तलाक की कगार पर खड़ी लड़की के जीवन में बहार- 2
फकिंग भाभी स्टोरी में ट्रेन में मुझे एक भाभी मिली जो अपने पति से तलाक लेने जा रही थी. मैंने उनकी सुलह करवाई तो बदले में भाभी ने मुझे चूत दी.
सभी पाठकों को मेरा नमस्कार! आप सबने इस कहानी का पहला भाग ट्रेन में मिली लड़की के साथ मस्ती अनिकेत की जुबानी पढ़ा.
अब मैं जूही इस फकिंग भाभी स्टोरी को आपबीती बताऊंगी, मुझसे कोई गलती हो जाए तो माफ कर दीजिएगा.
मैंने बहुत सोचा उसके सीने से लगने से पहले, पर मैं भी क्या करती … स्त्री को अपनापन किसी से मिले, तो वह मदद खास हो जाती है.
सफर के दौरान अनिकेत से मिलना मुझे एक अलग अहसास जगा चुका था तो मैं खुद ही सीने से लिपट कर छाती पर सर रख कर सोने लगी.
पर उसकी उंगलियों की सरसराहट ने मेरे जिस्म में मानो आग लगा दी थी.
वासना से भभक रहे तन पर एक मर्द का हाथ ऐसा लगा मानो पहली बारिश से हल्की मिट्टी सी सौंधी महक आने लगी हो.
अपनी छाती से ऊपर से उसके हाथ को जकड़ कर पकड़ा, तो उसके दूसरे हाथ ने मेरी नाभि पर उंगलियों को थिरकाना शुरू कर दिया. साथ ही मेरी गर्दन पर एक गर्म सांसों का अहसास मेरे सर पर वासना के तूफान को हावी कर रहा था.
पर मैं बस कसमसा सकती थी.
मेरे बदन में जो चींटियाँ सी रेंग रही थीं, उनकी रेंगने की सरसराहट से मेरे पेट में गुड़गुड़ हो रही थी. दूसरी तरफ ये भय भी था कि कोई हमें ऐसा करते हुए देख ना ले.
इतने में ही एक भारी और कठोर से हाथ ने मेरे जीन्स की चुस्त पकड़ को चीरा और सीधे मेरी चुत के होंठों पर जाने लगा. आह … इस मर्दाना स्पर्श से मेरी आंखें बन्द हो गईं और मैंने उस हाथ को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया.
साथ ही मैंने अपने दोनों पैरों को आपस में जोर से भींच लिया.
उसी पल मैंने अपने होंठों को अनिकेत के ठोड़ी पर चिपकाया और सरका कर उसके होंठों पर जमा दिए. मैंने अपने होंठों से उसके होंठों को डांटने के अंदाज में चूमा और अपनी गर्दन को हिला कर चुत को छेड़ने से मना किया.
फिर प्यार भरे इशारे से उससे हाथ बाहर निकालने को कहा. पर उसकी उंगली लगातार मेरी चुत की लकीर पर एक लम्बे से औजार के आगमन की तरह लग रही थी.
मेरे पैर कसे होने की वजह से चुत कस गई थी और उसकी उंगली उसी कसावट में मेरी क्लिट पर रुक गई थी. उसकी उंगली मेरे दाने को लगातार छेड़ रही थी.
मैंने मना किया तो वह अपना हाथ बाहर निकालने लगा और मेरे कंधे पर अपने सिर को रख कर आंखों को बन्द कर लिया.
अब उसका हाथ बाहर आ गया था तो उसने अपने हाथ में मेरे हाथ को फँसा लिया. उसके बाद हमारी आंख ऐसे लग गयी, जैसे हम दोनों एक विवाहित जोड़े हों.
सुबह मेरी आंख 4 बजे खुली. दिल्ली आने में अभी और 2 घन्टे का समय बाकी था.
मैं काफी हल्का महसूस कर रही थी और मेरा सर भी अब हल्का लग रहा था, पर ऐसा क्यों था, यह मुझे समझ नहीं आया.
फिर जब मैंने नीचे हाथ लगाकर देखा, तो मेरी चुत कामरस से भीगी हुई थी.
मैं उठी और अनिकेत को उठा कर उसकी जकड़ से छूट कर उसे पूरा सीधा लिटा दिया. फिर वाशरूम में जाकर खुद को फ्रेश किया और टिश्यू पेपर से पूरा रस अच्छे से साफ किया.
जब मैं बाहर आयी तब तक अनिकेत जग चुका था और उसका लंड एकदम कठोर होकर तन चुका था.
मन तो मेरा था कि एक बार में ही अपनी चुत में लील जाऊं, पर सामाजिक व्यथा ऐसी थी कि बस देख ही सकती थी.
मैं दूसरी ओर बैठ गयी और अनिकेत खड़ा होकर फ्रेश होने जाने लगा कि तभी मेरे फोन पर कॉल आयी. ‘आज ही कोर्ट की सुनवाई है एक बजे की रोहणी कोर्ट में.’
अनिकेत के आने के बाद मैंने उसे सारा वाकिया बताया.
मैं- अनिकेत यार, मैं ये रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती, मुझे अपने पति के साथ रहना है. अनिकेत- तो माफी माँग लो और सीधे ये बात उससे कह दो.
मैं- पर मैं माफी क्यों माँगू जब वह किसी दूसरी स्त्री के साथ रिश्ते बना रहा है तो मैं माफी क्यों मांगने लगी? अनिकेत- तो फिर जो उसे बाहर जाने पर मजबूर कर रहा है, वह उसे तुम दे दो!
मैं- सेक्स तो मैं देती ही हूँ और मेरे पास क्या है देने को? अनिकेत- सेक्स ही मत दो, बाकी सब दे दो.
मैं- बाकी! क्या? अनिकेत- तारीख कब की है? मैं- आज की.
अनिकेत- चलो मैं साथ चलता हूँ. मैं- पर तुम क्या करोगे वहां जाकर?
अनिकेत- बस भरोसा रखो. मैं- ठीक है!
अब हम दोनों 6 बजे दिल्ली उतरे और सामान एक अनिकेत के जानकार के फ्लैट में रख कर निकल गए.
जब कोर्ट पहुंचे तो वहां मेरे माता-पिता आये हुए थे, जो अभी भी समझा रहे थे कि ये सब किस्से आम हैं, होते रहते हैं.
पर मुझे मंजूर नहीं था कि कोई मेरे होते हुए मेरे ही घर में हाथ डाले. मैंने सभी को अनिकेत को दोस्त कहकर मिलवाया.
फिर अनिकेत कुछ दर बाद पति के वकील के साथ हंस हंस के बात करता रहा था.
जब मैं उधर गयी तो पता चला कि वह वकील उसके स्कूल का दोस्त है.
मैंने उधर बैठ कर वकील और अनिकेत के सामने सारी बात रख दी जो रिश्ते में दरार ला रही थी. अब माहौल बहुत भावुक था.
तब मेरे वकील और उसके वकील ने मिलकर एक कहानी बनायी और मेरे पति को हर तरह से डरा दिया और कोर्ट में ऐसे पेश किया कि याचिका खारिज हो गयी. और हम दोनों को 6 महीने एक साथ और रहने का वक्त दे दिया गया.
कोर्ट ने कहा कि यदि इस मियाद में भी अगर सब कुछ ठीक नहीं रहता है, तब फिर से सुनवाई होगी.
मैं इस फैसले से खुश भी थी और दुखी भी. पर अब मेरे पति के वकील की फीस भी मुझे देनी पड़ी.
फिर अनिकेत और मैं फ्लैट पर जाने लगे और बेबीज को मैंने माता पिता के साथ भेज दिया.
अब मैं बिंदास खुश होकर अनिकेत के साथ फ्लैट पर आ गयी. शाम के 7 बज चुके थे.
कमरे में घुसते ही दरवाजा लगा कर मैंने खुद अनिकेत को भींचा और उसको दीवार से सटा दिया. मैंने जोर लगाते हुए उसके सीने से टी-शर्ट खींच कर अलग कर दी और अपनी गांड को मटकाती हुई उसके होंठों पर होंठ रख कर चूसने लगी.
उसने मेरी गांड पर एक जोर का थप्पड़ मारा और मेरे पूरे वजन को अपनी गोदी में भर कर उठा लिया. उसने मुझे अपने हाथों के झूले में लटका कर दीवार से सटाते हुए उठा लिया.
साथ ही अपनी जीभ मेरे होंठों पर फिराते हुए मेरी जीभ को चूसने लगा. नीचे से वह मेरी गांड को अपनी हथेलियों में जकड़ कर जोर जोर से भींचने लगा.
मेरे मुँह से ‘उमं म्हआ आआह मर गयी प्लीज आअ हअ.’ की जोरदार आवाज निकली और मैंने उसके बाल पकड़ लिए.
करीबन 20 मिनट के लम्बे होंठ मिलन से हम दोनों की सांसें मानो थम सी गयी थीं.
वह मुझे उठा कर बाथरूम की ओर लेकर आ गया. उधर मुझे नीचे उतार कर मेरी जाघों के बीच में आकर एक लम्बी सी सांस लेकर मेरी चुत में खलबली सी मचा दी.
मैंने बाल पकड़े और उसे भींचने की कोशिश की, पर तब तक उसने मेरी पैंटी जींस के साथ नीचे कर दी थी.
अब मैं अपने हाथ से अपनी चुत को छुपाने लगी, पर उसने हाथ को ऐसे फैलाया, जैसे गोल रॉड को सीधा करते हैं.
उसने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथों को एक साइड हैंगर से बाँध दिया और हैंड शॉवर की धार से मेरी छाती को खुलने पर मजबूर कर दिया. मेरी चूचियाँ एकदम कड़क होकर उठ चुकी थीं और मेरे पैर कांप रहे थे. जिस्म की गर्मी और वासना की भूख मुझे बेहाल किए हुई थी.
अब अनिकेत ने मेरी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया था और पैंटी को चुत पर मसलते हुए धीरे धीरे नीचे को उतारने लगा था.
उसने मेरी जींस और पैंटी दोनों को मेरी दोनों टाँगों से निकाल कर एक टांग में फंसा हुआ छोड़ दिया था.
अनिकेत ने मेरी नग्न जांघ पर किस किया और ऊपर बढ़ते हुए उसने हाथ से चुत को अपनी मुट्ठी में भींच लिया.
मेरे मुँह से एक लम्बी चीख निकल गयी और आंखों में पानी भर आया. मैं पैरों से उसको मारने लगी थी.
पर उसने अपनी पोजीशन कुछ ऐसी बना ली थी कि उसकी जुबान मेरी चुत लगातार ऐसे चलने लगी थी मानो कपड़े पर कैंची चल रही हो.
मेरी सांसें ऐसे धौंकनी से टक्कर लेती हुई चल रही थीं, मानो मैं एक लम्बी रेस में दौड़ लगा रही हूँ.
वह मेरी चुत को चूसते हुए धीरे धीरे ऊपर को आने लगा.
वह अब नाभि से चुत तक जीभ को फेरता और मुझे बार बार सिहरन के दरिया में हिलाने पर मजबूर करने लगा.
नाभि और चुत पर एक अजीब सी सिहरन हो रही थी और बाकी बीच के हिस्से में उसकी जीभ फेरने से गुदगुदी हो रही थी. ऐसा खेल मैंने कभी नहीं खेला था.
इसी के साथ वह मेरी क्लिट को उंगली से छेड़ते हुए उसे सहला रहा था.
मेरे पैरों ने ऊपर उठ कर उसकी गर्दन पर अपना कब्जा जमा लिया था. उसका सर मेरी टाँगों में इस कदर हो गया था मानो कैंची के बीच में अखरोट हो.
इधर उसकी जीभ धीरे धीरे मेरी चुत के अन्दर जाने लगी और बाथरूम में केवल मादक आवाजें ही आ रही थीं.
मेरी चुत की दीवारों से उसकी जीभ टकरा कर गजब की आग सुलगाने लगी थी.
करीब पांच मिनट के बाद मैं झड़ गयी और उससे रुकने की मिन्नत करने लगी.
अब वह उठा और मुझे खोल दिया.
मैंने अपनी ब्रा और टी-शर्ट खुद ही अलग कर दी और अनिकेत का पैंट खोल कर उसे उतार दिया. अब हम दोनों जन्म जात नंगे हो चुके थे.
फिर जैसे ही मैंने अनिकेत का लंड पकड़ा, वह एकदम ऐसा सख्त था मानो आइसक्रीम की कोन में मलाई भर दी हो. उसके लौड़े से जीभ लगाते ही मानो गर्म सोया सौस का सा टेस्ट आया.
मैंने एक पल को उस स्वाद को जज़्ब किया और अगले ही पल लपक कर पूरा लंड लीलने की कोशिश करने लगी. पर मैं उसका पूरा लंड अन्दर नहीं ले पा रही थी.
फिर उसने अपना मुँह ऊपर किया और एक बार मुझे देखा. फिर मेरी गर्दन पर हाथ से सहलाते हुए पूरा लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया और मेरी नाक बन्द कर दी.
मेरी सांस घुटने लगी थी और मेरी आंखें लाल हो चुकी थीं. वह गर्दन पर ऐसे हाथ ठोक रहा था जैसे कील पर हथौड़ा चल रहा हो.
इतने में बाथ टब भर गया था.
अब उसने मेरे मुँह से लंड निकाला तो मैं गिर गयी और मानो बेहोश ही गयी.
उसने मुझे गोद में उठाया और बाथ टब में बैठा दिया. उसमें गुनगुना पानी था. उस वक्त मुझे गर्म पानी का स्पर्श बहुत अच्छा लगा.
मेरे पीछे से आकर अनिकेत बैठ गया और मैं उसके सीने से अपनी पीठ लगाकर बैठ गयी.
वह अपने एक हाथ से मेरे चूचे को मसल रहा था और एक हाथ से मेरी चुत को सहला रहा था. मैं उसके हाथ पर गर्दन रख कर केवल सुख का अहसास कर रही थी.
तभी अनिकेत ने कान में कहा- पलट जाओ! मेरी गर्दन पर एक किस करते हुए उसने मेरे होंठों तक अपने होंठ लाकर लगा दिए.
हम दोनों ने एक लम्बी समूच मारी.
मैंने हाथ से उसे हटाने की कोशिश की पर उसने मुँह नहीं हटाया.
मैंने इशारे से पूछा कि पलटना कैसे है! तो उसने कहा- खड़ी हो जाओ!
मैं खड़ी हो गयी. उसने मेरे दोनों पैरों को खोला और लंड ऊपर को करके खड़ा करते हुए इशारा कर दिया.
मैं समझ गई कि क्या करना है. मैंने अपनी चुत पर थूक लगाया और लंड के ऊपर बैठ गयी.
उसकी कमर के दोनों ओर अपने पैरों को घुटनों से मोड़ सैट कर लिए. हमारे होंठ ऐसे मिल गए मानो हम दोनों ही जन्मों से प्यासे हों.
फिर धीरे धीरे नीचे से कमर हिलने लगी थी तो मस्ती चढ़ने लगी. उसी मस्ती में ऊपर हम दोनों की जुबानें एक दूसरे से मिल रही थीं.
उसके हाथ लगातार मेरी कमर पर चल रहे थे और चूचों में कड़कपन आ गया था.
कभी वह मेरे दूध पीने लगता तो कभी निप्पल को खींच कर छोड़ देता.
कुछ मिनट बाद हमारे होंठ अलग हो गए थे और उसके मुँह में मेरे चूचे कुल्फी की तरह घुमा घुमा कर चूसे जाने लगे थे. बीच बीच में उसके दांत भी लग रहे थे.
मस्ती का इतना गजब आलम था कि क्या ही बताऊँ!
मैं अब शिथिल हो चुकी थी और अपनी कमर को उचका उचका कर अपनी चुत की गहराई में लंड को समाती और निकालती जा रही थी. बाथटब में पानी की फच फ्च्छ की आवाज आ रही थी और मेरे मुँह से उम्ह्ह उम्ह्ह की आवाज आ रही थी.
जब जब मुँह हटता तो मुँह से बेशर्म रांड की सी आवाज निकलती- आह … खाआ जाओ मुझे … आह म्ह्ह आहह्ह … प्लीज कम फास्ट म्ह्म्ह … थोड़ा और तेज चोदो मुझे … हह मर गयीई अहह आह म्म्ं!
मेरे जिस्म से ज्वालामुखी की सी आग मानो बहने लगी थी और मेरी चुत लगातार पानी छोड़ रही थी. पर पता नहीं क्यों … मुझे झड़ने का मन ही नहीं कर रहा था.
उस गुनगुनाहट भरे माहौल में ऐसा लग रहा था मानो ये लम्हा यहीं थम जाए और मेरी चुत में ऐसे ही लंड रगड़ता रहे.
मैं तीन बार शिथिल हो चुकी थी पर मेरा मन अभी भी उस लंड का स्वाद लेना चाहता था.
इतने में अनिकेत का काम हुआ और उसने मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपने में समा लिया. उसने मेरी चुत के अन्दर ही सारा रस भर दिया.
हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थीं, पर फिर भी लब मिले हुए थे. मुझे हल्का महसूस हो रहा था, मैं शान्त हो गयी थी.
फिर उसने मुझे छोटे शिशु की तरह नहलाया और साफ किया.
मैंने वापिस कपड़े पहने और एक दूसरे की बांहों में समा कर फिर से एक जोरदार किस किया.
मैं उससे फिर से मिलने का वादा करके घर के लिए निकल पड़ी.
रास्ते में मेरी चुत में सरसराहट हो रही थी और जो अनिकेत ने निशान दिए थे वे भी दर्द कर रहे थे, पर जिस्म हल्का होने की वजह से मन शान्त था.
इसके बाद हमारी मुलाकत कई बार हुई और फोन पर भी हमने अपने जिस्म की कामुकता हल्की की. उसका एक अलग ही अहसास था मानो सेक्स को सेलिब्रेट कैसे करना है, अनिकेत के प्यार करने के तरीके में ये एक खूबी थी.
आज भी मेरा रिश्ता अनिकेत से अच्छा है और मेरे जीवन में पति के साथ भी सेक्स को लेकर फिर नये सिरे से आनन्द की प्राप्ति होना शुरू हुई है. अब मुझमें वह खामी नहीं, बल्कि सेक्स में एक नया बीज फूटा है. अनिकेत ने चुदाई में बहुत सारे आसन भी मुझे सिखाए थे, उनके जरिए हमने अपने सम्बन्ध बनाये तो आज मेरा अपने पति से रिश्ता भी सही हो गया है और खुशी भी है.
आगे की फकिंग भाभी स्टोरी अनिकेत की जुबानी:
ये एक नया अनुभव था, जहां हम दोनों के बीच बहुत कम समय में जिस्मानी ताल्लुकात बने. पर यह एक ऐसा सम्बन्ध था, जिसने पत्नी को पति की जरूरत समझ आई. उसने अपने पति को दिल से स्वीकारा क्योंकि जूही जब मेरे साथ सेक्स कर चुकी थी. तब मैंने उससे पूछा था कि अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द से सेक्स करके कैसा लगा? तब उसने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा.
मैंने उसे समझाया कि यह एक सच्चाई है कि लड़की हो या लड़का उसे सेक्स की जरूरत होती ही है. यदि पत्नी अपने पति को सहयोग नहीं करेगी तो वह दूसरी लड़की की तरफ झुकता चला जाएगा.
ठीक यही बात लड़की को भी महसूस होती है. तुमने मेरे साथ सेक्स जरूर किया है लेकिन जीवन भर का साथ सिर्फ पति के साथ ही निभता है.
भोग वासना में कुछ समय उपरांत बदलाव होना आवश्यक है, उससे रिश्ते में मिठास बनी रहती है. ये हर दांपत्य को समझना चाहिये और वासना में चरमसुख पाने में समयानुसार बदलाव करते रहने चाहिये.
जिन्दगी का सफर है, हंस कर बिता ले गालिब. जिस्म की भूख को खुल कर आजमा ले गालिब. अहसासों की नाव है, होंठ से होंठ तो मिला ले गालिब.
आप लोगों को मेरी फकिंग भाभी स्टोरी कैसी लगी, मुझे मैसेज करके जरूर बताएं. धन्यवाद. [email protected]