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सगे मामा की जवान बेटी की चुदाई

दिनेश जी 1
सगे मामा की जवान बेटी की चुदाई
@दिनेश जी 1
12 min

Xxx सिस्टर सेक्स कहानी में मेरे मामा की बेटी बहुत सेक्सी माल है. उससे मेरी अच्छी पटती थी. मैं उसे चोदना चाहने लगा था. मैं उससे बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड की बात की और बात बन गयी.

दोस्तो, मेरा नाम दिनेश है. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है और मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको जरूर पसन्द आएगी. आप भरोसा करें या ना करें, पर यह कहानी बिल्कुल सच है. इसमें एक भी बात झूठ नहीं है.

मैंने और मेरे मामा की लड़की शोभा ने कभी सपने भी नहीं सोचा था कि हमारे बीच में यह सब शुरू होगा और हमेशा चलता भी रहेगा. रिश्तों में चुदाई की कहानी मैंने भी आज तक पढ़ी तो थी पर कभी सोचा ही नहीं था कि यह सब मेरे साथ भी हो जाएगा.

जैसा कि शोभा नाम से आपको समझ आ गया होगा कि वह मेरे सगे मामा की बेटी है और वह उनकी इकलौती बेटी है.

शोभा की उम्र अभी 20 साल है. वह दिखने में बहुत सुन्दर हॉट और आकर्षक है. उसका फिगर भी बहुत मदमस्त है. वह बहुत ही ज्यादा गोरी और तीखे नयन नक्श वाली है … और सबसे बड़ी बात यह कि वह अभी कुंवारी माल है.

यह Xxx सिस्टर सेक्स कहानी इसी शोभा की है.

मैं अपने मामा के यहां आया हुआ था. मामा एक बेटा है जो अधिकतर घर से बाहर दूसरे शहर में रहता है.

मैं मामा घर पर आता जाता रहता था. उनकी लड़की शोभा मुझसे उम्र में 10 साल छोटी थी हमारे पास एक दूसरे के मोबाइल नंबर थे जो कि हमारे रिश्ते में साधारण ही बात थी.

वह मुझे देखती, मैं भी उसे देखता था. यह बात अभी बस देखने तक ही सीमित थी, ना तो उसने कुछ रिएक्ट किया था और ना ही मैंने कभी उससे कुछ कहा था.

वह मुझे दिखने में एक मस्त माल लगती थी तो इतना मैं जरूर सोचता था कि यह चोदने लायक माल है!

मेरे पास खुद की कार थी. जब भी मैं मामा के घर जाता और उधर से मैं जिधर भी जाता, उसे अपने साथ लेकर जाता था.

मैं मन ही मन उसे पसन्द करने लगा था और उसके पास जाने के बहाने ढूंढने लगा था.

वह भी धीरे-धीरे समझने लगी थी कि मेरे दिल में उसके लिए कुछ तो है! हम एक दूसरे से खूब बातें करते थे, समय देते थे और रोज रात में एक दूसरे से चैट पर बात करते थे.

वह कालेज में पढ़ाई करती थी.

मैंने उसके साथ अपनी सैटिंग जमाने के लिए एक बहुत पुराना स्टाइल उस पर आजमाया.

एक दिन मैंने उससे चैट पर बात करते करते पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? उसने कहा- हमारे कॉलेज में लड़के नहीं हैं. वह गर्ल्स कॉलेज में पढ़ती थी.

मैंने कहा- क्या सच में तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है? उसने साफ मना कर दिया और कहा कि 12वीं कक्षा में था, पर उससे इतना ज्यादा दिन तक रिश्ता नहीं चला था, पर अभी कोई नहीं है.

हम दोनों के बीच रोज रात को चैट पर लगभग हर तरह की बात होती थी तो मैंने हिम्मत करके उससे कहा- अगर कोई और तुम्हारी जिंदगी में आना चाहे, तो क्या तुम उसे अपने दिल में जगह दोगी? उसने कहा- पहले मालूम तो चले कि वह है कौन?

मैंने कहा- पहले तुम बताओ तो कि जगह खाली है भी या नहीं? उसने कहा- ऐसे क्या जवाब दूं?

शोभा को मेरे ऊपर थोड़ा शक हुआ कि मैं शायद उससे अपनी बात कर रहा हूँ.

कुल मिला कर शोभा ने कोई ठीक सा जवाब नहीं दिया हालांकि यह अनुमान लग गया था कि वह मुझे पसन्द करती है. यह जानने के बाद ही तो मैंने उससे यह सब पूछा था.

उस समय मैंने बात खत्म कर दी और अपने भोपाल जाने की बात कह कर पूछ लिया कि तुम्हें कुछ मँगवाना हो तो बता देना! वह बोली- भोपाल से वापस कब आओगे?

मुझे दो-तीन दिन बाद आना था, तो मैंने उसे बता दिया. उसने मुझसे कह दिया था कि मुझे कुछ नहीं मंगवाना है.

मैं भोपाल गया तो बाजार से उसे वीडियो कॉलिंग पर गिफ्ट आइटम्स की दुकानें दिखा रहा था. वह मना करती रही और उसने अपने लिए कुछ भी लाने से इंकार कर दिया.

बाद में मैं वापस आते वक्त अपने हिसाब से उसके लिए सिल्वर रिंग लेकर आया था. अब इस गिफ्ट से हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ गए थे और काफी ओपन होकर घुल-मिल गए थे.

वापस आने के बाद मैं अपने काम में व्यस्त रहा और पूरा दिन निकलने के बाद जब हमने रात को फिर से बात शुरू की, तो इसी मुद्दे को आगे बढ़ाया.

तब उसने वही मुझसे पूछा- तुम किसे पसन्द करते हो? मैंने कहा- हां कोई है, पर वह मुझे पसंद करती है या नहीं, यह पता नहीं है.

उसने फिर से कहा- कौन है, बताओ तो! मैंने फिर वही कहा- यार अभी कैसे किसी के लिए कुछ कह सकता हूँ. मैं कहूँ कि मुझे आलिया भट्ट पसंद है तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि आलिया भट्ट भी मुझे पसंद करे!

अंत में वह पीछे ही पड़ गयी- बताओ बताओ कौन है? मैंने सोचा कि अब सही समय है.

मैंने कहा- मैं शोभा को पसन्द करता हूं! उसने कहा- शोभा तो मैं ही हूँ! मैंने कहा- हां, मैं तुम्हें ही पसंद करता हूँ!

वह ये सब चैट पर सुनकर एकदम से चौंक गयी और कुछ पल के बाद बोली- सोचना पड़ेगा! मैंने कहा- कितना समय चाहिए? तो वह बोली- पता नहीं!

अगले दिन मैंने वीडियो कॉल पर उसे वही रिंग दिखाई तो उसे पसन्द आयी. यह थोड़ी महंगी थी तो उसने मना किया. लेकिन मैंने कहा- पैसे मैंने दे दिए हैं … तुम वह सब कुछ नहीं सोचो!

मैं अपनी जिद करके रिंग ले आया था और मामा के घर आकर उसे पहना दी, वह खुश हो गयी. उसने कहा- मैं तुम्हें थोड़ा थोड़ा पसन्द करती हूँ!

धीरे धीरे हम दोनों और ज्यादा करीब आने लगे. मैं मामा के घर ही रुका रहा. जब तक मैं उधर रुका रहा, उसे रोज अपने पास बुलाता था, वह मना नहीं करती थी.

हमारी शुरूआत चुंबन से हुई थी. वह मेरे साथ चुंबन से बहुत खुश थी और खुल गई थी.

अब मैं मामा के घर ही उसे अकेले में पकड़ लेता और उसके दूध दबा लेता, उसके होंठों को खूब चूमता.

इस तरह से मैंने उसके होंठों को खूब चूसा और मम्मों को भी खूब दबाया. वह भी मुझे अपनी बांहों में लेने लगी थी.

मैंने धीरे धीरे उससे सेक्सी चैट करना शुरू कर दिया था.

पहले तो उसने चुदाई करवाने की हां नहीं की थी, मैंने उससे ये भी कहा था कि मैं तुम्हारे साथ कुछ भी करूंगा, तो मैं सम्भाल लूंगा.

दरअसल वह प्रेग्नेंट होने से डर रही थी, इसलिए मैंने उसे विश्वास दिलाया कि तुम मेरे साथ हर तरह से महफूज हो.

उसके मम्मों को मैं रोज दबाने और चूसने के सपने देखता था, अब वे मेरे मुँह में आने लगे थे. मैं रोज उसके बूब्स को दबाता और उन्हें चूमता. उसके निप्पलों के रस को भी मैंने खूब पिया.

हम दोनों एक साथ बेड पर बैठते, तो मैं अपना खड़ा लौड़ा उसके हाथ में दे देता, वह लंड को मसलने लगती. पर इससे आगे मामला बढ़ नहीं पा रहा था.

दरअसल हमें अच्छा मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि घर पर मामा मामी रहते थे तो मामला सैट नहीं हो पा रहा था.

अब तक हम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहने लगे थे और दोनों ही हर वक्त एक दूसरे के ख्यालों में खोये रहते थे. हम दोनों में प्यार बढ़ता जा रहा था. समय बीतता गया.

थोड़े दिन बाद मुझे कहीं जाना था, तो मैं जाने लगा. मेरी मामी की बहन का घर इसी रास्ते में पड़ता है तो मैंने शोभा को फोन लगाया.

उस दिन मेरी मामी और शोभा दोनों वहां पर आयी हुई थीं. तो मामी ने कहा- तुम जाते वक्त इधर से हमें लेकर चले जाना और हम दोनों को हमारे घर छोड़ देना. मैंने हां कर दी.

मैं अपनी गाड़ी लेकर शाम के 8 बजे तक मेरी मामी की बहन के घर पहुंच गया. मैंने शोभा को देखा, वह बहुत खुश हुई और मैं भी उसे देख कर खुश हो गया था.

रात होने लगी तो मामी की बहन ने कहा- सुबह चले जाना, रात यहीं रुक जाओ! मैंने सोचा कि शोभा से बात करने का मौका मिला है, तो रुक जाता हूँ!

तब मैंने रात रुकने के लिए हां कर दी.

उधर एकांत मिला तो हम दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को निहारते रहे. कुछ दिन बीती पुरानी यादें आने लगी थीं, पर कसम से मुझे भी और उसे भी पता नहीं था कि भगवान इतना अच्छा मौका देने वाला है!

रात हो गयी थी, सबने खाना खा लिया था. मामी और उनकी बहन काफी दिनों बाद मिली थीं तो वे एक साथ सो गयी थीं.

वह सर्दी का मौसम था. शोभा के मौसा जी उस दिन घर पर नहीं थे, वे किसी शादी में गए थे.

मौसा जी का लड़का अलग कमरे में सोया हुआ था और मौसी की छोटी बेटी अभी छोटी थी तो वह, मैं और शोभा तीनों एक कमरे में अलग अलग पलंग पर सो गए थे.

उस कमरे में बहुत अंधेरा था, इतना ज्यादा अंधेरा कि हम दोनों भी एक दूसरे को नजर नहीं आ रहे थे. रात के करीब 10.30 बजे तक शोभा की मौसी की लड़की सो गयी थी.

तब तक परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद सो चुके थे. बस हम दोनों की आंखों से नींद गायब थी.

मैंने सर्दी के कारण दरवाजा बन्द कर दिया था.

अचानक शोभा ने अपना हाथ मेरे ऊपर रखा तो मैं खुश हो गया. मैंने भी उसका हाथ पकड़ लिया.

दोनों एक दूसरे के हाथ सहला रहे थे. मैंने सीधा अपना मुँह उसकी ओर घुमाया और उठकर अपना सिर उसके मम्मों पर रख दिया. मैं आधा अपने पलंग पर था और शरीर का आधा हिस्सा उसके मम्मों पर रख दिया था.

उसने मुझे किस किया, मैंने भी अपने दोनों होंठों को उसके होंठों से मिला दिया. हम दोनों ने खूब देर तक किस किया. जिन बूब्स को देख देखकर मैं सपने में हिलाता था, वे दोनों दूध आज मेरे मुँह में थे.

मैं 20 मिनट तक उसके दोनों दूध कर आनन्द लेता रहा. कभी उनको चूमता, कभी चाटता तो कभी चूसता, कभी दोनों निप्पल एक साथ मुँह में ले लेता. मेरा लौड़ा पूरे तरीके से खड़ा था.

मेरी मामा की बेटी के दूध काफी बड़े बड़े हो गए थे. मैं उसके दोनों मम्मों को चूसकर बहुत कामुक हो गया था.

शोभा भी कामुक सिसकारियां ले रही थी; उसे बहुत मजा आ रहा था.

उस वक्त ऐसा लग रहा था मानो हमारी सुहागरात शुरू हो गयी हो. कुछ देर बाद मैंने शोभा के कान में धीरे से कहा- मुझे तुम्हारा खज़ाना चूसना है!

मेरा इशारा उसकी बुर चूसने से था. उसने कहा- मैं कब मना कर रही हूँ!

इतना बोलते ही मेरा मुँह उसके पजामे के अन्दर पहनी काले रंग की पैंटी में चला गया. मैंने उसका पजामा व पैंटी दोनों को एक साथ उतार दिया था और ब्रा भी.

अब वह मेरे साथ बिना कपड़े के मेरे बिस्तर पर थी मानो उसे जन्नत मिल गयी हो.

करीब दस मिनट तक मैंने उसकी चूत को चूसा व अपनी जीभ भी उसकी बुर में डाली. वह ‘आह आ आ आह आहह आ’ कर रही थी. उसे बहुत मजा आ रहा था.

अब वह पूरे तरीके से गर्म थी. फिर मैं ऊपर को खिसका और पूरा लंड उसके मुँह में दे दिया.

उसने मुझसे मुँह हटा लिया और बोली- पागल हो क्या … इतना बड़ा कैसे एक साथ मुँह में लूँगी? मेरे लंड का आकार सवा सात इंच है.

फिर मैंने कहा- चलो धीरे धीरे लो! वह मुँह में लेती रही, मुझे भी आनन्द आने लगा.

अब उसे चुदने की और मुझे चोदने की चुल्ल होने लगी थी. मुझे उसकी चूत और उसे मेरा लम्बा लौड़ा चाहिए था.

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतारे और अपने लंड को पकड़ कर सीधा शोभा बहन की बुर में डाल दिया. लंड लेते ही शोभा की आह निकल गयी.

शोभा कराह कर बोली- ओय मम्मी … आआह, मुझे दर्द हो रहा है आह बहुत तेज दर्द हो रहा है! यह बात सुनने के लिए मेरे तो कान तरस गए थे. मेरा पूरा लंड शोभा की मस्त चूत में था.

शोभा की चूत गीली हो गई थी. मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, वह मेरे नीचे थी.

जोर जोर से मैं उसकी चूत चोद रहा था और साथ में उसके मम्मों को बेरहमी से चूस रहा था. और Xxx सिस्टर सेक्स का मजा ले रहा था.

ऐसा करते हुए मैंने शोभा को 20 मिनट तक चोदा. फिर वह भी झड़ गयी, मैं भी झड़ गया.

मैंने उस रात शोभा को 4 बार चोदा. हर बार उसे नई सेक्स पोजीशन में चोदा. वह चुदाती रही, मैं चोदता रहा.

सुबह के 4 बज गए थे. तब तक शोभा को मैंने अच्छे से रगड़ लिया था, फिर हम एक दूसरे के गुडनाईट किस करके सो गए थे.

तब से लेकर आज तक मैंने शोभा को होटल, किचन में, रूम में, घर की छत पर, बाथरूम में हर जगह चोदा. वह आज भी मेरे लंड की दीवानी है और मैं उसके बूब्स और चूत का दीवाना हूँ.

मैं अक्सर उसके घर जाता हूं और उसकी खूब चुदाई करता हूं. अब वह और भी हॉट माल हो गई है.

एकदम सच्ची सेक्स कहानी है, उम्मीद करता हूं कि आपको Xxx सिस्टर सेक्स कहानी जरूर पसन्द आयी होगी, कमेन्ट में जरूर बताएं. धन्यवाद. [email protected]

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