैं होटल
मेरे सभी पाठकों को नमस्कार। अन्तर्वासना के माध्यम से में अपनी आपबीती घटनाए लाता रहा हूँ। बहुत से ईमेल आये इसलिए अगली घटना बताने से पहले एक बात बताना चाहता
प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना मैं जैसे ही बेड पर बैठा पलक फिर से मेरी गोद में आकर बैठ गई और फिर उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी। मैंने एक बार फिर से उसके
प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना रेशम की तरह कोमल और मक्खन की तरह चिकना अहसास मेरी अँगुलियों पर महसूस हो रहा था। जैसे ही मेरी अंगुली का पोर उस रतिद्वार के अन्दर
प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना "जिज्जू ! एक बात सच बोलूँ ?" "क्या?" "हूँ तमारी साथै आपना प्रेम नि अलग दुनिया वसावा चाहू छु। ज्या आपने एक बीजा नि बाहों माँ
प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना "पलक अगर कहो तो आज तुम्हें पहले वो ... वो ...?" मेरा तो जैसे गला ही सूखने लगा था। "सर, ये वो.. वो.. क्या होता है ?" मेरी हालत
जब सुहागरात को दुल्हन कमरे में बैठी होती है उस समय जब दूल्हे को कमरे में भेजकर भाभियाँ बाहर से कुंडी लगा देती हैं तो दूल्हे को चाहिए कि कुंडी खुलवाने के लिए थोड़ा सा निवेदन करने के बाद स्वयं अंदर से दरवाजे का कुंडी अंदर से लगा दे।
मैंने पिछली कहानी में आपको बताया था कि रानी को पाने के लिए कैसे मैंने पुष्पा से समझौता किया और उस समझौते के तहत किस तरह उसे चोदा। अब मैं बताता हूँ इस नए
प्रेषक : आदित्य कश्यप आप लोगों ने मुझे जो ईमेल और प्यार भेजा, उसके लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ! मैं फिर से हाजिर हुआ हूँ यह बताने के लिए उसके आगे
मेरी बीवी स्नेहा के सहयोग से अब मुझे उसकी सहेली व हमारे पड़ोस में रहने वाली अलका को चोदने को मौका मिलने वाला है, इस सोच के साथ आज मैंने स्नेहा को डट कर चोदा। अलका को मैं चोदूं, इसकी रिक्वेस्ट स्नेहा ने हमारी आज की चुदाई शुरू होने के पहले ही कर ली थी, पर मैंने सहमति चुदाई का पहला दौर निपटने पर ही दी।
उस दिन का खेल हमने वहीं ख़त्म किया, कपड़े ठीक किये और वहाँ से निकल गए। मैंने एक दिन मान्या से कहा- मान्या, अब रहा नहीं जाता। तो मान्या ने मुझे कहा- रहा तो
मेरा नाम तुषार है। मैं सूरत का रहने वाला हूँ।, मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, अन्तर्वासना की हर कहानी मैंने पढ़ी है। अब मैं अपनी एक सच्ची कहानी आपके
प्रेषक : युवराज मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, अन्तर्वासना का बहुत बड़ा फ़ैन हूँ। मैंने अन्तर्वासना डॉट कॉम की लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। आज मैं आपको अपनी
हेलो दोस्तो, अन्तर्वासना के सभी मित्रो को मेरा नमस्कार। यह मेरी पहली और सच्ची कहनी है। मैं नहीं जानता कि मैंने गलत किया या सही, परन्तु मैंने जो भी किया वो
मेरी नंगी जवानी-1 सायरा चिकनी चूत है या नहीं इसका अभी पता चल जायेगा! सोनिया ने मेरी तरफ देखा और कहा- सायरा, अपनी चड्डी उतार! यह सुनकर मेरे तो पैरों तले
दोस्तो, मैं आपके सामने एक सच्ची घटना रखने जा रही हूँ, मेरा नाम सायरा खान है, मैं एक मुस्लिम परिवार से हूँ. मेरी उमर बीस साल है, रंग गोरा, काले बाल और फिगर
प्रेषक : विक्की कुमार अब मुझे योगा की क्लास लेते हुए चौथा दिन था कि क्रिस्टीना की एक महिला दोस्त ने मुझसे पूछा- हमने हिन्दुस्तान के कामशास्त्र के बारे में
प्रेषक : विक्की कुमार पांच मिनट सुस्ता कर कर घड़ी देखी तो पता चला कि साढ़े पाँच बज चुके हैं, हमें सात बजे तक हेल्थ क्लब पहुँचना है, क्योंकि वहाँ सभी मेरा
प्रेषक : विक्की कुमार जैसा कि हमने तय किया था, वो दिन हमारा बिना कपड़ों के ही निकला, पूरे दिन हम या तो कुछ ना कुछ बना कर खाते रहे या फिर बिस्तर पर कुश्ती
प्रेषक : विक्की कुमार आज हम दोनों का मन भरा नहीं था। जैसे ही चुदाई का एक दौर पूरा होता, तो कुछ देर बाद थकान मिटाने के बाद जैसे ही नार्मल होते, क्रिस्टीना
प्रेषक : पल्लू अन्तर्वासना के बारे में मेरे एक दोस्त ने बताया था कि यहाँ बहुत ही सेक्सी कहानियाँ पढ़ने को मिलती हैं। तब से मैं हर कहाँ पढ़ता हू। फिर मुझे
प्रिय दोस्तो, मेरा नाम अमित है, पुणे का रहने वाला हूँ, मेरी उमर 23 साल है, मैं देखने में गोरा हूँ, मेरा लण्ड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है। यह मेरी पहली
लेखिका : शालिनी जब से हमारे पुराने प्रबंधक कुट्टी सर नौकरी छोड़ कर गए थे, नए प्रबंधक के साथ बैठकों में और काम में कार्यालय के सब लोग व्यस्त थे। रोज़ का एक
हेल्लो दोस्तो, मैं विकास, आज मैं अपनी सच्ची कहानी सुनाता हूँ। मेरी उम्र 19 साल है। मेरा एक दोस्त है। उसका नाम रोहण है। हम लोग साथ हमारे शहर से दूर कॉलेज
मैंने वे कपड़े पहन लिए। इतने महँगे कपड़े मैंने पहले नहीं पहने थे... मुलायम कपड़ा, बढ़िया सिलाई, शानदार रंग और बनावट। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। चाची ने मेरे
शगन कुमार दरवाज़े पर महेश और उसके साथियों को देख कर मैं घबरा गई। वे पहले कभी मेरे घर नहीं आये थे। मैंने अपने होशोहवास पर काबू रखते हुए उन्हें नमस्ते की और
शगन कुमार मैंने चुपचाप अपने छेद को 3-4 बार ढीला करने का अभ्यास कर लिया। "याद रखना... हम एक समय में छेद को एक-आध सेकंड के लिए ही ढीला कर सकते हैं... फिर वह
शगन कुमार मुझे भोंपू के मुरझाये और तन्नाये... दोनों दशा के लंड अच्छे लगने लगे थे। मुरझाये पर दुलार आता था और तन्नाये से तन-मन में हूक सी उठती थी। मुरझाये
शगन कुमार मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी। मैं खड़ी हो कर उससे लिपट गई। एक बार फिर मेरे नंगे बदन को उसके लिंग के छूने का अहसास नहीं हुआ... वह फिर से थक कर
शगन कुमार कोई 4-5 बार अपना दूध फेंकने के बाद भोंपू का लंड शिथिल हो गया और उसमें से वीर्य की बूँदें कुछ कुछ देर में टपक रही थी। उसने अपने मुरझाये लिंग को
शगन कुमार रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी। हरदम नितेश या भोंपू के चेहरे और उनके साथ बिताये पल याद आ रहे थे। मेरे जीवन में एक बड़ा बदलाव आ गया था। अब मुझे
शगन कुमार मैं खाना गरम करने में लग गई। भोंपू के साथ बिताये पल मेरे दिमाग में घूम रहे थे। खाना खाने के बाद शीलू और गुंटू अपने स्कूल का काम करने में लग गए।
शगन कुमार शायद उसे इसी की प्रतीक्षा थी... उसने धीरे धीरे सुपारे का दबाव बढ़ाना शुरू किया... उसकी आँखें बंद थीं जिस कारण सुपारा अपने निशाने से चूक रहा था और
शगन कुमार थोड़ी देर बाद भोंपू ने दोनों टांगों और पैरों की मालिश पूरी की और वह अपनी जगह बैठे बैठे घूम गया। मेरे पीछे के पूरे बदन पर तेल मालिश हो चुकी थी।
लेखक : शगन कुमार अब उसने मेरे ऊपर पड़ी हुई चादर मेरी कमर तक उघाड़ दी और उसे अपने घुटनों के नीचे दबा दिया। मैं डरे हुए खरगोश की तरह अपने आप में सिमटने लगी।
भोंपू को कुछ हो गया था... उसने आगे खिसक कर फिर संपर्क बना लिया और अपने लिंग को मेरे तलवे के साथ रगड़ने लगा। उसका चेहरा अकड़ने लगा था और सांस फूलने लगी थी...
मैंने शायद अपनी किसी कहानी में जिक्र किया भी है कि मेरे मामा के घर से वापिस आ जाने के बाद मेरे चुदाई के सम्बन्ध मेरे चचेरे भाई परेजू से हो गए थे। परेजू ने
प्रेषक : रौनक मकवाना मेरा नाम रौनक है, मैं मुंबई का रहने वाला हूँ। यह कहानी मेरे सपनों और मेरी हकीकत की हैं। आशा करता हूँ आप सभी पाठकों को मेरी कहानी पसंद
आपकी शालिनी राठौर आपके लिए एक बार फिर से अपनी मस्ती की दास्ताँ लेकर आई है. भूले तो नहीं ना मुझे? आया कुछ याद? हाँ जी आपकी वही शालिनी भाभी जयपुर वाली.
प्रेषक : राजवीर सिँह प्रेम मैं राजवीर सिँह मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 22 साल है। मेरा कद 6'2" है। मेरा लंड 7" का है। रंग गोरा है। मैँ बहुत
उम्र यही कोई 20-22 साल, बाल गन्दे, उलझे, लेकिन चेहरा सुन्दर है, ख़ास कर उसकी आँखें, फटे हुए वस्त्रों में से उसका बदन बाहर झांकता रहता है जिसे मैं और मेरे
प्रेषक : पंकज हाय दोस्तो, मेरा नाम पंकज (बदला हुआ) है और अभी बीटेक कर रहा हूँ। मैं दुर्गापुर में रहता हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैं
प्रेषिका : सुहासिनी मेरा नाम सुहासिनी है और मैंने इंग्लिश से एम ए किया है, मैं दिल्ली में रहती हूँ। मेरे पति कारोबारी हैं और वो कोयले की खदानों में से
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरी तरफ से नमस्कार ! मैं 23 वर्षीय मध्यम रंग का 5'10' कद का सामन्य दिखने वाला लड़का हूँ। मैंने अन्तर्वासना की लगभग सभी
प्रेषिका : राबिया पिछले महीने 19 जनवरी की रात जीजी की शादी हुई और इसी के साथ वो शादीशुदा हो गई। अगले दिन उनकी विदाई हुई और दो दिन बाद वो घर लौट आई पगफ़ेरे
प्रेषक : जय उसने धीरे से उसके फ़ूल जैसे गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रख दिये। मुझे पता ही नहीं चला कि यह सब कैसे हो गया, हम दोनों एक दूसरे में खोते जा रहे
जानू जाओ न प्लीज ! अलग सा चेहरा बनाकर बोली। मुझे उसका चेहरा देखकर हँसी आ गई, मैं बोला- रोओ मत ! जा रहा हूँ ! मैं कहाँ रो रही हूँ? ठीक है, चलो चलते हैं !
प्रेषक : जय मैं अन्तर्वासना को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उसने हम सभी लोगों के साथ जोड़ा। अब मैं अपनी कहानी बताता हूँ इसलिये अपने अपने हथियार थाम कर बैठ
आपने मेरी कहानी का पहला भाग वक़्त से पहले और किस्मत से ज्यादा पढ़ा होगा। वो रात कैसे गुजर गई पता ही नहीं चला। कॉलेज के बाद पहली बार पूरी रात जागते हुए
दोस्तो, मैं अर्पित एक बार फिर से आप के पास अपनी जिंदगी के कुछ यादगार लम्हे बांटने आया हूँ... आप सबने मेरी पिछली कहानियों में मेरे पहले प्यार के बारे में
लेखक : जीत शर्मा वो अचानक बेड से उठा और कमरे से बाहर जाने लगा। मैंने सोचा शायद मज़ाक कर रहा है। अभी वापस आकर मुझे अपने आगोश में ले लेगा। मैं इसी तरह बेड