चूत शृंगार-8
मेरी चूत लगातार झड़ती रही। फिर भैया ने तूफान की तरह लगातार धक्के मार-मार कर चोदा और वो मेरी चूत में झड़ गया। सारी रात वो मेरे मम्मों से चिपका रहा।
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार रिश्तों में चुदाई कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
मेरी चूत लगातार झड़ती रही। फिर भैया ने तूफान की तरह लगातार धक्के मार-मार कर चोदा और वो मेरी चूत में झड़ गया। सारी रात वो मेरे मम्मों से चिपका रहा।
"ठीक ! पर मुझे चोदना जरूर। मैं खाना खाने नहीं आ रही, सिर्फ चुदने आ रही हूँ।" "फ़िक्र ना कर ठोक-ठोक कर चोदूँगा, तेरी चूत फाड़ कर रख दूँगा।"
लेखक : विवेक सहयोगी : तृष्णा बुआ का कृत्रिम लिंग-1 बृहस्पतिवार शाम को जब मम्मी और पापा घर आये तो उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी की ओर से एक समूह अगले तीन
मेरी बुआ का तलाक हो चुका है, वे हमारे साथ ही रह रही हैं. एक दिन बुआ बिस्तर पर नग्न लेटी हुई दोनों टांगें चौड़ी कर योनि में एक डिल्डो अंदर बाहर कर रही थी !
मेरा नाम करन है, मैं राजस्थान अजमेर का रहने वाला हूँ। यह मेरी पहली कहानी है। बात उन दिनों की है जब मैं अपनी चाची के यहाँ पर गया हुआ था। गर्मियों का मौसम
मेरे प्यारे दोस्तो, आप सबको मेरी नमस्ते। आप सब अच्छी तरह से जानते हैं कि जब इंसान को सम्भोग करने की जरूरत जान पड़ती है और वो उस पर काबू ना कर सके तो बड़ी
प्रेषक : विकी मैं विकी, आपके साथ मेरा पहला सेक्स अनुभव शेयर कर रहा हूँ। मैं पूना में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मैं 24 वर्ष का 5'7" कद वाला 60 किलो वजन
प्रेषक : संदीप और बारी थी दुनिया की सबसे सुन्दर लड़की की सबसे सुन्दर चूत की, जिसको मैं बड़े प्यार से और धैर्य के साथ चाटना चाहता था। जैसे ही मैंने उसकी
दोस्तो, मैं भी अन्तर्वासना की कहानियों को नियमित पढ़ता हूँ, मैंने सोचा, मैं भी अपनी कहानी आप सबको बताऊँ। यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद तो यही है कि सभी
मेरा नाम निखिल है, मेरी उम्र 22 साल है. मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. यह मेरी पहली कहानी है. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ. मैं आपको अपनी वास्तविक घटना
लेखिका : कविता लालवानी सहयोगी : टी पी एल करीब एक घंटे के बाद हम अलग हुए और नितिन ने मुझे सिर्फ सलवार और कमीज पहना दी और मेरी ब्रा तथा पैंटी को बाथरूम में
लेखिका : कविता लालवानी सहयोगी : टी पी एल जब मैंने नितिन से स्पंज करवा लिया तो देखा कि उसका पजामा गीला हो गया था लिंग के सामने से तो पूछ्ने पर उसने बहाना
मैं अपने कमरे में ज्यादातर अर्धनग्न ही रहती हूँ, जीजाजी के जाने के बाद मैं अक्सर एक छोटी सी निकर और एक लो नेक की बनियान बिना ब्रा और पैंटी के ही पहनती हूँ जिससे मेरी लंबी टाँगें और मेरे चूचियों के दर्शन सबको आराम से हो सकते हैं।
मेरा नाम पार्थ है। मैं 21 साल का हूँ। मैं अंतर्वासना का नियमित पाठक हूँ। यहाँ पर कोई कहानी सच्ची, तो कोई झूठी लगती हैं, पर मजा आता है। आज मैं आप लोगों को
कहानी का पहला भाग: मौसेरे भाई बहन का खेल-1 मैंने कहा- तू जाकर बैठ, मैं भी पिशाब करके आता हूँ। वो बोली- तो कर ले न अभी। मैंने कहा- तू जायेगी तब तो? वो
यह कहानी मेरे एक पूर्व प्रेमी की सच्ची कहानी है जो उसने मुझे तब बताई थी जब उसने मुझे पहली बार चोदा था। तो पेश है मेरे पहले चोदू यानि जिसने मेरी सील बन्द
प्रेषक : रवि दोस्तो, जैसा कि मैंने आपको बताया था कि किस तरह मैंने सुनीता को पहली बार चोदा था। मैं आपको आगे की बात बताता हूँ। दिन में सुनीता को एक बार
प्रेषक : रवि मेरा नाम रवि है, उम्र 20 बरस और मैं एक सादा सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे आप सबकी आपबीती पढ़ कर बहुत अच्छा
कहानी का पहला भाग: चचेरी बहन रेशमा की चूत चुदाई-1 आज ज़िंदगी में पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था, वो भी इस हालत में। मेरा लंड एकदम लोहे की छड़ की तरह
सभी को मेरा नमस्कार। मैं काफ़ी समय से अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुनाना चाहता हूँ। सबसे पहले मेरा परिचय, मेरा
प्रेषक : आकाश वर्मा हैलो फ्रेंड्स, आज मैं आपको अपनी सेक्स स्टोरी यानि यौन कथा बताने जा रहा हूँ। यह गाथा मेरी बहन की है। मेरी बहन का नाम रेखा है। अगर कोई
एक बार फिर मैं एक और सत्य घटना लेकर आपसे रूबरू हो रहा हूँ, यह कहानी एक 33 वर्षीया विवाहित युवती की है, इस कहानी को शब्दों का आकार मैंने ही दिया है। इस
मेरा नाम अंकित है, मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना.कॉम का बहुत पुराना पाठक हूँ, काफ़ी समय से सोच रहा था कि अपनी कहानी लिखूँ पर आज मौका मिल
दोस्तो, आज मैं आपको अपने दोस्त स्मिता की कहानी बताने जा रहा हूँ जो मैं उसी की ज़ुबानी आपको बताने जा रहा हूँ। मैं आपकी प्यारी सी और चुलबुली स्मिता आपको
प्रेषिका : कमलेश मेरा नाम कमलेश है, मैं राजस्थान के एक बहुत छोटे से गाँव की रहने वाली हूँ। हमारे यहाँ छोटे-छोटे कच्चे-पक्के घर होते हैं और जमीन के नाम पर
(इस कहानी के सभी पात्रों के विषय में यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि सभी पात्र काल्पनिक हैं और इन सभी पात्रों के आपसी रिश्ते एक दुर्घटना के कारण, संयोगवश
'नहीं मुझे सारी कहानी विस्तार से बताओ और पूरी तरह से खुल कर बताओ कि कैसे तुमने अपनी बहन के साथ इतना बड़ा पाप किया। तुम्हें जब ऐसा करने में कोई शर्म नहीं आई
मम्मी मुझे से लगातार पूछ रही थीं, "बताओ मुझे ! क्या तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं महसूस नहीं हुई या पाप का अहसास नहीं हुआ? अपनी बहन को चोदते हुए?" मैंने अपना
मैंने एक या दो कदम ही आगे बढ़ पाया था की मम्मी की फुसफुसाहट भरी आवाज़ सुनाई दी 'कहाँ जा रहे हो तुम'?? 'ओह मम्मी तुम जाग रही हो... मैं टायलेट जा रहा हूँ।'
मैं कमर के नीचे पूरी तरह नंगा था। मेरा लंड अब पानी छोड़ कर लटक गया था। मेरी बहन तेज़ी के साथ बिस्तर पर से उतर गई और अपनी स्कर्ट को उसने चूतड़ों पर चढ़ा लिया।
कमर के नीचे वो पूरी नंगी थी। उसकी गुलाबी चूत, उसकी भूरे रंग की गांड का छेद और उसके गुदाज चूतड़ मेरी आँखों के सामने खुले पड़े थे और मुझे अपनी ओर खींच रहे थे।
हम दोनों के बदन में आग लगी हुई थी और हम बेचैन थे, कब हम एक-दूसरे की बाँहो में खो जाएँ। इसलिए हमने दरवाजे को धक्का दे कर खोला और अपने बैग और किताबों को एक
सोनिया बोली- तुम तो मेरी सहेली तनीषा को जानते ही हो, उसने अपने घर पर कल रात हुए एक बहुत ही उत्तेजक घटना के बारे में मुझे बताया, जिसके कारण मैं बहुत गर्म
सुषमा के बदन से खेलने से मुझे बड़ा सुख मिल रहा था। मेरा लंड सरिया जैसा सख्त हो गया था और अब मुझे उसकी चूत खोदने का मेरा मतलब चोदने का मन होने लगा था। मैंने
दोनों हसीनाएँ मेरे हाथ के ऊपर अपना सर रख कर और अपनी एक-एक टाँगों को मेरी टाँगों के ऊपर रख कर लेट गईं और हम तीनों ही जल्दी ही गहरी नींद में सो गए। किसी के
सोनिया ने एक हाथ से लंड सहलाया, दूसरे हाथ से मम्मी की चूत में उंगली डाल दी, उनको मजा आने लगा उसने भी अपनी चूत फैला दी ताकि सोनिया मजे से उसकी चूत सहलाती रहे।
मेरे लौड़े को अब सेक्स ने इतना घेर लिया था कि धकाधक उसकी चूत को रगड़ने में जुट गया। करीब बीस मिनट उसको जबरदस्त तरीके से रगड़ कर जैसे ही झड़ने की हुआ, तभी
रात भी बहुत हो चुकी थी और इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों में से किसी को होश नहीं था। मैं मम्मी के ऊपर से लुढ़क कर उनके बगल में लेट गया।
मम्मी की चूत अपने ही रस से एकदम गीली थी मैंने चूत के होंठों को अपने होंठों से मिला दिया तो मम्मी का पूरा बदन कंपकंपा गया, बोली- ओह बेटे, और चूसो मेरी चूत को...
मेरी मामी बहुत सुंदर हैं। बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा लगती हैं। कोई उसे देख ले तो मन करे कि बीच चौराहे पर नंगी करके उसकी फ़ुद्दी में अपना लाण्डिया घुसा कर चोद दे!
अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार! जैसा कि मैं पहले ही अपनी बहन के बारे में बता चुका हूँ, इसलिए मैं अपनी कहानी अब आगे बढ़ाता हूँ। डी.यू. में एडमिशन
अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार ! आप सबको मेरी अगली कहानी का इन्तजार करवाने के लिए माफ़ी। मेरे घर में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और मेरी एक छोटी बहन
लेखिका : मोनिका हैलो दोस्तो ! मैं अन्तर्वासना की नियमित पाठिका हूँ। इस लाजवाब साइट पर मैंने बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी और सैक्स के बारे में ज्ञान लिया। आज
"यहाँ कोई नहीं आयेगा और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे नाच रहे थे।" कहते हुए उन्होंने मेरी स्कर्ट खींच दी और मेरे सैंडलों के अलावा मुझे बिल्कुल
मेरी चूत का मुँह लंड के एहसास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लंड को किसी तरह की परेशानी ना हो। मेरी चूत से काम-रस झाग बनके निकल कर मेरे चूतड़ों के कटाव
"मम्मऽऽऽ... शहनाज़... मीऽऽऽऽ... ऊँमऽऽऽऽ... तुम बहुत सैक्सी हो। अब अफ़सोस हो रहा है कि तुम्हें इतने दिनों तक मैंने छुआ क्यों नहीं। ओफ...ओहहऽऽऽ तुम तो मुझ
मेरी पीठ मेरे ससुर ताहिर अज़ीज़ खान जी के सीने से लगी हुई थी। मैंने अपना सिर पीछे की ओर करके उनके कंधे पर रख दिया। साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने
"आज मैं आपके बेटे की बीवी हूँ।" "लेकिन पहले तू मेरी सेक्रेटरी है। यहाँ पर तू मेरी सेक्रेटरी बन कर आई है... मेरे बेटे की बहू नहीं ! और सेक्रेटरी का काम
कुछ देर बाद हम वहीं आराम करके अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गये। बाहर अपनी टेबल पर आकर देखा कि टेबल खाली थी। मैंने बैठते हुए इधर-उधर नज़र दौड़ाई लेकिन साशा और
मैं कमरे से बाहर निकल कर बगल वाले कमरे में, जिसमें ससुर जी रह रहे थे, उसमें चली गई। ससुर जी कमरे में नहीं थे। मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई। बाथरूम से पानी बहने
लाँग स्कर्ट्स के बाद माइक्रो स्कर्ट्स की बारी आई। मैंने एक पहना तो मुझे काफी शर्म आई। स्कर्ट्स की लम्बाई पैंटी के दो अंगुल नीचे तक थी। टॉप भी मेरी
अभी दो महीने ही हुए थे कि मैंने अपने ससुर ताहिर अज़ीज़ खान जी को कुछ परेशान देखा। "क्या बात है अब्बू... आप कुछ परेशान हैं?" मैंने पूछा। "शहनाज़ ! तुम कल से
मैंने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरा चेहरा शर्म से लाल हो रहा था। लेकिन मैं इस हालत में अपने पेशाब को रोकने में नाकाम थी और नशे में मुझसे खड़ा भी
उन्होंने मुझे बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया। फिर वो मेरी बगल में लेट गये और मेरे चेहरे को कुछ देर तक निहारते रहे। फिर मेरे होंठों पर अपनी उँगली
अचानक उन्होंने अपनी मुठ्ठी में बंद एक खूबसूरत लॉकेट मेरे गले में पहना दिया। "ये?" मैं उसे देख कर चौंक गई। "यह तुम्हारे लिये है। हमारी मुहब्बत की एक छोटी
"शहनाज़ ! बहुत टाईट है तुम्हारी..." कहते हुए फिरोज़ भाईजान के होंठ मेरे होंठों पर आ लगे। "आपको पसंद आई?" मैंने पूछा तो उन्होंने बस 'हम्म' कहा। "यह आपके लिये
मैंने उन्हें सताने के लिये उनके लंड के टोपे पर हल्के से अपने दाँत गड़ा दिये। वो 'आआआह' कर उठे और मुझसे बदला लेने के लिये मेरे भगनास को अपने दाँतों के बीच
निधि बजाज मैं उसके लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे हिला हिला कर उसकी मुठ मारने लगी और उसे बताती रही कि ऐसा करने से वह उतेजित हो जाएगा और उसके अंदर का वीर्य बाहर आ
दीप के स्वप्नदोष का उपचार-1 निधि बजाज मेरे प्रिय मित्रो, मैं हूँ निधि, जो पहली बार अपने जीवन का यथार्थ आप सबके साथ सामने प्रकट कर रही हूँ ! मैं 27 वर्षीय
मेरे जेठ फ़िरोज़ मेरे इस तरह उन्हें बुलाने से बहुत खुश हुए और मेरी बगल में लेट गये। हम दोनों की ओर देख कर जावेद दूसरी तरफ़ सरक गया और हमें जगह दे दी। अब मेरा
दोनों भाइयों ने लगता है दूध की बोतलों का मुआयना करके ही निकाह के लिये पसंद किया था। नसरीन भाभी के निप्पल काफी लंबे और मोटे हैं, जबकि मेरे निप्पल कुछ छोटे
मैं सैक्स की भूखी किसी चुदक्कड़ वेश्या की तरह छटपटा रही थी उनके लंड के लिये। "एक मिनट ठहरो।" कहकर उन्होंने मेरा गाउन उठाया और मेरी चूत को अच्छी तरह साफ़
मैं काफी उत्तेजित हो गई थी। जावेद इतना फोर-प्ले कभी नहीं करता था। उसको तो बस टाँगें चौड़ी करके अंदर डाल कर धक्के लगाने में ही मज़ा आता था। उन्होंने मेरी
मैं उनका हाथ थाम कर बिस्तर से उतरी। जैसे ही उनका सहारा छोड़ कर बाथरूम तक जाने के लिये दो कदम आगे बढ़ी तो अचानक सर बड़ी जोर से घूमा और मैं हाई-हील सैंडलों में
शुरू-शुरू में तो मुझे बहुत शर्म आती थी। लेकिन धीरे-धीरे मैं इस माहौल में ढल गई। कुछ तो मैं पहले से ही चंचल थी और पहले गैर मर्द, मेरे ननदोई ने मेरे शर्म के
मैं जावेद को उत्तेजित करने के लिये कभी-कभी दूसरे किसी मर्द को सिड्यूस करने लगती। उस शाम तो जावेद में कुछ ज्यादा ही जोश आ जाता। खैर हमारा निकाह जल्दी ही
मैंने उसकी स्कर्ट एक झटके में उतार कर फेंक दी। एक जवान खूबसूरत लड़की मेरे बिस्तर पर सिर्फ पेंटी में थी। एकदम गोरा रंग, बिना बालों का नमकीन सा जिस्म। सहा
वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा। वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और उसके
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को संजय का नमस्कार ! दोस्तो, मेरी कहानियों को आपने इतना पसंद किया उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! आपके प्रोत्साहन से प्रेरित
यह मेरी निजी दास्तान है, जो मैं आप लोगों के सामने रखने जा रही हूँ। मेरा नाम रिया है। मेरे दो भाई हैं, एक मुझसे 3 साल बड़ा है। उसका नाम ऋषभ हैं, और एक मुझसे