अपॉयंट्मेंट
मेरी 2 बजे की अपॉयंट्मेंट थी। एक हफ्ते पहले यह अपॉयंट्मेंट पक्की हुई थी, तब से आज तक चैन से नींद नहीं आई है, पहली बार किसी से सेक्स के प्रति अपना डर बताने
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार कोई मिल गया कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
मेरी 2 बजे की अपॉयंट्मेंट थी। एक हफ्ते पहले यह अपॉयंट्मेंट पक्की हुई थी, तब से आज तक चैन से नींद नहीं आई है, पहली बार किसी से सेक्स के प्रति अपना डर बताने
प्रेषक : अक्षय सिंह दोस्तो, आप सभी को अक्षय का सलाम। मैं राजस्थान के एक सुंदर शहर का रहने वाला हूँ, मेरा खुद का व्यवसाय है जो काफी अच्छा चलता है, मैं
उसके बाएँ वक्ष पर एक गहरा काला तिल था, और यह मेरा निजी अनुभव है कि वक्ष पर तिल वाली लड़कियाँ बहुत उत्तेजक और कामी प्रवृति की होती हैं और उनके पति उनसे सदैव सुखी और संतुष्ट रहते हैं।
प्रफ़ुल्ला ब्लाउज और पेटीकोट में थी, साड़ी हटते ही उसकी कामुक देह का आभास होने लगा था, अब मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और उसके खुले पल्ले अलग कर के छोड़ दिए उसे पूरा निकाला नहीं।
मुझे लिखते हुए शर्म आ रही है, लेकिन आप लोग खुद ही समझदार हो कि वो मुझे अपनी बीवी मुझे सौंपने को कह रहा था, वो भी बिस्तर पर!
वो अपनी बीवी के बारे में बताने लगा कि वो कैसी दिखती है. फिर वो उसके वक्ष, कमर, उसके उभरे हुए चूतड़ों, यहाँ तक कि चूत की बातें भी करने लगा.
आँटी आई। वो पहली बार था जब मैंने चूत देखी थी, वो दिन मेरी जिन्दगी को झकझोर देने वाला था। जब मैंने चूत को देखा तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया। मुझे उलटी सी आने वाली थी, मुझे घृणा होने लगी थी.
प्रेषक : करन गोयल नमस्ते दोस्तो ! मेरा नाम करन गोयल है और यह मेरी अन्तर्वासना पर पहली कहानी है। आप सबसे विनती करुंगा कि अगर कोई गलती मुझसे हो जाये तो मुझे
'यशोदा ... सो गई क्या?' 'उंह्ह ... चाची, क्या है? ओह, खाना लग गया क्या?' 'देख अंकल तुझे कुछ कहना चाह रहे हैं।' फिर चाची पीछे मुड़ी और जाने लगी। अंकल ने
चाची ने मेरे दोनों हाथ ऊपर खींच कर दबा दिये। अंकल मेरी टांगों की तरफ़ आ गये और उन्हें पकड़ कर दोनों और चौड़ा दिये। मेरी चूत खुल गई। अंकल का लण्ड हाय राम ...
उसका वीर्य मेरी गाण्ड के गोलों पर विसर्जित होने लगा। मैं तो घायल सी निढाल पड़ी हुई थी। शायद मेरी चूत और गाण्ड फ़ट गई थी, खून निकल रहा था। विक्रम ने ज्यों ही
मैंने अपने पांव में उलझा हुआ अपना पेटीकोट नीचे सरकाया और नंगी हो गई। फिर उसने भी अपना पैंट नीचे सरका ही लिया। फिर जल्दी से चड्डी भी उतार दी। 'तेरी तो मां को
मैं उसको चूमता रहा और उसकी नाभि पर हाथ फेरता रहा वो जोर से मुझ बाँहों मैं कसने लगी। मैं उसके ऊपर आ गया और अपना लंड उसकी चूत में घुसेड़ना चाहा तो उसने रोक दिया।
मेरे अपार्टमेंट बिल्डिंग में एक नई लड़की दिखी, अच्छी लगी, उसके पीछे गया, बात की, मस्का लगाया. तभी मैं उसे बिल्डिंग की सीढ़ियों में ले गया और फिर...
कहानी का पहला भाग : शीशे का ताजमहल-1 शबनम ने दीवान पर मेरे सोने की व्यवस्था कर अन्दर चली गई। मुझे नींद नहीं आ रही थी, मेरा मन अब शबनम के प्रति बदल चुका
अन्तर्वासना को कुछ वक्त के लिए तो दबाया जा सकता है लेकिन हमेशा के लिए नहीं... यह सेक्स कहानी है शौहर को छोड़ अकेली रह रही एक लड़की की जिसके जीवन में एक लड़का आना चाह रहा है.
प्रिय मित्रो.. मेरा नाम लक्ष्मी है, मैं दिल्ली में रहती हूँ, अभी कुछ महीने पहले ही मैंने पहली बार चुदाई का मज़ा लिया है। अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ती थी तो
मैंने सबसे पहले आन्टी की साड़ी उतारनी शुरू कर दी और उनका गोरा पेट और नाभि सामने थी, मैंने हाथ फिराते हुए उनके पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।
प्रेषक : राकेश पाण्डे हाय दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं 35 साल का अविवाहित हूँ मगर मेरी सेहत बहुत ही अच्छी है और मैं दिखने में भी ठीकठाक हूँ। शायद
दोस्तो... आप का प्यार हर बार मुझे अपनी जिंदगी के हसीन लम्हें आपसे बाँटने को बेचैन कर देता है। मेरी हर कहानी को आप सबका बहुत प्यार मिलता है। कुछ दिन बीतते
मेरे घूमते ही लक्की मेरी पीठ से चिपक गया और अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर रख दिये। मैंने नीचे मम्मों को देखा... मेरे दोनों कबूतरों को जो उसके हाथों की
मैं एक प्राईवेट स्कूल में पढ़ाती हूँ। उसका एक बड़ा कारण है कि एक तो स्कूल कम समय के लिये लगता है और इसमें छुट्टियाँ खूब मिलती हैं। बी एड के बाद मैं तब से
प्रेषक : सियाराम प्रसाद सिंह उस समय की बात है जब मेरी उम्र सिर्फ़ 18 साल थी। मेरे घर से कुछ ही दूरी पर एक छोटा सा मन्दिर था। मन्दिर में नया पुजारी आया हुआ
कहानी का पिछ्ला भाग: प्यासी कली- 1 रूपाली ने फ़ार्म हाउस के अन्दर गाड़ी रोक दी, बंगले का गेट खोला और मुझे अन्दर आने के लिये कहा। उसने दरवाजा बन्द कर लिया तो
मैं समीर गुड़गाँव वाला फ़िर से कच्ची कलियों, गर्म भाभियों, प्यासी आंटियों, और चुदक्कड़ मुण्डों को अपना एक और अनुभव सुनाने जा रहा हूँ। हाल ही की बात है, मेरे
हैलो दोस्तो, मेरी तरफ से आपको नमस्कार, आपने मेरी सभी कहानियाँ पसंद की उसके लिए मैं आपका धन्यवाद करती हूँ। आप मेरे बारे में जानते हो मगर फिर भी अपने नए
प्रेषक : सन्दीप शर्मा जब मैं आंटी के होंठों से अलग हटा तो मैंने देखा की उनके चहेरे पर एक अलग ही सुकून था। उनके चेहरे पर तो सुकून आ गया था लेकिन मेरे अंदर
प्रेषक : सन्दीप शर्मा वो आकर मेरे बगल में बैठ गई और जब उसने मेरे हाथ देखे तो चीखते हुए आंटी से बोली- यह क्या है? आंटी के बजाय मैंने ही जवाब दिया- कुछ नहीं
प्रेषक : सन्दीप शर्मा आंटी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, कभी मेरे बाल सहलाती और कभी मेरी पीठ। मैंने ऐसे ही कुछ 30-40 धक्के मारे होंगे कि मैं झड़ने लगा ! और
प्रेषक : सन्दीप शर्मा फिर उसके बाद आंटी बोली- अब जो तेरे साथ होने वाला है वो तू जिंदगी भर याद रखेगा। मैंने कहा- देखते हैं, आप क्या करती हो? क्योंकि ऐसा
मुझे कुछ समझ नहीं आया पर मैंने आंटी से कहा- अच्छा ठीक है पर मुझे खोलिए तो ! तो आंटी बोली "अगर खोलना ही होता तो इतनी प्यार से बांधती क्यों तुमको? आंटी की
आप सभी को नमस्कार आप सभी ने मेरी पहले भेजी हुई कहानियाँ पढ़ी और उन्हें पसंद किया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। जैसा कि शीर्षक पढ़ कर ही आप समझ गए होंगे, यह
प्रेषक : मनो प्रकाश यह मेरी पहली कहानी है, मेरा नाम रणजीत है, मैं 30 साल का हूँ और सीतापुर उ.प्रदेश से हूँ। यह पिछले साल की बात है। मेरा एक दोस्त है जिनका
हैरी का प्यार भरा नमस्कार ! आपने मेरी कहानियाँ पढ़ी, बहुत पसंद किया, उसके लिए आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया। मैं फिर एक सच्ची घटना लेकर आपके सामने आया हूँ !
रात को दस बजे प्रकाश अदिति को लेकर घर आ गये थे। अदिति बहुत थकी हुई सी थी। आते ही वो पहले तो बैठक में बैठ गई और फिर मेघा के साथ ही दीवान पर आकर लेट गई।
प्रेषिका : पूनम वापस आई तो देखा कि हर्ष अपने कपड़े पहन चुका था और वो कैमरामैन के साथ खड़ा था। मुझे आता देख कैमरामैन मुस्करा कर बोला- मैडम, फ़िल्म तो पूरी हो
प्रेषिका : पूनम दीदी ने शाम को फ़ोन कर के मुझे बधाई दी कि मुझे चुन लिया गया है और कल ही विज्ञापन की शूटिंग करनी है। अगले दिन मैं सुबह 10 बजे स्टूडियो पहुँच
मेरा नाम पूनम है, दिल्ली की रहने वाली हूँ, उम्र लगभग 24 है। आज मैं आपको अपनी कालेज के दिनों कि एक घटना बताने जा रही हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं कालेज
और यह बोलते हुए वो अपने दोनों पैर मेरे पैरों के दोनों किनारे रख कर मुझ पर बैठ गई और मेरे होठों को चूमना शुरू कर दिया। मैं भी उसके रेशमी बालों को सहलाते
जैसा कि आपने पलक और अंकित के बाद में पढ़ा कि सरिता और पलक की फोन पर बात हुई। मैं कुछ कहता उसके पहले ही पलक का फोन जो पहले ही तीन बार बज कर बंद हो चुका था
सभी अन्तर्वासना के पाठकों के मोटे और छोटे लंड और प्यारी मीठी चूत को भौमिक का सलाम और नमस्कार ! यह मेरी पहली कहानी है इसलिए हो सके तो गुरूजी और पाठक मुझे
लेखक : प्रेम गुरु और अरमान मैं जानता था कि यह राखी कपूर एक नंबर की चुद्दकड़ है। ये स्वयंवर वाली बात तो महज पब्लिसिटी बटोरने का एक तरीका है उसे कोई शादी
कहानी का पिछ्ला भाग: बारिश की एक रात-1 मैं अपनी तारीफ सुन कर खुश हो रही थी और उसने देखा कि हल्की सी हंसी मेरे चेहरे पर दिख रही थी। वो मौके का फायदा उठाते
मेरा नाम तनिषा है, मैं यहाँ अपनी कहानी पहली बार बताने जा रही हूँ, यह मेरी सच्ची कहानी है। मैं दिखने में बहुत सुन्दर और अच्छी बदनाकृति वाली लड़की हूँ, मेरे
प्रेषक : वरिंदर सबसे पहले धन्यवाद सभी पाठकों का जिन्होंने मेरी हर कहानी को पढ़कर मुझे बहुत प्यार दिया। आज मैं एक बार फिर से अपनी नई कहानी आपके सामने लेकर
लेखक : राज कार्तिक तभी कमल ने सुधा को जाने को कहा और मुझे बोला- यहीं सो जाओ ! तो मुझसे पहले ही सुधा बोल पड़ी- इनके सोने का इंतजाम ऊपर वाले कमरे में किया
लेखक : राज कार्तिक यह कहानी मैं आप सब दोस्तों की मांग पर लिख रहा हूँ। यह खूबसूरत हादसा मेरे एक मित्र के साथ हुआ था। उसने अपनी कहानी मुझे बताई और
मैं उसकी पीठ सहलाने लगा, फिर उसकी फ़्रॉक को निकाल दिया। अब उसके भरे हुए स्तन, जो गुलाबी ब्रा में समां नहीं रहे थे, को मसलना शुरु कर दिया।
मैं उसे बाँहों में उठाकर बेडरूम में ले गया उसके सारे कपड़े उतारकर उसके ऊपर छा गया। वो सिसकारने लगी, उसने मेरी पैंट उतार दी, चड्डी हटा कर लंड थामकर चूमने लगी।
वह मेरी जीभ को सिसकारते हुये चूस रही थी। मैंने मौका देखकर लंड को सही स्थान पर लेकर थोड़ा दबाव डाला तो सुपारे का आगे का भाग चूत के मुँह पर फिट हो गया।
आपने ब्रा-पेंटी उतारकर रख दिए और दर्पण में अपने नंगे जिस्म को हर दिशा से देखा। तुम उत्तेजित हो गई थी, एक हाथ तुम्हारी दोनों टांगों के बीच कुछ सहला रहा था, दूसरा सीने को सहला रहा था?
मैडम, मैं चाहता हूँ कि यहाँ पर आदमकद दर्पण लगना चाहिए क्यूंकि नहाते वक्त अपने आप को दर्पण में देखना बड़ा ही सुखद और आनंददायक लगता है!
फिर हम बिस्तर पर लेट गए। बाहर से अभी भी तेज आवाज आ रही थी, मैंने झांक कर देखा तो... पिंकी सोफे पर बैठी थी और रिंकी उसकी चूत चाट रही थी। सुमीत पीछे से उसकी
प्रेषक : राजवीर रिंकी की मामी अपने मायके गई तो मामा ने रिंकी को चोदने में देर नहीं लगाई और उसे नेता जी से चुदवाने की बात भी कर ली। रिंकी अच्छे से तैयार हो
प्रेषक : अनिल वर्मा हेलो दोस्तो, कैसे हैं आप लोग? मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं। मेरे मन में भी आता है कि अपनी कहानी भी भेजूँ। आप सभी को
मैंने जाकर घण्टी बजाई तो उस क़यामत ने दरवाज़ा खोला जिसका नाम नीलिमा है। उसको देखा तो मैं देखता ही रह गया। नीलिमा ने मुझे दो बार अंदर आने को कहा पर मैं तो जैसे किसी जादू में बंध गया था बस एकटक उसी को देख रहा था। उसकी जवानी
प्रेषक : राजेन्द्र चौहान मैं मुंबई से हूँ, मेरा नाम राज है, उम्र 38 साल है। कुछ समय पहले गर्मियों की बात है, मैं घर पर अकेला बैठा था और सेक्स के बारे में
मैंने उससे पूछा- मैं कितनी देर तक सोता रहा? तो वो बोली करीब एक घण्टा ! मैं कुछ कहता उसके पहले ही उसने इशारे से मुझे चुप करा दिया, उसने मुझे पानी दिया और
लेखक : सन्दीप शर्मा उस वक्त वो क्या गजब की लग रही थी ! मैं शब्दों में नहीं बता सकता पर उस वक्त मैंने उसे कुछ लाइनें कही थी जो आज भी जहन वैसी ही ताजा हैं:
मैं अभिषेक एक बार फिर से आप लोगों के सामने हूँ। आप सब लोगों ने मेरी कहानी 'सहपाठिका को बाज़ार में चोदा !' आप सभी को वो कहानी बहुत पसंद आई! मैं एक बार फिर
लेखक : सन्दीप शर्मा हम दोनों ने पाव भाजी खाई और उसके बाद साक्षी मुझ से बोली अब तुम्हे एक काम करना होगा मेरी मर्जी से ... मैंने कहा- हुकुम करो जान क्या
लेखक : सन्दीप शर्मा मैं थोड़ा और नीचे खिसक कर उसकी नाभि के पास आया और मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ चलाना शुरू कर दी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी नाभि पर
उसके बाद उसने अपने हैण्ड बैग से टिशु पेपर निकाला और मेरा लण्ड पौंछा, फिर मेरे मुरझाये हुए लण्ड को मेरे कपड़ों में डाल के मेरी पैंट ऊपर खसका दी, मेरे होंठों
सन्दीप शर्मा दोस्तो, मेरी पिछली कहानियों के बाद आप सभी के प्यार का बहुत-बहुत शुक्रिया ! आपके काफ़ी ईमेल मिले तथा तीन सौ से अधिक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट
राज कार्तिक रंगीन और मस्त जिंदगी की ख्वाहिश हर इंसान करता है पर सबके नसीब में मस्ती से जीना नहीं होता। यह अलग बात है कि जिंदगी में कम से कम एक बार कुछ
प्रेषक : विशाल मैं फिर से हाज़िर हूँ आप सबके बीच में अपनी कहानी को पूरा करने के लिए ! तो पहले भाग में मैं उसकी चूत के दर्शन करके हैरान रह गया। दोस्तो, पहली
प्रेषक : विशाल अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार। सभी फड़कती हुई चूतों को और लण्डों को भी मेरा नमस्कार ! मेरा नाम विशाल है और मैं जयपुर का रहने वाला
जसप्रीत ने कहा- ठीक है, तो अब यहीं रुकेगा ना? मैंने कहा- नहीं, मैं किसी होटल में रह लूँगा। जसप्रीत ने कहा- यह क्या बात हुई? तू यहीं रहना। उसके सास-ससुर ने
दोस्तो, फिर एक सच्ची घटना आपके सामने पेश कर रहा हूँ, उम्मीद है आप इसे भी खुले दिल से प्यार देंगे ! आपके इसी प्यार से मैं क्या से क्या हो गया ! किसी
उसका लण्ड मेरी चूत में जहाँ तक घुस रहा था वहाँ तक आज तक किसी का लण्ड नहीं पहुँचा था.. ऐसा में महसूस कर सकती थी.. मेरी चूत तब तक दो बार झड़ चुकी थी... और बहुत चिकनी भी हो गई थी...इसलिए अब उसका लण्ड फच फच की आवाजें निकाल रहा था... मैं फिर से झड़ने वाली थी.. मगर उसका लण्ड तो जैसे कभी झड़ने वाला ही नहीं था...