पटियाले दा पटोला
पैंटी उतरते ही जो नजारा मेरे सामने आया मैं उसका बता नहीं सकता। उसकी फुद्दी पर कोई भी बाल नहीं था, उसकी फुद्दी भी बहुत गोरी थी। मुझे ही पता है कि मैंने कैसे खुद पर काबू रखा।
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार कोई मिल गया कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
पैंटी उतरते ही जो नजारा मेरे सामने आया मैं उसका बता नहीं सकता। उसकी फुद्दी पर कोई भी बाल नहीं था, उसकी फुद्दी भी बहुत गोरी थी। मुझे ही पता है कि मैंने कैसे खुद पर काबू रखा।
जब मैं उसकी चूचियों को देखता तो वो मुस्कुरा देती, इससे मेरा हौसला और बढ़ रहा था। मैंने फिर अपना पैर कम्बल के अंदर उसके पैर से धीरे से सटाया तो वो कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा दी।
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्रणाम। मेरा नाम दीपक है। आज मैं आप सबके सामने अपने जीवन की पहली चुदाई का वर्णन करना चाहता हूँ। आजकल मैं मेरठ में रह कर
प्रेषक : सुज़ान कौर अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा कोटि-कोटि नमस्कार ! आपने मेरी पहली कहानी जब वो हुई अट्ठारह की पढ़ी, अब मैं फ़िर से हाजिर हूँ एक नई आपबीती
सभी अन्तर्वासना के पाठकों को मेरी तरफ से यानि बबली की तरफ से बहुत बहुत प्यार, दुलार, पुचकार, गीली चूत से नमस्कार ! मैंने अन्तर्वासना पर छपने वाली हर एक
लक्ष्य भारद्वाज हाय दोस्तो ! मैं अपने और अपनी पत्नी के बारे में बताता हूं। मेरा नाम एस गुप्ता है और मेरी पत्नी का नाम एन गुप्ता है। मैं मूलतः राजस्थान का
मैं सारिका इक्कीस वर्षीया महाराष्ट्रियन सुन्दरी नागपुर से ! लोग कहते हैं कि मैं बहुत सुंदर हूँ और शायद मैं हूँ भी ! क्योंकि मेरे पास वो सब कुछ है जो एक
प्रेषक : राहुल गुप्ता हेलो दोस्तो ! मेरा नाम सुमित है और मैं दिल्ली में एक जगह घोन्डा में रहता हूं मैं २० साल का हूं मेरा लन्ड भी लोहे की राड की तरह खड़ा
प्रेषक : शिमत सोनिया मुझ से चुद कर अपनी सहेली ॠचा से बात करवाने का वायदा करके चली गई। अगले दिन सोनिया का फ़ोन आया मेरे पास और मुझे एक काफ़ी शॉप में आने को
आज मैं आप लोगों को अपनी कहानी ममेरी बहन के संग ममेरी बहन और उसकी सहेली-1 ममेरी बहन की ननद-1 के आगे सुनाने जा रहा हूँ, उम्मीद है कि आप लोगों को पसंद आएगी।
दोस्तो, मैं राज कोलकाता से ! मेरी 3-4 कहानियाँ अन्तर्वासना पर आ चुकी हैं। यह कहानी मेरे एक नेट दोस्त के अनुभव पर आधारित है, आशा है कि आपको पसंद आएगी। यह
लेखिका : अनुष्का उस दिन अज्जु ने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मैं बहुत खुश हो गई और तभी मैंने अज्जु को बताया कि मैं अपनी एक सहेली के साथ समलैंगिक हूँ।
प्रेषक : मयंक यह सत्य घटना है चूँकि मैं सेल्स प्रोफेशन से हूँ, कई बार जल्दी में बिना रिजरवेशन के भी यात्रा करनी पड़ती है। इसी तरह मुझे ठंड के दिनों में
मैंने भी अपने सीने को उभारा और मैं इतरा कर उसके साथ साथ चलने लगी। वो भी अपना लण्ड पकड़ाये हुए आराम से पूल के किनारे किनारे चलने लगा। जाने कब मैंने भी उसके
लेखिका : शमीम बानो कुरेशी मैं बाज़ार जाने के लिये घर से निकल पड़ी। मुख्य सड़क पर आते ही मैंने सिटी बस ली और उस भीड़ में घुस गई। वही हुआ जो मैं चाहती थी। बस
प्रेषक : शकील फ़िरोज़ मैंने धीरे धीरे करके टीशर्ट और हाफपैंट खोल दिए। वो साली काली ब्रेज़ियर और काली पैंटी पहने थी। गोरा बदन और ये काले कपड़े ! साली मस्त लग
प्रेषक : शकील फ़िरोज़ दोस्तो, मेरा नाम शकील है। मैं एक बार ट्रेन में मुंबई का सफ़र कर रहा था, वैसे भीड़ तो न थी और ट्रेन खाली थी। ट्रेन रुकते ही एक आदमी
मैंने नीलम का मुँह हाथ में लेकर उसे प्यार करते हुए पूछा- नीलम, सच बताना! तुम्हें मेरा लंड कैसा लगा और यही पूछने के लिए मैंने राजू को थोड़ी देर के लिए बाहर भेजा है।
तुम जितने प्यार से मुझसे चुदवाओगी उतनी ही राजू की परेशानी कम होगी। मैंने रंडियाँ बहुत चोदी हैं लेकिन तुम्हारी तो बात ही कुछ अलग है। मुझे जबरदस्ती करना पसंद नहीं।
प्रेषक : पुरुषोत्तम शास्त्री मेरा नाम पुरुषोत्तम शास्त्री है। मैं एम ए का छात्र हूँ। यह मेरी प्रथम कहानी है। मैं एक धर्मशाला में रहता था। पुष्कर का मेला
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- शैलीन, सच में तुम बहुत खूबसूरत हो! मैंने आज तक तुम्हारे जैसी कभी किसी को नहीं देखा! जी तो चाहता है कि तुम्हें हमेशा के लिए अपना बना लूँ!
मैंने पहले शैलीन की पैंटी उतारी फिर उसकी मैक्सी! मैंने अपने भी पूरे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे 69 की अवस्था में लेट गए, मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया!
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, सही-गलत समझ में नहीं आ रहा था। अगर शैलीन को कोई ऐतराज नहीं है, तो मैं क्यों संत बन रहा हूँ? मैं अभी इसकी जरुरत हूँ, यह मेरी!
शैलीन ने सफ़ेद नाईट हॉट मैक्सी (आधे सीने से ले कर जांघ के ऊपर तक का कपड़ा) पहनी थी जिसके आर-पार सब कुछ दिख रहा था, उसके खुले बाल गीले थे मतलब वो नहा कर आई थी!
प्रेषिका : श्रेया अहूजा मैं श्रेया आहूजा आपको ऐसी वास्तिविकता से परिचित कराने जा रही हूँ जिससे आप अनजान होंगे ! ब्लू फिल्म की हिरोइन के बारे में जो आपके
आँखों के सामने चुदाई का यह सजीव दृश्य देखने के बाद में भावनाएँ और भी भड़क उठी थी। अच्छे बुरे के बारे में सोचना बंद हो गया था, मन में सिर्फ एक ही ख्याल था
प्रेषक : राज अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्रणाम ! सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ : मेरा नाम राज है, मैं गुडगाँव में रहता हूँ। वैसे तो मैं
प्रेषक : शिमत प्रथम भाग से आगे : फिर दीदी ने कहा- तुम दोनों एक दूसरे बात करो, मैं कॉफ़ी बना कर लाती हूँ। फिर सोनिया बोली- तुम क्या कर रहे हो पढ़ाई में?
दूसरे वाले ने भी लौड़ा निकाल लिया कभी एक मुँह में देता, कभी दूसरा देता। दोनों के बड़े-बड़े लौड़े थे, मैं जल्दी-जल्दी चूसने लगी। वो मेरे चुचूकों को चुटकी से मसल रहे थे, दोनों ने मुझ से खूब लौड़े चुसवाये और मुझे दबाया-मसला।
उसने जल्दी से मेरी सलवार का नाड़ा खोल लिया और वहाँ पड़ी एक पुरानी दरी बिछा मुझे लिटा कर मेरी टाँगें ऊपर उठवा ली और मेरी गीली चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया।
वो मेरे लंड को देख कर सीधा उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तो वो लंड के साथ ही खेलती रही। मेरा लंड पूरा सात इंच का हो गया था, फ़िर वो मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसती रही।
मैं श्रेया आहूजा, आपकी कमसिन लेखिका आपको पिछले सप्ताह मेरे साथ बीते हुए उन लम्हों के बारे लिखे दे रही हूँ जिससे आप भी सुनकर कहेंगे- पेल दे पर बेल दे ! मैं
लेखक : राज शर्मा प्रथम भाग से आगे : वो बोली- जब तुम्हें देख कर मेरा हाल खराब हो रहा है तो लड़कियों का क्या होता होगा। मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं? वो मेरे
मैं राज एक बार फिर अपने दोस्तों के लिए एक दिलचस्प सच्चा किस्सा ले कर आया हूँ। हर बार की तरह इस बार भी मैंने इस किस्से को थोड़ा मसालेदार बनाने के लिए कुछ
हाय दोस्तो, मेरा नाम हर्ष है, मैं सूरत से हूँ। मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। मैं पहले मोबाइल शॉप चलाता था। वहाँ पर एक भाभी हमेशा रिचार्ज
मेरा नाम राज है मेरी उम्र 23 साल हो गई है। मैं बॉडी-बिल्डर कम कॉल-बॉय ज्यादा हूँ क्यूंकि मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। किसी भी औरत का पूरा जीवन
प्रेषक : ? एक बार काम के सिलसिले में मुझे दिल्ली में दो महीने रुकना था। मैं अपने एक दोस्त के रिश्तेदार मिस्टर यादवेन्द्र सिंह के यहाँ पेईंग-गेस्ट बन कर
प्रेषक : राहुल नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है अन्तर्वासना पर। मेरा नाम राहुल है, उम्र 23 साल, मैं आगरा में रहता हूँ। बात करीब दो साल पहले की है,
प्रेषक : राज शर्मा आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ कि मैंने कैसे पहली बार चुदाई की ! उम्मीद है आप सबको यह कहानी पसंद आएगी ! तो दोस्तो, बात
लेखिका : लक्ष्मी कंवर मैं तीस वर्षीया शादीशुदा स्त्री हूँ। शादी को काफ़ी अर्सा हो गया है। अब मेरे पति मेरी चुदाई में कम दिलचस्पी लेते हैं। ऐसे में इनका एक
मैं रीमा के पास ही सो गया, रीमा पूरी नंगी ही सोई हुई थी। उसकी गांड मेरी तरफ थी, मैं उसे सहला रहा था कि मुझे नींद आ गई। काफ़ी देर के बाद मेरी नींद खुली, रीमा की नंगी गाण्ड देख मैं उसे सहलाने लगा।
यह एक सच्ची कहानी है, मानो या न मानो, आज से तीन साल पहले शुरू हुई और आज भी जारी है। मेरा नाम महेश शाह, उम्र 39 साल, एक बैंक ऑफिसर हूँ और वदोदरा में रहता
गुरु जी को प्रणाम ...और सभी अन्तर्वासना के पाठकों को नमस्कार ! मेरा नाम कमलेश है, मैं रहने वाला रायपुर छ्त्तीसगढ़ का हूँ, मेरी पढ़ाई भोपाल में हुई है।
प्रेषक : विनय पाठक मैं आपको अपनी पिछली कहानी में बता चुका हूँ कि कैसे मैंने अपनी टीम की लड़की को गांव की चौपाल पर चोदा और फिर कैसे चौपाल के पीछे वाले घर
दोपहर बाद जब सब खाना खाने के लिये जाने लगे तो मैंने उसे छेड़ने के लिये कहा- तुम्हें कुछ याद है नीतू? उसने कहा- क्या सर? मैंने कहा- कल तुमने मुझे कुछ देने
दोस्तो, मेरा आप सभी को लण्ड हाथ में लेकर प्यार भरा नमस्कार। मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मै अपने बारे में फिर से बताना
मेरा नाम स्वयम् है, मैं पुणे का रहने वाला हूँ. मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी मैं काम करता हू. जो पुणे के हिन्जेवाड़ी आईटी पार्क एरिया में है. अन्तर्वासना पर यह
मैंने हाथ बढ़ाया, जैसे ही उसने रूमाल लेना चाहा... मैंने कसकर उसे खींच लिया और सीने से दबोच कर छिपकली की तरह चिपका लिया। इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने उसके
मेरा नाम माही है। मैं अन्तर्वासना का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मुझे यकीन है कि आप सबको यह बहुत
प्रेषिका : नेहा दवे मेरा नाम नेहा है, उम्र 26 साल है। यह कहानी मेरी आपबीती है। मैं एक मॉडल हूँ, मैं दिल्ली से मुंबई चली गई यह सोच कर कि मुंबई में ज्यादा
लेखक : जय कुमार हम लोग पौने चार बजे हरिद्वार पहुँच गये। कमल के पापा ने मुझे अवाज़ लगाई- जय बेटे, अब बताओ कि पहले किस जगह पर चलें? मैंने कहा- अंकल जी, पहले
लेखक : जय कुमार एक दिन मेरे दोस्त कमल का फोन आया- यार जय, कल हम सभी लोग हरिद्वार जा रहे हैं, पापा ने कहा है कि तुमको भी हमारे साथ चलना है। मैंने कहा- कमल
मैं हमेशा ऐसी लड़की तलाश करता रहता हूँ जो मुझे अपनी चूत दे दे और मेरे साथ मज़े करे। मैं जब दिल्ली आया था तो मैं जिगोलो बनाना चाहता था क्योंकि चूत के साथ पैसा भी जरुरी होता है।
प्रेषक : विक्की कुमार अब क्रिस्टीना भी कुछ अपने मुँह में लेना चाहती थी। वह थोड़ी देर बाद वह नीचे खिसक गई और मेरा लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी। फिर कुछ देर
प्रेषक : विक्की कुमार अभी तो क्रूज़ पर डांस व डिनर खत्म होने में करीब दो घंटे बाकी थे, और हमारा स्टीमर तो किनारे से बहुत दूर निकल आया था। यहाँ तो यह हालत
प्रेषक : विक्की कुमार मैं परम आदरणीय गुरुजी का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मेरी आत्मकथा के अंश "हवाई जहाज में चुदाई" को अपनी जग प्रसिद्ध वेबसाईट अंतर्वासना
प्रेमशीर्ष द्वारा लिखित एवम् प्रेम गुरु द्वारा संशोधित और संपादित उससे भी अब नहीं रहा जा रहा था। उसने अपनी शर्म त्याग कर एक झटके में मेरी चड्डी को नीचे कर
प्रेमशीर्ष द्वारा लिखित एवम् प्रेम गुरु द्वारा संशोधित और संपादित बस मैं समझ गया कि मेरी प्रेम तपस्या आज वरदान बन के बरसने वाली है। यह तो हरी झंडी है अपनी
प्रेषक : ऋषि मैं अन्तर्वासना का नया पाठक हूँ। कुछ कहानियाँ पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए क्योंकि आजकल कोई भी सेक्स से अछूता नहीं
मैं एक बार फिर से आपके सामने हाजिर हूँ अपनी एक आपबीती को लेकर ! मेरी पिछली कहानी कंप्यूटर की प्रॉब्लम आप सबने पसंद की इसके लिए सबका शुक्रिया ! मैं आप सबको
मुझे लगा कि मुझसे भी ज्यादा लोग गर्म हैं इस दुनिया में, जो जिस्म की आग में तप रहे हैं! मैंने कोमल के जिस्म से आखिरी कपड़े भी अलग कर दिए!
यह मेरी सच्ची कहानी है। मेरी एक गर्लफ्रेंड हुआ करती थी पायल ! करीब छः साल पहले हम दोनों एक दूसरे के बहुत के करीब थे और शादी करना चाहते थे। हम रोज़ मिलने
कहानी का पहला भाग: हवाई जहाज में टर्किश लड़की की चुदाई- 1 मैं खुश था कि एक विदेशन सुन्दरी मेरी गोद में लेटी हुई है। उसका सिर मेरे लण्ड पर टिका हुआ था तो
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्ते! हर व्यक्ति की जिन्दगी में कुछ ऐसे हसीन पल आते हैं, जिन्हें याद कर वह प्रसन्नता का अनुभव करता है। ऐसा
लेखिका : नेहा वर्मा मैं गर्मी की छुट्टियों में रतलाम आ गई थी अपने पापा के पास। घर में छुट्टियों में बहुत पाबन्दी रहती थी ना। पापा तो ऑफ़िस चले जाते थे सो
सभी आंटियों और लड़कियों की फड़कती चूतों को मेरा प्यार भरा चुम्बन ! ज्यादा वक़्त बर्बाद ना करते हुए मैं सीधा अपनी कहानी शुरू करता हूँ। बात सर्दियों के दिनों
लेखक : माइक डिसूज़ा अब तक आपने पढ़ा कि मुझे ट्रेन में शिल्पा नाम की एक लड़की मिली जिसने मुझे चुदाई का भरपूर मज़ा दिया और अपने चुदाई के किस्से भी सुनाये। मेरे
अदिति मस्ती में पागल हुई जा रही थी। वो अपने असली पुलीसिया अन्दाज में आ चुकी थी। सुनील भी इसी आनन्द में डूबा हुआ था। उसका मोटा लण्ड अदिति को दूसरी दुनिया की सैर करवा रहा था।
प्रेषक : लव पूरा गुजरात नवरात्र की तैयारी में जुट गया था! गुजरात ही क्यों, पूरा देश नवरात्र के स्वागत के लिए तैयार हो रहा था! सारे देश में नवरात्र अलग अलग
प्रेषक : रवि मेरी पिछली कहानी "शादी शुदा औरत की चुदाई" को आप सभी ने पसंद किया उसके लिए धन्यवाद। अब मैं आपको एक और कहानी बताने जा रहा हूँ, इस बार मैंने