पड़ोसन और उसकी कमसिन कुंवारी लड़की को चोदा- 3
Xxx क्रेज़ी गर्ल स्टोरी में पढ़ें कि माँ को चुदती देख उसकी कमसिन बेटी भी मुझसे सेक्स का मजा लेने लगी. बेटी को चुदाई की लत लग गयी. वह हर रात मेरे साथ चुदाई करने आती थी.
फ्रेंड्स, मैं राज पाल आपको अपनी सेक्स कहानी में पड़ोसन भाभी अंजलि और उनकी कमसिन लड़की दिव्या की चुदाई की कहानी सुना रहा था. कहानी के दूसरे भाग कुंवारी पड़ोसन ने मेरा लंड पकड़ लिया में अब तक आपने पढ़ा था कि अंजलि भाभी की बेटी भी मुझसे चुदवाने लगी थी. रात को उसकी दादी की तबीयत खराब होने की वजह से अंजलि भाभी और उसका बेटा दादी को देखने आए थे, जिस वजह से दिव्या मुझसे चुदने के लिए नहीं आ सकी थी.
अब आगे Xxx क्रेज़ी गर्ल स्टोरी:
दूसरे दिन मैं सुबह सुबह पड़ोसी के घर गया तो मैंने आंटी जी से पूछा- कैसी हो आप? उनकी आवाज़ आई- आ जा अन्दर आ जा!
वहां अंजलि दिखी तो मैंने ‘भाभी जी नमस्ते’ बोला. वह भी नमस्ते बोली. वहीं उनका बेटा अरमान भी था.
मैंने पूछा- अब भाई साहब कैसे हैं? अंजलि बोली- अभी कहां ठीक हैं, अभी तो इन्हें ठीक होने में पूरा साल लग जाएगा.
उनका बेटा बोला- चाचा, 4 या 6 महीने में तो उनसे चलना फिरना भी मुश्किल से होगा. मैंने कहा- तब तक वहीं रहेंगे? वह बोली- कम से कम 6 महीने तो रहना पड़ेगा. क्योंकि वहां पर मेरी बेटी की इंगलिश टॉयलेट है.
उसके बाद मैं वहां से ऑफिस निकल गया. रात को मैं घर आया तो 8 बज गए थे. मैं अपने बेड बैठा था.
दिव्या मेरे पास आई और बोली- मम्मी और भाई दीदी के घर चले गए हैं. आप खाना मत बनाना, मैं आपके लिए लेती आऊंगी.
रात को 11 बज रहे थे. दिव्या कमरे में आई. तब मैंने केवल लुंगी पहनी हुई थी.
उसने खाने की थाली साइड की टेबल पर रखी और सीधे मेरे ऊपर चढ़ गई, मुझे दबा दबा कर किस करने लगी.
मैंने भी उसको अपनी बांहों में भर लिया. हम दोनों दो जिस्म एक जान की तरह लिपट गए.
मेरा लंड पहले से ही खड़ा था. मैंने धीरे से उसकी चुत में लंड डाल दिया. उसने आह कह कर मुझे जोर से जकड़ लिया.
अब मैं धीरे धीरे झटके मार रहा था और वह मस्ती में चूर अपने चूतड़ ऊपर नीचे करने लगी थी.
मैं आराम से नीचे लेटा रहा और मेरा 7 इंच लम्बा लौड़ा उसी संकरी चुत का पूरा मजा ले रहा था.
उसकी कामुक आवाजें मेरे मद को और बढ़ा रही थीं- उउह उईईई ऊऊह मांआ … ओह साले ठरकी चाचा और जोर से रगड़ कमीने … आह आह मांआ ले ले मेरे राजा, रानी बना ले मुझे अपनी … मेरी कमसिन चुत को भोसड़ा बना दे … उईई माँ बहुत मज़ा आ रहा है बाबू!’
वह अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लंड को चोद रही थी. उसकी चुत की रगड़ से मेरा भी लंड भी चुत में पिघलने लगा था.
मैंने उसकी पतली सी कमर को पकड़ कर उसको गोद में भर लिया. हम दोनों ने नग्न अवस्था में ही रात्रिभोज किया. उसके बाद फिर से चुदाई का काम शुरू हो गया.
उसका फिगर सच में मुझे बहुत पसंद आया. उसके गुलाबी होंठ, तीखे नैन, पतली कमर, उसके भरे भरे गोल गोल चूचे मुझे मदहोश कर रहे थे.
उसका 46 से 50 किलो का वजन, उसकी 5 फ़ीट 2 इंच की लम्बाई मेरे लिए परफेक्ट साइज की थी. चुदाते समय उसका मेरा तालमेल बहुत ही अच्छा था. लगता था जैसे वह मेरे लौड़े के लिए ही बनी है.
वह मेरे ऊपर थी, मैं उसके होंठों को चूसने लगा था. उसने मुझे अपनी बांहों में लिया हुआ था. मेरे दोनों हाथ उसकी गांड को मसल रहे थे.
हम दोनों एक दूसरे में बड़े ही प्यार से खोए हुए थे.
मैंने उसको कहा- नीचे आ जा! वह आ गई.
मैंने अब अपने लंड का प्रहार उसकी चुत में किया और अन्दर पेल कर 20-22 तगड़े शॉट मार दिए. मेरी रानी मेरे झटकों को नहीं सह पाई और पूरा कमरा भी फछ फछ से गूंजता रहा.
वह अपनी चुत का रस निकाल कर निढाल हो गई और उसी वक्त मेरा लंड भी पिघल गया. मेरे लौड़े का रस उसकी चुत में समाता चला गया.
पूरी रात हम दोनों ने कई बार चुदाई की. सुबह के 4 बजे मैंने एक बार उसकी गांड में लंड पेला और उसकी प्यास बुझा दी. अब वह शांत थी.
मैंने उसकी चुत में अनेकों बार लंड डाल कर उसको मज़ा दिया था. वह मुझ पर पागल थी.
एक दिन रात को अंजलि का कॉल मेरे फोन पर आया. तब मैं और दिव्या चुदाई में लगे थे.
मैंने उसकी गांड में लंड पेला हुआ था. वह आह आह कर रही थी.
मैंने कहा- जान, तेरी माँ का कॉल है. वह बोली- उठाओ!
मैंने उठाया. वह बोली- दिव्या कॉल नहीं उठा रही है. उसकी दादी की तबियत ठीक नहीं है. वह बोल रही है. मैंने कहा- ठीक है, मैं देखता हूं.
मैंने जाकर देखा तो बुढ़िया बेहोश सी थी. दिव्या मेरे साथ थी.
मैंने टैक्सी बुलाई और उसकी दादी को हॉस्पिटल ले गया.
बुढ़िया को दवाई दी गई थी. वह सो रही थी.
दिव्या की माँ अंजलि का फिर से फ़ोन आया कि हम लोग एक घंटा में पहुँच रहे हैं.
अस्पताल के कमरे में मैं और दिव्या बगल के सोफे में चादर ओड़ कर बैठे थे.
उसने चादर के अन्दर से हाथ डाल कर मेरा लंड खड़ा कर दिया. वह मेरी मुठ मारने लगी.
फिर उसने चादर के अन्दर ही अपने मुँह में मेरा लौड़ा ले लिया और चुसकने लगी. मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था.
रूम में एक ही मरीज था और वह अंजलि की सास थी, जो नींद की दवा खाकर सोई हुई थी.
रूम की लाइट भी बंद थी. एसी चल रहा था, कमरा बहुत ठण्डा था.
लौंडिया अपने मुँह में मेरा लंड गपागप चूसे जा रही थी. मैं भी अपने लंड को नीचे से उठा उठा कर उसके मुँह में दे रहा था.
मैंने उसके आगे वाले छेद में उंगली पेल दी और उसकी चुत पानी छोड़ने लगी.
चुत की नदी बहते ही उसने जल्दी जल्दी लंड चूसना शुरू कर दिया कि कहीं मम्मी सुबह होने से पहले ही ना आ जाएं.
मेरा लौड़ा तना हुआ था और उसके मुँह के झटके की तेजी के साथ चलने लगे थे. इसी वजह से मेरा लौड़ा उसके मुँह में झड़ गया और उसने पूरा माल अपने मुँह में गटक लिया.
मैंने भी उसकी चुत में से उंगली निकाल ली. अब हम शांति से अलग अलग बैठ गए.
अभी दस मिनट भी नहीं हुए थे कि दिव्या की माँ, उसकी बहन और जीजा आ गए. मैं और दिव्या घर आ गए.
नीचे गेट को लॉक करके हम दोनों ऊपर आ गए. ऊपर आ कर मैंने दिव्या की माँ के कमरे में आ गया और दिव्या को गोद में उठा लिया.
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसे जा रहे थे. मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और ऊपर चढ़ गया.
उसका टॉप उतारा और उसके गोरे गोरे बूब्स चूसने लगा. उसकी मखमली गांड के दोनों फलक मेरे दोनों हाथों में थे. मेरा लौड़ा पूरा तना था.
मैंने उसकी पैंटी उतारना शुरू की और एक टांग से नीचे उतार दी. अब मैंने अपना लंड जोर से उसकी चुत में पेल दिया.
वह चिल्ला कर मेरे को कस कर पकड़ कर बोली- इतनी जोर से क्यों किया! मेरी जान लोगे क्या! मैंने उसकी बात को अनसुना करते हुए जोर जोर से चुदाई शुरू कर दी.
वह भी गांड उठा उठा कर चुदाई का मज़ा ले रही थी. उसका बहुत पानी निकल रहा था. फछ् फछ् फछ् फछ्
साथ में उसकी मधुर आवाज ‘ओईइ ऊऊऊ ईईई’ की आवाज़ रूम में गूंज रही थी.
मैंने बीस बाईस झटके देकर उसकी चुत की आग को शांत कर दिया और अपने लंड का गर्म पानी उसी की चुत में भर दिया. फिर उसकी पैंटी से लंड को पौंछ कर उसे वहीं बेड के नीचे फेंक दिया.
दस दिन से हम दोनों रात को लगातार चुदम चुदाई कर रहे थे. उसकी चुत थोड़ी सूज़ गई थी, फिर भी वह टांग चौड़ी कर करके चुदवा रही थी.
फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया. उसने अपनी नाजुक सी गांड मेरे टोपे के सामने रख दी.
मैंने अपने लौड़ा तेल से सना रखा था. उसकी गांड पर तेल लगाया और अपना पूरा लौड़ा उसकी गांड में पेल दिया.
उसकी चीख निकल गई, पर वह भी गांड मराने में मास्टर थी. उसे भी मज़ा आ रहा था- आह्ह्ह्ह्ह ओहो उईईइ मार डाला तूने मेरे राजा … मेरी गांड का भर्ता बना दिया तूने … चढ़ती जवानी की उम्र में ही तूने मुझे रंडी बना दिया. साले मैं अब बिना चुदाई के कैसे रहूँगी!
वह अपनी गांड से पीछे को धक्का लगा रही थी. मेरा लौड़ा तो पूरी मस्ती में गांड मार रहा था.
अब मैं झड़ने वाला था. वह बोली- अपना माल मेरे फेस पर डालना.
मैंने लंड उसकी गांड से निकाल कर उसके फेस पर अपना पूरा रस डाल दिया.
वह मेरे माल को चाट रही थी और अपने गुलाबी गालों पर रगड़ रही थी.
दूसरे दिन उसकी माँ, उसकी दादी को अस्पताल से घर ले आई.
उसकी माँ को हम दोनों पर कुछ शक सा हो रहा था क्योंकि पूरी रात उसी के बेड पर उसकी बेटी चुदी थी.
आज रात को 12 बजे उसकी माँ अंजलि मेरे रूम में आई. मैंने उसको सीधे बेड पर गिरा दिया. उसकी नाइटी उठा कर सीधे उसकी चुत में लंड को पेल दिया. वह सकपका गई.
मैंने अपने लंड को जोर जोर से पेलना शुरू कर दिया. उसकी टांगों को कंधे पर उठा कर तेज़ तेज़ झटके मार रहा था. उसने मेरे चूतड़ों को कसके पकड़ लिए.
मैं समझ गया कि अब ये झड़ने वाली है. मैंने भी लंड की रफ़्तार कम नहीं की. वह अपना पानी निकाल चुकी थी.
मेरे लंड का प्रहार उसकी चुत में जारी था. उसकी चुत सूख रही थी. मेरे लंड की घचाक घचाक फायरिंग उसकी चुत सह नहीं पा रही थी.
मैंने जोर जोर के कुछ झटके उसकी चुत में मारे और सारा वीर्य उसी की चुत में डाल दिया.
वह अचेत अवस्था में बेड पर पड़ी रही.
तभी कुछ गिरने की आवाज़ आई तो मैं सीधे नँगा ही बाहर आ गया.
वहां कोई नहीं था. मैं अन्दर आया तो अंजलि बोली- ये दिव्या के साथ क्या चल रहा है तुम्हारा? मैं बोला- क्या चल रहा है मतलब?
वह बोली- मैं सब देख रही हूँ, उसको और तुमको. ज्यादा होशियार मत बनो! मैं बोला- कुछ नहीं है यार!
वह बोली- कल रात मेरे बेड पर क्या किया तुम लोगों ने? उसकी चड्डी वहीं पड़ी थी … और पूरा वीर्य लगा था उस पर! तुमने उसकी चुत चोदी थी ना! मैंने कहा- नहीं यार.
वह नहीं मानी और अपने घर चली गई. अब रात को दिव्या को अंजलि ने अपने रूम में बुलाया.
उसकी माँ ने उसको उसकी चड्डी दिखाई और बोली किसके साथ किया तूने?
वह बोली- मैंने नहीं किया! उसकी माँ ने उसको 4-5 चांटे मारे.
दिव्या ने अपनी मम्मी का हाथ पकड़ लिया और एकदम से सुर बदल कर बोली- ऐ माँ … तू पराये मर्द से अपनी चूत चुदाए तो ठीक, मैं करूं तो गलत! हां मैंने उसके साथ चुदवाया. अब तुम्हारी हरकत दिखाऊं! यह कह कर उसने वह वीडियो दिखा दी, जिसमें मैं और उसकी माँ चुदाई कर रहे थे.
अंजलि वीडियो देख कर चुप हो गई और बिस्तर में जाकर सो गई. दूसरे दिन अंजलि अपनी बड़ी बेटी के साथ उसके घर चली गई.
दिव्या रात को मेरे कमरे में आई. आते ही मुझे बांहों में भर कर किस करने लगी.
मैंने भी उसके चूतड़ कसके पकड़ लिए. हम दोनों किस करते करते नंगे होने लगे.
मैंने उसके सारे कपड़े उतार फेंके. फिर मैंने उसके एक चूचे को चूसना शुरू किया.
एक उंगली उसकी चुत में पेल कर अन्दर बाहर करता रहा. उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाया और वह कामुक सिसकारी भरने लगी थी.
मैंने मुँह में लंड दे दिया और बाद में जोर जोर के झटके उसकी चुत में मार मार कर उसकी चुत का बेहाल कर दिया.
वह Xxx क्रेज़ी गर्ल मेरे सीने से चिपक कर अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लंड का साथ दे रही थी. अपने लंड का मैंने एक जोरदार प्रहार उसकी चुत में किया और अपना सारा माल उसकी भोसड़ी में गिरा दिया.
हम दोनों ने रात भर चुदाई की. फिर एक दूसरे से सट कर सो गए.
सुबह 4 बजे वह अपने घर चली गई.
हम दोनों 5 माह तक पति पत्नी की तरह रहे. वह 19 साल की और मैं 40 का भरपूर मर्द … हम दोनों ने खूब मजा लिया.
बीच बीच में उसकी माँ घर आ जाती थी. इस वजह से हम मिल नहीं पाते थे पर जब वह नहीं होती तो हमारा मिलन होता था.
अब दिव्या के पापा घर आ गए थे पर वह मिल नहीं मिल पा रही थी.
दोस्तो, अभी मसाला और बाकी है. आगे अभी और मज़ा आने वाला है जब मां बेटी दोनों एक साथ मेरे लंड से खेलेंगी! वो सब अगली कहानी में!
मेरी इस Xxx क्रेज़ी गर्ल स्टोरी पर आपके कमेंट्स की प्रतीक्षा में आपका दोस्त राज. [email protected]