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सेक्स है कुदरत का वरदान- 12

माधुरी सिंह मदहोश
सेक्स है कुदरत का वरदान- 12
@माधुरी सिंह मदहोश
14 min

हॉट गर्ल न्यूड बाथ स्टोरी में तीन जोड़े हनीमून के एक होटल में रुके. दो लड़के दारू लाने गए तो पीछे से तीसरे लड़के ने दूसरों के कमरे में तांक झाँक की.

कहानी के पिछले भाग तीन जोड़े एक साथ हनीमून पर में आपने पढ़ा कि हर्ष पम्मी, बंटू कोमल तथा मोंटी कुलजीत, हनीमून टूर के लिए निकलते हैं। रास्ते में सबके दिमाग में चढ़ी वासना के कारण तीनों जोड़ों के बीच कामुक और शरारती बातों का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है।

अब आगे हॉट गर्ल न्यूड बाथ स्टोरी:

बंटू और मोंटी की स्थिति तो स्वाभाविक थी कि उनकी दुल्हन उनके साथ थी और उनकी सुहागरात पर होने वाला शारीरिक संगम अभी शेष था।

इनसे अलग हर्ष पर अलग ही मस्ती छाई हुई थी। वह दोनों नई दुल्हनों के बीच में बैठकर रंगीन ख्वाब बुनने लगा था। वह सोच रहा था कि क्या उसे इन दो रसीले फलों को चखने का अवसर मिलेगा?

बंटू और मोंटी को पम्मी की चूत का जो लालच उस ने दिया था, उसके बदले में क्या कोई ऐसी स्थिति बनेगी जब वे अपनी बीवियों को उस से राजी खुशी चुदवायें?

डलहौजी पहुंच कर वहां उन्होंने एक तीन कमरों के साथ लगे हुए हॉल को बुक कर लिया था। हॉल में सब एक दूसरे के समीप पसर के रिलैक्स होने लगे। चाय नाश्ते का दौर चला।

उस के बाद तीनों जोड़े अपने अपने कमरों में चले गये।

बंटू और मोंटी जब ड्रिंक्स का इंतजाम करने गए. तब हर्ष ने देखा कि पम्मी भी उन लोगों के साथ नदारद हो गई थी।

जब मर्द अकेला होता है तो उसे कुछ न कुछ खुराफात सूझती है। उस के मन में आई कि देखें तो सही कि दोनों नई दुल्हनें क्या कर रही हैं?

इसलिए वह अपने कमरे से निकल कर हॉल में आया और फिर दबे पांव मोंटी के कमरे की ओर आगे बढ़ा।

उसने उसके कमरे का दरवाजा धकेला तो पाया कि दरवाजा खुला था। उसने टोह लेने के हिसाब से दरवाजे को खोला और कमरे में झांका।

वह यह देखकर दंग रह गया कि अंदर पारदर्शी शीशे के पीछे, कुलजीत पूरी तरह नंगी होकर नहा रही थी क्योंकि आज रात में सुहागरात वाली पेंडिंग रासलीला संपन्न होने वाली थी।

चोरी चुपके किसी नवयौवना और नई दुल्हन को नंगी देखना, कितनी उत्तेजना प्रदान करता है? यह केवल अनुभव करने वाली बात है। क्योंकि मोंटी बोल कर गया था कि वह दारू का इंतजाम करके आता है।

इसलिए कुलजीत का ध्यान दरवाजे की ओर ही था। उसे दरवाजा कुछ हिलता हुआ महसूस हुआ और उसे ऐसा लगा जैसे बाहर से कोई झांक रहा है।

झांकने वाला मोंटी तो हो नहीं सकता था या तो बंटू या फिर हर्ष इन दोनों में से ही कोई था। यह अनुभव होते ही कुलजीत के बदन में अचानक अतिरिक्त उत्तेजना की तरंगें उठने लगी।

कुलजीत को शरारत सूझी, उसने अपना पूरा बदन दरवाजे की और करके अपने स्तनों पर शॉवर जेल लगा कर उन पे हाथ फिराने शुरू कर दिए। हॉट गर्ल न्यूड बाथ लेती हुई बार-बार वह अपने बूब्स उठा उठा कर हर्ष को दिखा रही थी।

उसके बाद उसने दोनों हाथों में थोड़ा सा शॉवर जेल लेकर अपनी चूत पर भी लगाया और उसकी मालिश करने लगी। यह देखकर हर्ष का लंड तन्ना कर एकदम कड़क हो गया।

जब चोरी छुपे देखने वाले और दिखाने वाले को एक दूसरे की उपस्थिति का एहसास हो जाए तो दोनों की सनसनी और अधिक बढ़ जाती है।

हर्ष की इच्छा तो हुई कि कमरे में घुस के कुलजीत को चोद डाले। लेकिन उस ने माहौल खराब होने की आशंका के कारण अपने पर नियंत्रण रखा।

नहाने के बाद कुलजीत बाथरूम से बाहर आई और ड्रेसिंग आलमीरा के सामने खड़ी होकर पूरे बदन पर क्रीम लगाने लगी। जब उसने झुक झुक कर पैरों पर क्रीम लगाई तो हर्ष के सामने उसकी सुडौल गांड थी।

दोनों चूतड़ों के बीच में भूरे रंग का भंवरा देख कर हर्ष के होठों में गुदगुदी सी होने लगी इच्छा तो हुई अभी अंदर घुसकर उसकी गांड में मुंह दे दे लेकिन कुलजीत की हरकतों में उसको भविष्य में होने वाली मस्ती की संभावना दिख रही थी इसलिए उसने फिर संयम से काम लिया।

हर्ष ने जब देखा कि कुलजीत ने नाइटी पहन ली है तो उसने सोचा क्यों ना अब कोमल के कमरे में भी झांक के देखा जाए। क्या पता उसका कमरा भी खुला हुआ हो!

कोमल का दरवाजा भी खुला था, हर्ष ने थोड़ा सा दरवाजा खोल के अंदर झांका।

सामने जो दृश्य था, वह देख के हर्ष के होश उड़ गए।

कोमल नहाने के बाद मोबाइल देखते हुए अपनी चिकनी चूत को सहला रही थी, उस में उंगली कर रही थी। संभवतः वह भी पम्मी की तरह ही पोर्न देख रही थी?

यह सोचते ही उस के मन में गुदगुदी और लंड में हलचल होने लगी। वह सोचने लगा कि इस की सील तोड़ना तो बंटू की किस्मत में लिखा है।

इतने में बंटू, मोंटी और पम्मी के आने की आहट सुनाई दी। हर्ष, अपनी हरकतों को छुपाने के लिए, हॉल से बाहर निकल के उन के सामने पहुंच गया।

लेकिन तीनों की नजरों से शॉर्ट्स में तन्नाया हुआ हर्ष का लंड बच नहीं सका।

तीनों के चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कुराहट देख कर हर्ष को ऐसा लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई।

बंटू और मोंटी ने शराब और स्नेक्स को हॉल में रखी सेंटर टेबल पर रखा।

पम्मी के हाथों में सुर्ख गुलाबों की थैली थी। वह अपने कमरे की ओर बढ़ी तो हर्ष भी उस के पीछे हो किया।

कमरे में पहुंच कर पम्मी ने हर्ष से उस के तन्नाये लंड के बारे में पूछ ही लिया। पम्मी से कुछ छुपाने का तो अब कोई कारण था ही नहीं इसलिए हर्ष ने बता दिया- अरे यार, दो दो नई दुल्हनें और मैं अकेला, मेरे मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे।

पम्मी ने शरारत से हर्ष की आंखों में झांका और पूछा- कैसे अजीब अजीब ख्याल मेरे गुंडे? जरा मैं भी तो जानूं? हर्ष सकपका गया लेकिन फिर उसने सोचा कि पम्मी को खुलकर बताने में ही फायदा है, शायद वह कुछ चमत्कार कर सके।

हर्ष ने कहा- अरे यार पहले तो मैंने मोंटी के कमरे में झांका। मैंने देखा कुलजीत नंगी होकर नहा रही थी। इतना ही नहीं मुझे ऐसा लगा जैसे जानबूझ कर वह मेरे को अपने बूब्स, चूत और चूतड़ दिखा भी रही थी। मेरी इच्छा तो हुई कि साली को पकड़ के चोद डालूं लेकिन मैंने अपने को बस में रखा। उसके बाद मेरी इच्छा हुई बंटू के कमरे में झांकने की तो संयोग से उस का दरवाजा भी खुला था। मैंने देखा कोमल लेटी हुई चूत में उंगली कर रही थी। मेरा विशेष ध्यान तो इस बात पर गया कि वह भी तेरी ही तरह मोबाइल पर शायद पोर्न देख रही थी। उस समय मेरे मन में यह विचार आया कि क्या कोमल भी तेरी ही तरह सील पैक माल है? उसके बाद दूसरा विचार आया कि इसकी सील तो बंटू तोड़ेगा. काश … इसके बाद में मैं कुछ और सोचता कि तुम लोगों के आने की आहट सुनाई दी तो फिर मैं अपनी चोरी छुपाने बाहर निकल आया।

पम्मी यह सब सुनकर हंस पड़ी और बोली- तुम मर्द लोग सच में बहुत हरामी होते हो। हर्ष ने बोला- हां यार पम्मी, तेरी यह बात तो सही है और मैं पहले ही इस बात को मान भी चुका हूं। वो क्या है कि हम लोग तो चैन से बैठ भी जाएं लेकिन हमारा यह लौड़ा हमें चैन से बैठने नहीं देता। जब देखो जब इसको नई चूत में घुसने की पड़ी रहती है। वह नई चूत यदि सील पैक भी हो फिर तो कहना ही क्या? इसकी एक हसरत शांत होते ही, नई हसरतें उत्पन्न हो जाती हैं।

पम्मी ने कहा- चल यार फिलहाल जो हो रहा है उसका मज़ा ले और जो होने वाला है उसका भी आनंद ले। अभी तो डिनर का समय हो रहा है, उसके पहले ड्रिंक्स का दौर चलने वाला है। आइये कृपा करके हाल में पधारें।

हॉल में औरतों के लिए बीयर और तीनों मर्दों के लिए व्हिस्की की व्यवस्था की गई थी। भुने काजू, नमकीन, चिप्स आदि प्लेटों में सजे हुए थे।

तीनों जोड़े परस्त्री और परपुरुष के सानिध्य में अतिरिक्त मस्ती के मूड में थे।

अभी दो-दो पैग ही हुए थे कि पम्मी ने यह राज खोल दिया- बंटू और मोंटी सुनो, तुम दोनों तो तुम्हारी दुल्हनों को बिना कपड़ों के जब देखोगे तब देखोगे लेकिन हर्ष उन दोनों को चोरी छुपे पहले ही पूरी तरह नंगी देख चुका है।

इतना सुनना था कि कोमल और कुलजीत को पम्मी की बात समझ आ गई कि वह क्यों ऐसा कह रही है? वे दोनों शरमा कर एक कमरे की ओर दौड़ पड़ी। उनके पीछे पम्मी भी उठ कर चल दी कि देखें तो सही उनको यह जानकर कैसा लगा?

तीनों महिलाओं के जाते ही बंटू और मोंटी ने शरारत से हर्ष की ओर देखा। हर्ष ने भी बेशर्मी से उनकी ओर देखकर कहा- सालों, मैं क्या करता जब तुम लोगों ने अपनी अपनी बीवियों के साथ मुझे अकेला छोड़ दिया था तो! ऐसी स्थिति में तुम्हें तो यह बताने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है कि ऐसे में कोई भी मर्द हो वह थोड़ा बहुत तो बहकेगा न यार!

बंटू और मोंटी ने भी हर्ष की इस बात से सहमति जताई।

बंटू ने कहा- क्या हो गया जो इस बहनचोद ने कोमल को नंगी देख लिया तो? कुछ किया तो नहीं।

मोंटी ने कहा- हर्ष, क्या तू हम दोनों को पम्मी को नंगी नहाते हुए देखने देगा? हर्ष ने कहा- अरे यार, मैंने तो तुम दोनों को छूट दे रखी है कि हिम्मत करो, उसे पटाओ और चोदो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

बंटू और मोंटी ताली बजा कर हंसने लगे।

थोड़ी देर में पम्मी कोमल और कुलजीत को लेकर वापस उस महफिल में आ गई।

आते ही कोमल ने हर्ष का मुंह पकड़ा और कहा- हर्ष, तुम बहुत बड़े बेशर्म हो। उसके बाद कुलजीत ने भी कहा- कोमल सही कह रही है हर्ष। चोरी छुपे इस तरह देखना तो बुरी बात है।

हर्ष ने उनकी बात को हल्के में लेते हुए कहा- यदि मैं चोरी छुपे नहीं देखता तो क्या करता? तुम अपनी इच्छा से मेरे सामने नंगी तो होने से रही। इस बात पर दोनों फिर शरमा गईं और सब हंस पड़े।

अब पम्मी ने बात में और मसाला मिलाया और कहा- हर्ष, यार तू ऐसा कैसे कह सकता है? क्या पता ये दोनों तेरे सामने अपनी इच्छा से नंगी हो जाएं? इतना कहकर पम्मी अपनी सीट से उठकर दौड़ पड़ी।

उसके पीछे कोमल और कुलजीत उसको पकड़ने भागी। कुछ ही दूर जाकर दोनों ने उसे पकड़ लिया और तीनों हंसते हुए वापस लौटी।

बंटू और मोंटी भी इस तरह की कामुकता भारी छेड़छाड़ का मजा ले रहे थे। वातावरण पूरी तरह रंगीन हो चुका था।

तीनों मर्दों के लंड खड़े थे और वे तीनों, लौड़ों में व्याप्त तनाव का, उनको दबा दबा के मजा ले रहे थे।

सबके मन में तरह-तरह की काम कल्पनाएं पनप रही थीं।

इस के बाद सब ने डिनर लिया।

डिनर ने पेट की भूख तो शांत कर दी थी किन्तु पेट के नीचे की भूख अब जागृत हो गई थी। केवल लंड ही चूत में घुसने को उतावले नहीं थे बल्कि चूतें भी लंड के लिए बेकरार थीं।

पम्मी, अंदर कमरे में जा कर कोमल और कुलजीत से गहन मंत्रणा कर रही थी। उन दोनों के लिए अब पम्मी, सिमरन की तरह सेक्स गुरु की भूमिका निभा रही थी। पम्मी की बातों ने उन दोनों के चेहरे पर चमक ला दी थी।

उन दोनों से बात करने के बाद पम्मी ने हर्ष को आंख मार दी। हर्ष समझ गया कि पम्मी कोई ना कोई शरारत करने वाली है पर वह समझ नहीं पा रहा था कि उसकी भोली भाली गुड़िया अचानक इतनी कामुक जादू की पुड़िया कैसे बन गई?

तीनों कमरों में सेज सज चुकी थी। हर्ष और पम्मी ने मिलकर बंटू और मोंटी के लिए बिस्तर पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां बिखेरी. तो पम्मी ने कहा- क्यों न हम अपनी भी सुहागरात फिर से मना लें?

अब हर्ष को इसमें क्या आपत्ति हो सकती थी? उसने कहा- क्यों नहीं मेरी जान, वैसे भी बहुत दिन हो गए तेरे को चोदे हुए।

पम्मी ने यह सुनकर नकली गुस्से से हर्ष की और देखकर कहा- बेशरम! फिर वह हंसकर कमरे से बाहर निकल गई।

तीनों नए जमाने के जोड़े थे और परिवार वालों से दूर थे इसलिए दुल्हन के सज संवर कर सुहाग सेज पर बैठने की तो कोई आवश्यकता नहीं थी।

सभी लोग आपस में मस्ती करते हुए अपने-अपने कमरे में जाने की सोच रहे थे।

तभी पम्मी ने एक घोषणा की जिसे सुनकर सभी चकरा गए। उसने कहा- कोमल और कुलजीत का मानना है कि हर्ष ने आज हम दोनों सहेलियों को नंगी देखकर बहुत बड़ा जुर्म किया है। मैं उनकी बात से सहमत हूं, इस जुर्म की सजा मैं उसको यह दूंगी कि मैं उसकी आंखों पर पट्टी बांध दूंगी जिससे आज वह मेरा नंगा बदन नहीं देख पाएगा।

यह सुनकर कोमल और कुलजीत दोनों तालियां बजाने लगीं. कोमल बोली- वाह पम्मी मजा आ गया। हर्ष को कितनी प्यारी सजा दी है तूने!

अब कुलजीत बोली- हम दोनों भी ऐसा ही करेंगीं। क्योंकि बंटू और मोंटी दोनों, हर्ष की इस गुस्ताखी पर बेशर्मों की तरह हंस रहे थे। क्यों कोमल सही कह रही हूं ना? इस पर कोमल ने भी सहमति में सिर हिलाया।

तीनों ने कहा- यार ये तो ज्यादती है! इस पर पम्मी ने कहा- देखो यदि आज मस्ती मारनी है तो हमारी यह शर्त मंजूर करनी होगी वरना आज तुम लोग भी आराम करो और हमें भी करने दो।

हर्ष ने कहा- नहीं, नहीं, हमें मंजूर है। हमें तुम्हारी सारी शर्तें मंजूर है।

बंटू और मोंटी ने भी अपनी मौन सहमति दे दी। तीनों फूलों की सेज पर कलियों को रौंदने की कल्पना में व्यस्त हो गए।

पम्मी ने अपने पिटारे से तीन काली पट्टियां निकाली और तीनों की आंखों पर बांध दी। उसके बाद उन तीनों को उनके कमरों तक ले जाकर छोड़ दिया और उनको कहा- दुल्हनों की तरह अपनी सेज पर बैठ जाओ। आज तुम्हारी सुहागन रात है।

तीनों औरतें शरारत के मूड में थी। तीनों मर्द भी उनकी शरारत का मजा ले रहे थे।

हर्ष और बंटू ने सिल्क कुर्ता, पजामा पहना हुआ था, मोंटी ने कुर्ता, लुंगी।

मुझे पता है आप सब यह जानना चाहते हैं कि सुहागन सेज पर क्या घटा? तो चलिए मेरे कामुक पाठको, सबसे पहले हर्ष के कमरे का दृश्य देखते हैं।

हर्ष अधलेटा हुआ पजामे में हाथ डालकर अपना लंड सहला रहा था और सोच रहा था कि देखें पम्मी ने आज की रात को स्मरणीय बनाने के लिए क्या योजना बना रखी है? इतना तो उसे पता था कि पम्मी उसके रंग में रंग चुकी है।

जैसे ही पम्मी ने कमरे में प्रवेश किया, हर्ष के मन में गुदगुदी सी हुई कि आज कई दिनों बाद पम्मी को चोदने का अवसर मिलेगा।

पम्मी पलंग पर चढ़कर उसकी गोद में बैठ गई।

हर्ष ने पम्मी को कहा- यार पम्मी, तूने तो जिंदगी में मज़े ला दिए। तूने मुझे एक नई चूत दिलाने का वादा किया था लेकिन यहां अंजू बुआ के साथ-साथ उनकी सहेली सिमरन आंटी की चूत भी मिल गई। शादी से पहले तू कितनी सीधी सादी भोली भाली थी और अब? जमीन आसमान का अंतर आ गया है। लेकिन तेरी इन शरारतों से मैं बहुत प्रसन्न हूं। मुझे तो बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि यहां आ कर इतना मज़ा आएगा।

हर्ष और कुछ बोलता उसके पहले पम्मी ने उसके मुंह पर उंगली रखकर उसे संकेत दे दिया कि जो भी हो रहा है उस का चुपचाप आनंद लेना है, बोलना नहीं है। पम्मी ने हर्ष के चेहरे पर चुंबनों की बरसात कर दी।

हर्ष का लंड पम्मी के चूतड़ों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगा। उसने अपना कुर्ता उतारने की कोशिश की तो पम्मी ने सहयोग करते हुए हर्ष का ऊपरी हिस्सा नग्न कर दिया।

अगले और अंतिम अंक में पढ़िए कि बंटू और मोंटी के कमरों में सुहागन सेज पर क्या घटता है? कहानी अपने चरम पर पहुंचने वाली है, मुझे पूरा विश्वास है कि आपको कहानी का अंत भी अत्यधिक मजेदार लगेगा।

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