लिंगेश्वर की काल भैरवी-4
(एक रहस्य प्रेम-कथा) मंदिर आ गया था। बाहर लम्बा चौड़ा प्रांगण सा बना था। थोड़ी दूर एक काले रंग के पत्थर की आदमकद मूर्ति बनी थी। हाथ में खांडा पकड़े हुए और
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार चुदाई की कहानी कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
(एक रहस्य प्रेम-कथा) मंदिर आ गया था। बाहर लम्बा चौड़ा प्रांगण सा बना था। थोड़ी दूर एक काले रंग के पत्थर की आदमकद मूर्ति बनी थी। हाथ में खांडा पकड़े हुए और
(एक रहस्य प्रेम-कथा) आज हमारा खजुराहो के मंदिर देखने का प्रोग्राम था। रात के घमासान के बाद सुबह उठने में देर तो होनी ही थी। सत्यजीत का जब फ़ोन आया तब आँख
(एक रहस्य प्रेम-कथा) लिफ्ट से नीचे आते मैं सोच रहा था कि ये औरतें भी कितनी जल्दी आपस में खुल कर एक दूसरे से अपने अंतरंग क्षणों की सारी बातें बता देती हैं।
प्रेषक : अन्नू निशा मेरी एक मात्र लंगोटिया दोस्त है। एक दिन की बात है, जब मैं निशा के बुलाने पर उसके घर गया तो उसके घर वाले कहीं बाहर गए हुए थे। घर में हम
(एक रहस्य प्रेम-कथा) मेरे प्रिय पाठको और पाठिकाओ, मेरी यह कहानी मेरी एक ई-मित्र सलोनी जैन को समर्पित है जिनके आग्रह पर मैंने अपने इस अनूठे अनुभव को कहानी
नमस्कार दोस्तो, सबसे पहले आप सबका धन्यवाद करता हूँ कि आप सभी को मेरी पिछली कहानियाँ काफी पसंद आई और आपके सुझावों और सराहना के लिये शुक्रिया। मेरी पिछली
प्रेषक : रॉकी कुमार मैं नौकरी की तलाश में हैदराबाद गया हुआ था, वहाँ मैं एक बॉयज़ हॉस्टल में रुका था अपने कुछ दोस्तों के साथ। जहाँ यह हॉस्टल था वो जगह
प्रेषक : जो हण्टर यदि घर में एक अदद भाभी हो तो मन लगा रहता है। उसकी अदायें, उसके द्विअर्थी डॉयलोग बोलना, कभी कभी ब्लाऊज या गाऊन में से अपने सुडौल मम्मे
उसने कहा- लगातार चुभन से कभी कभी सिहरन होती है इसलिए उसे उसके हाथों को कुर्सी के हत्थों से बांधना होगा। शालू तब तक शर्म पर काबू पा चुकी थी, उसने पूछा क्या
21 मई का बेसब्री से प्रतीक्षित दिन ! हमारी शादी की सालगिरह ! शालू को उसका तोहफा देने का दिन ! "क्या पहनकर जाना ठीक रहेगा?" मैंने सुझाया कि शलवार-फ्रॉक या
दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानी केले का भोज को तहेदिल से पसंद किया। शुक्रिया। उससे पहले स्वीटी या जूली, पुष्पा का पुष्प आदि कहानियों ने भी आपका भरपूर
प्रेषक : जो हन्टर इस इन्सानी दुनिया से खौफ़नाक और कोई दूसरी क्रूर दुनिया नहीं है। आप ठीक कहते है, जी हाँ ! एक दूसरी दुनिया भी है पर वहाँ के भी कुछ अपने ही
आमिर को अपनी बीवी किसी बस्ते में लिपटी हुई मजहबी किताब की तरह लगती थी जिसे हाथ लगाते वक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है। उसके निकाह को दस साल हो गये थे लेकिन
लेखिका : शालिनी मैं और पूजा क्रिसमस के दिन घर पर ही थे। पूजा ने एक छोटी सी पार्टी का इंतज़ाम किया था इसलिए शाम को हम दोनों कुछ खरीदारी करने बाजार गए। उसने
आपने मेरी कहानी और मेरी बीवी पकड़ी गई पढ़ी होगी. आज मेरा बहुत दिन पुराना सपना सच होने जा रहा था. वजह थी कि मैं अपनी बीवी नीना को चुदते हुए देखना चाह रहा था.
प्रेषक : अक्षय कुमार ओझा तो भाई लोगो, मैं अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ कि कैसे हम चार दोस्तों ने अपने ही एक दोस्त की बीवी की प्यास बुझाई थी। हम पाँच दोस्त
मैं आज अपनी चुदैल बीवी नीना की वह दास्तान बताने जा रहा हूँ, जिसके बाद हम दोनों की जिंदगी में बहार आ गई.
मैं शालिनी ... याद तो हूँ ना आपको... आपकी मदमस्त भाभी... आज फिर आपके साथ अपनी मस्ती की एक यादगार चुदाई की दास्तान बांटने आई हूँ। उम्मीद है पहली कहानियों
मैं अन्तर्वासना का नियमिक पाठक हूँ। मैं आप सब को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मुझे मालूम है कि आप सोच रहे होंगें कि सब ऐसा ही कहते हैं कि यह
प्रेषक : करन सिंह सभी आदरणीय पाठकों को मेरा अभिवादन। मैं अन्तर्वासना का एक नियमित सदस्य हूँ और मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुना रहा हूँ। मैं आपको यह अपनी
जंगल की वीरानियों को चीरता हुआ एक रथ बहुत तेजी से भागा जा रहा था। उस रथ पर सवार वीर्यपुर की महारानी चूतनन्दा सवार थी। उन्हें शिकार का बहुत शौक था। इस समय
प्रेषिका : निशा भागवत कहानी का पिछ्ला भाग: ये दिल ... एक पंछी- 1 "ओह्ह्ह ! मैं तो गई..." "प्लीज निशा ..." निशा की चूत से पानी निकल चुका था। पर उनका लण्ड
निशा की शादी हुये पांच वर्ष से अधिक हो चुका था। अब वो पच्चीस वर्ष की हो चुकी थी। पति सरकारी नौकरी में थे। सब कुछ साधारण सा चल रहा था। बस मूड होता था तो वो
प्रेषक : अभिषेक सिंह मेरा नाम अभिषेक सिंह है, मैं बी.कॉम कर रहा हूँ, उम्र बीस साल है लेकिन देखने में 25 का लगता हूँ। मेरा कद 6'2" है, देखने में स्मार्ट
प्रेषक : आदित्य चांद सभी अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार ! मेरा नाम आदित्य है। मेरी उम्र 24 वर्ष है। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना के बारे में
मेरा नाम गौरव है और मेरी गर्लफ्रेंड का नाम जूली है। मैं आज आप लोगों के सामने एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ। बात उन दिनों की है जब हम लोग कॉलेज में पढ़ा करते
हेल्लो दोस्तो, मैं राजवीर एक बार फिर से हाजिर हूँ एक नई दास्ताँ लेकर ! मैंने कई कहानियाँ लिखी, कई सारे मेल आये। कुछ कहते हैं झूठ है, कुछ कहते हैं सच है।
प्रेषक : अमेय अमेय को फोटोग्राफी का शौक था। कम उम्र से ही वह नियमित रूप से शादी और पार्टी के फोटोग्राफर के रूप में सप्ताहांत पर काम कर रहा था। अपने कॉलेज
प्रेषिका : स्लिमसीमा "जी नहीं ! अक्ल के लिए !" उसने गर्दन ऊँची करके कहा। "क्या निरे बेवकूफ हैं जो बार-बार तुमसे अक्ल मांगने चले आते हैं? उल्लू का मांस
प्रेषिका : स्लिमसीमा "तुम यह काम क्यों कर रही हो? महज पैसे के लिए? क्या पैसा ही तुम्हारे लिए सब कुछ है?" "मैं इस प्रोफेशन में पैसे और सेक्स के लिए नहीं आई
प्रेषिका : स्लिमसीमा खान मार्केट के ब्लू कैफ़े में उसे पहली बार देखा कला प्रदर्शनी के चित्रों को गौर से देखते, जैसे रंगों की जुबां समझने की कोशिश कर रही
प्रेषक : राज मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं। मुझे भी अपनी कहानी अन्तर्वासना पर लिखने का मन किया तो मैं
प्रेषक : राजीव मैंने कहा- ठीक है जैसा तुम कहो, लेकिन फिर कब मिलोगी? और मैं जवाब के इन्तजार में उतावला हो रहा था, हर सेकंड ऐसे लग रहा था जैसे सदियाँ गुजर
प्रेषक : राजीव मेरा और आगे नियमित पढ़ने का मन नहीं तो मैंने पारिवारिक व्यवसाय में काम करना शुरू कर दिया और उसके एक साल बाद ही नीतू की शादी हो गई और कुछ
प्रेषक : राजीव सभी दोस्तों को नमस्ते ! मेरा नाम राजीव है, मेरे दोस्त मुझे राज भी कहते हैं और आज मैं आपके साथ मेरे एक ऐसे अनुभव को बाँटना चाहता हूँ जो असल
लेखिका : कामिनी सक्सेना नेहा के हाथों की गति तेज होती जा रही थी... और फिर स्पर्श ने एक तेज चीख सी निकाली और उसके लण्ड ने जोर से पिचकारी छोड़ दी। नेहा तो
लेखिका : कामिनी सक्सेना यह कहानी नेहा वर्मा की एक सच्ची कहानी है, जिसे उन्होंने मुझे लिखने को कहा है। यह एक साधारण सी कहानी है जो किसी की जिन्दगी में भी
कहानी का पहला भाग: मेघा की तड़प-1 मेघा घर चली आई। दिन के बारह बज रहे थे। जीजू तो दस बजे ही ऑफ़िस जा चुके थे। मेघा ने जल्दी से चपातियाँ बनाई और जाकर लेट गई।
आह ! मैं तो मॉम का शरीर देख कर स्तब्ध रह गया। चिकना तराशा हुआ बदन, काम की देवी जैसी मूर्ति ! पर मॉम को जैसे फ़ुर्सत ही कहाँ थी। उन्होंने मुझे पकड़ा और जोर से बिस्तर पर पटक दिया।
प्रेषक : अजय सिंह अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और ज़ाहिर है कि आप सभी की तरह मुझे भी लोगों की भेजी गयी
मैं राजेश एक कंपनी में काम करता हूँ और मेरे साथ लड़कियाँ और औरतें भी काम करती हैं। मैंने एक माँ और बेटी दोनों को एक साथ तो नहीं पर एक ही बिस्तर पर चोदा है।
लेखक : प्रेम गुरु और अरमान मैंने झट से अपने कपड़े उतार दिए और फिर राखी के सारे गहने उतार दिए ताकि कोई परेशानी ना हो। उसके बाद मैंने उस के गालों पर एक छोटा
कहानी का पिछ्ला भाग: जिस्म की मांग-1 हम दोनों खड़े हुए, खून का धब्बा बोरे पर देखा- यह क्या हुआ? "तेरी जवानी की झिल्ली फटी है रानी !" "बिटटू मुझे धोखा मत
लेखक : सन्दीप शर्मा दोस्तो, उम्मीद है आप सभी मजे में होंगे मेरी पिछली कहानी पलक की चाहत और मुंबई के सफर का मुझे शानदार जवाब मिला है दोस्तों और उसके लिए आप
प्रेषक : आदित्य नमस्कार दोस्तो, आजकल के दौर में सारे लड़कों की चांदी है क्योंकि आजकल की लड़कियाँ जल्दी ही चोदने देती हैं। मैं अपनी पहली चोदन-कार्यक्रम का
सबसे पहले मेरी ओर से सभी चूतों और लौड़ों को मेरा नमस्कार। आज मैं आप सब लोगो के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश करने जा रहा हूँ, आशा करता हूँ कि यह आप सबको
नेहा वर्मा सुन्दर की ट्रेनिंग के दौरान प्रिया और राधा गोपाल से खूब चुदी थी। सुन्दर ट्रेनिंग से वापस आ चुका था। अब तो गोपाल को सुन्दर की उपस्थिति बहुत खराब
नेहा वर्मा राधा तो मस्ती से चुदे जा रही थी। एक लय में चूत और लण्ड चल रहे थे। राधा को मन के मीत की चुदाई मिल गई थी। गोपाल भी अपनी मनपसन्द लड़की की चुदाई
नेहा वर्मा राधा और प्रिया के मन की मुराद पूरी हो रही थी। सुन्दर और राधा की शादी हो रही थी। पर प्रिया ने सुन्दर से वादा लिया कि शादी की पहली सुहागरात वो
नेहा वर्मा प्रिया ने अपने दोनों टांगें अपनी छाती से चिपका ली और अपनी गाण्ड पूरी तरह से खोल दी। प्रिया ने अपनी गाण्ड उभार कर सुन्दर के लण्ड से चिपका दी।
नेहा वर्मा यह कहानी तीन प्रेमियों की है। इस कहानी के पात्र फ़िल्म संगम के पात्रों से मिलते-जुलते हैं और कहानी में वही त्रिकोण है। गोपाल और सुन्दर बचपन के
(एक रहस्य प्रेम कथा) ….. प्रेम गुरु की कलम से पिछले भाग में आपने पढ़ा : मिक्की मेरी जान, मेरी आत्मा, मेरी प्रेयसी, मेरी प्रियतमा मैं तुमसे प्रेम करता था,
कहानी का पहला भाग: जेब में सांप-1 मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना सार माल उसके पेट पर निकाल दिया। वो बोली- भैया, यह क्या
(एक रहस्य प्रेम कथा) मिक्की ! मेरी जान, मेरी आत्मा, मेरी प्रेयसी, मेरी प्रियतमा मैं तुमसे प्रेम करता था, आज भी करता हूँ और करता रहूँगा ….. प्रेम गुरु की
नमस्कार, मेरा नाम मोहित पवार है, मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मेरे मस्त लौड़े की तरफ से सभी की चूत को प्यार भरा नमस्कार! मैं आपको एक अपनी एक सच्ची
मैंने दरवाजा बंद कर दिया और सोनम की तरफ देखा तो सोनम के चेहरे पर एक शर्म थी जो मुझे अच्छी लगी. मैं सोनम के करीब गया और उसे कस कर बाहों में जकड़ लिया.
प्रेषक : नवीन सिंह मैंने रात को ही रचित को फोन किया- लाइन साफ़ है, कल का कार्यक्रम तय है भाई ! और फोन सुजाता के कान में लगा दिया। वो बोला- ठीक है भाई, कल
मेरी ये कहानी मेरी एक ई-मित्र को समर्पित है - प्रेम गुरु गुरूजी कहते हैं “जिन के घर शीशे के होते हैं वो लाईट जला कर मुट्ठ नहीं मारा करते ” रात के कोई साढ़े
रीता और गीता अब नंगी थीं। रंजना ने भी अपनी स्कर्ट उतार दी, रंजना की चूत पाव रोटी की तरह फूली हुई थी। मैंने रूचि के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया था। रूचि ने
नमस्कार दोस्तों, सबसे पहले तो मैं आप सबका धन्यवाद करता हूँ कि आप सभी को मेरी पिछली कहानी मैं और मेरी प्यारी शिष्या काफी पसंद आई। साथ ही आपसे क्षमा चाहता
प्रेषक : रिन्कू गुप्ता प्रिय पाठको, मेरा नाम रिंकू है जैसा कि आप लोग पहले से ही जानते हैं . आज मैं आप लोगों से दिल्ली की हकीकत बयां करने जा रहा हूँ।
प्रेषक : जीत मेरा नाम जीत है, अहमदाबाद का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैंने सोचा कि मैं भी अपनी जिन्दगी के कुछ हसीन पल आप लोगों को
दोस्तो, यह मेरी एक आपबीती कहानी है, मेरा नाम पीयूष है, प्यार से सभी मुझे पप्पू कहते हैं। मेरी उम्र अब 35 साल है लेकिन यह बात उन दिनों की है जब समाज में
राहुल कैपरी यह छोटी सी कहानी मेरी और नेहा के बीच की है। इस कहानी को मैंने श्रीमती नेहा वर्मा को संशोधित करने हेतु भेजा था। उनके सुन्दर सहयोग के लिये मैं
यह कहानी नहीं, सच है लेकिन कहानी के रूप में ! यह किसी एक लड़की या महिला की कहानी नहीं है। यह उन कई महिलाओं और लड़कियों की दास्तान और अनुभवों को मिला कर
‘‘पिता जी !’’ उसके मुख से शब्द निकल ही नहीं रहे थे। प्रसन्नता इतनी थी कि वर्षा फ़ूली नहीं समा रही थी। साइबर कैफे से बाहर आते ही उसने घर का नम्बर मिलाया।
हमारे गाँव में पवन के पिताजी की करियाने की दुकान थी। वह अपने पिताजी की तरह मोटू व अकड़ू था। मेरे पिताजी नगर की नगरपालिका में क्लर्क थे, रोज छः किलोमीटर
मेरा नाम लोकेन्द्र शर्मा शर्मा है मैं अभी दिल्ली मैं रहता हूँ। मैं एक 5'7" इंच लंबा तगड़ा और सुंदर जवान हूँ। मेरी उमर 22 साल और मैं उत्तर प्रदेश से हूँ। यह
नेहा वर्मा एवं शमीम बानो कुरेशी फ़िर एक दिन मैं जब सवेरे विजय के यहाँ गई तो वहाँ उसका एक दोस्त और था। मैं उसे नहीं जानती थी... पर वो मुझे जानता था। उसने
नेहा वर्मा एवं शमीम बानो कुरेशी "कल आऊँगी... अब चलती हूँ !" "मत जाओ प्लीज... थोड़ा रुक जाओ ना !" वह जैसे लपकता हुआ मेरे पास आ गया। "मत रोको विजय... अगर कुछ