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ट्रेन में अंकल के साथ गांड चुदाई का मजा

कबीर 33
ट्रेन में अंकल के साथ गांड चुदाई का मजा
@कबीर 33
11 min

एनल ऐस X कहानी में रात की ट्रेन में मैं एक अंकल से मिला. उनको देखते ही मेरी गांड लंड मांगने लगी. मैंने अपने तरीके से अंकल की वासना को जगाया और टॉयलेट में गांड चुदाई करवाई.

दोस्तो, मेरा नाम कबीर है और मैं 23 साल का हूं. मुझे गे सेक्स स्टोरी पढ़ना बहुत पसंद है.

मैं प्रतिदिन रात को अपने लंड को सहलाने के लिए सोने से पहले गे सेक्स कहानी को जरूर पढ़ता हूं.

लंबे समय से मैं अपने अपने प्यासे लंड की दास्तान साझा करना चाह रहा था.

यह उस समय की एनल ऐस X कहानी है जब मैं अपने मामा के यहां दिल्ली जा रहा था. मेरी शाम की ट्रेन थी. मैं थोड़ा लेट हो गया था.

मेरे स्टेशन पहुंचने तक ट्रेन आ गई थी तो मैं जल्दी भागता हुआ ट्रेन में चढ़ा.

ट्रेन में मुझे नीचे की सीट मिली हुई थी, मैं अपनी सीट पर गया और सामान नीचे यूं ही रख दिया.

मेरे सामने वाली सीट पर एक गोरे चिकने अंकल बैठे हुए थे. उनको देख कर तो मेरा लंड ही खड़ा हो गया था.

अंकल एकदम हॉट और सेक्सी थे, एकदम हट्टे कट्टे और सख्त लौंडे जैसे … शायद जिम वगैरह जाते होंगे.

उनकी एकदम हॉट बॉडी थी, हीरो जैसे डोले-शोले बना रखे थे उन्होंने!

जैसे ही मैं सीट पर बैठा, उनको देखते ही रह गया. इसी चक्कर में सामान सही से रखना भी भूल गया.

फिर अंकल ने मुझे सामान रखने को कहा. वे बोले- सामान सही से रख लो, नहीं तो चोरी हो जाएगा!

मैं तो मन ही मन बोल रहा था कि सामान तो मैं आज आपका चोरी करूंगा अंकल जानी, आज आपका लंड तो पक्का चुरा कर अपनी गांड में छुपा लूंगा!

फिर मैं उनको हां बोलकर सामान सीट के नीचे सही से लगाने लगा. सामान रख कर जैसे ही मैं उठा, मेरा पैर बैग से टकरा गया और मैं अंकल की बांहों में गिर पड़ा.

गिरने से मेरा हाथ उनके लंड को छू गया. लंड छूने से अंकल की तो सिसकारियां ही निकल पड़ीं.

मैंने अंकल से माफी मांगी तो अंकल ने शरारती अंदाज से हँसते हुए ‘कोई बात नहीं’ कहा और मुस्कुराते हुए बैठ गए.

अंकल का लंड छूकर मेरे मन का शैतान जाग गया था. अब तो मैं सिर्फ अंकल का लंड मुँह में लेना चाहता था, उसके अमृत को पीना चाहता था. अंकल का लंड छूने पर मुझे मस्त मोटा माल लगा था.

मैं अंकल के पास बैठ गया और उनसे बातें करने लगा. उनके पास बैठने पर पर इतनी मस्त मर्दानी सुगंध आ रही थी जिसके कारण मैं और पगला सा गया था.

अब तो मैं उनके लंड को लिए बिना मानने वाला ही नहीं था. मुझे तो बस रात होने का इंतजार था.

बैठे हुए ही मैं अंकल के साथ चुदाई के हसीन सपने देखने लगा था जिसके कारण मेरा लंड पूरे जोर से तन कर खड़ा हो गया था. मैंने नीचे लोवर पहन रखा था तो मेरा लंड साफ दिख रहा था.

मैं जान बूझकर पैर फैला कर बैठ गया ताकि अंकल को वह दिख जाए.

अचानक अंकल ने मेरी तरफ मुँह किया और वे मेरे लोवर की तरफ देखने लगे. मैं जानबूझ कर अपने लंड को जोर दे और खड़ा कर रहा था.

अंकल ने उसे देख लिया और मेरी ओर देख कर मुस्कुराने लगे. मैं यही तो चाहता था … मैं भी उनकी ओर देख कर मुस्कुराने लगा.

उनकी आंखों में वासना देख कर मुझे हरी झंडी मिल गई थी. अब तो मुझे रात का इंतजार था.

रात होने पर हमने साथ में खाना खाया और बातें करने लगे. अंकल ने बताया कि वे अकेले रहते थे. उन्होंने शादी नहीं की थी.

यह सुनकर तो मैं खुश हो गया. अब मुझे पक्का यकीन था कि मेरी कामुक कल्पनाएं पूरी हो जाएंगी.

खाना खाकर मैं ट्रेन के बाथरूम में चला गया और चड्डी उतार कर सिर्फ लोवर पहन कर वापस आ गया और अपनी सीट पर लेट कर फोन चलाने लगा.

मैं फोन में पोर्न देखने लगा जिससे मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और लोअर से साफ दिखने लगा. मैं इसलिए तो चड्डी उतार कर आया था ताकि अंकल को पूरा लंड दिख जाए!

आधी रात हो गई थी. ट्रेन में सब सो गए थे.

मैं और अंकल जाग रहे थे. कोई देख नहीं रहा था तो मैं अपना लंड सहलाने लगा.

उधर अंकल मुझे चुपके से देख रहे थे.

मैंने देखा कि वे भी फोन में पोर्न देख रहे थे. उनका भी लंड एकदम कड़क हो गया था. शायद उन्होंने भी चड्डी नहीं पहनी थी.

उनका लंबा मोटा लंड लोवर में साफ उभर कर दिख रहा था.

यह देख कर मैं तो पूरे जोश में आ गया. मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाल दिया और अंकल को दिखाने लगा.

उधर अंकल भी अपने लंड को चादर के अन्दर से दिखाने लगे ताकि कोई न देखे. उन्होंने मुझे अपनी सीट पर बुला लिया और हम दोनों के पैर और जांघ को चादर से ढक लिया. अब अंकल ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगे.

उन्होंने अपना भी लंड खोल दिया और मेरे हाथ में दे दिया. हम दोनों एक दूसरे के लंड को प्यार से सहलाने लगे. लंड सहलाकर हम दोनों पूरी तरह से गर्म हो गए थे.

मैंने अंकल को उनके कान में बोला- अंकल, अब इंतजार नहीं हो रहा. आपके लंड को अपने मुँह में लेने को बेताब हो रहा हूँ! अंकल ने भी हां कहते हुए कहा- मेरी जान, मैं भी अपने लंड को तुम्हारी गांड में डालने को बेताब हूँ!

ऐसा बोल कर उन्होंने मेरा लंड जोर मसलना चालू कर दिया. मैंने भी उनका लंड जोर से दबाना चालू कर दिया.

फिर अंकल ने कहा- चल बाथरूम में चलते हैं, वहां जाकर चुदाई और चुसाई का मजा लेते हैं.

मैंने अंकल से कहा- आप पहले जाओ … मैं आपके बाद आता हूँ.

इसके बाद अंकल चले गए, फिर मैं भी चला गया.

अंकल और मुझे एक ही बाथरूम में जाते हुए ट्रेन के सफाई वाले ने देख लिया था. जैसे ही हमने दरवाजा बंद किया, वह आ गया और खटखटाने लगा.

हम दोनों थोड़ा डर गए.

अंकल ने दरवाजा खोला और उससे बात की और थोड़ा समझाया, थोड़े पैसे देकर बात बना ही ली. लेकिन सफाई वाले ने एक शर्त रखी कि हम दोनों की चुदाई के बाद उसका भी लंड चूसना पड़ेगा.

मैंने हां कह दिया और सफाई वाले को बाहर ध्यान रखने के लिए कह दिया.

वह दरवाजे के पास खड़ा हो गया. अब हम दोनों बेफिक्र होकर के दूसरे को चोद सकते थे.

हमने दरवाजा बंद किया और अंकल ने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए.

उनका नंगा बदन देख कर मेरा लंड जोर से तन गया. क्या पहलवान वाला शरीर था … उनका लंड भी मस्त मोटा और लम्बा था … जैसा मैंने सोचा था. उनका लंड सांप की तरह जोर से फुफकार मार रहा था जैसे अभी ही डस लेगा.

अंकल ने जोर से मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को जोर जोर से चूसने लगे. कुछ देर चुसाई के बाद उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा कर दिया और मेरे पूरे बदन को चूसने चाटने लगे. उन्होंने मेरे दोनों चूचों को पकड़ लिया और कस कसके चूसने लगे.

उनकी चुसाई से मेरी सारी कामुकता और भी बढ़ने लगी. मैं भी अपने हाथों से उनके लंड को सहला रहा था.

अंकल मेरे चूचों को चूसते चूसते मेरी कमर तक आ गए. उन्होंने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे.

मेरे लंड के साथ वह मेरे दोनों आंडों को भी चूसने लगे. मुझे तो पूरी जन्नत का अहसास होने लगा.

कुछ देर चुसाई के बाद मैंने अंकल को रोका और बोला- अंकल सारे मजे आप ही लोगे क्या … मुझे भी लेने दो!

फिर क्या था. मैंने भी अंकल के पूरे बदन को चूसना चालू कर दिया. उनके चूचों को चूसते हुए मैं उनकी कांख के पास अपना मुँह ले गया.

आह उस मर्दानी खुशबू ने तो मुझे मदहोश ही कर डाला. मैं पागल होकर उनकी कांख को चाटने लगा.

अंकल का मोटा लाल सुपारा मैंने अपने मुँह में भर लिया और प्यार से चूसने लगा. कभी उनके प्यारे लौड़े को पूरे गले तक ले जाता, तो कभी सामने से ही जोर जोर से चूसता, तो कभी उनके दोनों बॉल को मुँह में भर कर चूसता.

आंडों को चूसने पर अंकल की हालत खराब हो जाती, वे जोर से सिसकारियां भरने लगते. उनका रसीला लंड मुझे लॉलीपॉप से भी ज्यादा मीठा लग रहा था.

आधा घंटा की लंड चुसाई के बाद अंकल का श्रीखंड मेरे मुँह में गिर गया.

अंकल ने कहा- इस मलाई को पूरा मत पीना, मुझे चूमते हुए पीना. हम दोनों साथ में पीते हैं इसको! यह सुनकर मैं जोर से उनके होंठों को वीर्य के साथ चूसने लगा. उसकी खुशबू ने तो मुझे पागल ही कर दिया.

मैंने अंकल के होंठों को वीर्य के साथ पूरा चूस डाला और अमृत समान वीर्य को पी गया. काफी देर की चुसाई के बाद अंकल का शेर जाग गया.

फिर अंकल ने मुझे पीछे घुमाया और मेरी गांड को अपनी जीभ से चोदने लगे. मेरी उनकी जीभ की चुदाई से हालत खराब हुई जा रही थी.

फिर अंकल ने मेरी गांड को अपने थूक से पूरा गीला कर दिया और अपना सुपारा मेरी गांड में धीरे धीरे डालने लगे.

मुझे काफी दर्द होने लगा था. दर्द से मेरी हालत खराब होने लगी थी.

ट्रेन भी अपनी पूरी रफ्तार से चल रही थी जिसके कारण उनका लंड भी जोर से मारे गांड को चीरता हुआ अन्दर चला जा रहा था.

अब अंकल ने पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया. मैं दर्द से कराह उठा और चिल्लाने लगा.

अंकल ने मेरे मुँह को हाथ रख कर बंद कर दिया और प्यार से चूमते हुए समझाने लगे- थोड़ी देर बाद तुम्हें अच्छा लगने लगेगा.

अब अंकल प्यार से धीरे धीरे मुझे चोदने लगे. कुछ देर बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं अंकल का पूरा साथ देने लगा. अंकल मुझे जोर जोर से चोदने लगे.

एनल ऐस X की टपाटप की आवाज से बाहर खड़ा सफाई वाला भी अपने लंड को सहलाने लगा था. उसे भी प्यार से चुदाई की मजेदार आवाजें सुनकर चुदवाने का मन करने लगा था.

काफी देर तक अंकल ने मुझे बड़े प्यार से चोदा, फिर जब वे झड़ने वाले थे तो उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया. थोड़ी देर चूसने के बाद उनकी मलाई मेरे मुँह में गिर गई और मैं अंकल के श्रीखंड को पूरा पी गया.

अंकल तो पूरी तरह से झड़ गए थे लेकिन मेरा लौड़ा अभी भी तना हुआ था. फिर क्या था … अंकल ने भी अपने मुँह से मेरे लंड को चूसना चालू कर दिया.

काफी देर चूसने के बाद मैं भी खाली हो गया. अंकल ने भी मेरा सारा माल गटक लिया और मुझे अपने सीने से लगा लिया.

हम काफी देर तक एक दूसरे को ऐसे ही सीने से लगाए खड़े रहे. जब आवाज आना बंद हो गई तो बाहर सफाई वाले ने आवाज लगाई- अरे साले मादरचोदो, तुम्हार चुदाई खतम हुई गवा हो तो हमरा लंड भी सहला देव यार!

फिर अंकल ने नंगे ही दरवाजा खोला और सफाई वाले को अन्दर खींच लिया. हम दोनों ने उसे पूरी तरह नंगा कर दिया और वादे के मुताबिक उसके लंड को बारी बारी चूसने लगे.

कुछ देर बाद वह हमें गांड मारने को कहने लगा. बस फिर क्या था. अंकल ने उसकी गांड मारनी चालू कर दी और मैंने अपना सुपारा उसके मुँह में दे दिया.

अंकल गांड मारते रहे और वह लंड चूसता रहा. काफी देर गांड मारने के बाद अंकल झड़ गए और मैंने सफाई वाले के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया.

काफी देर चूसने के बाद वह भी झड़ गया. मैंने उसका वीर्य उसको किस करते हुए पी लिया.

इसके बाद वह चला गया. अंकल ने एक बार फिर से मुझे जोर से किस किया. हम दोनों कपड़े पहन कर बाहर आ गए और अपने सीट पर सो गए.

सुबह जब हम उठे तो अंकल ने मुझे अपना नंबर और पता दिया.

हम दोनों एक ही स्टेशन पर उतर गए. मैं अपने मामा के यहां चला गया.

रात को मैं अंकल के दिए हुए पते पर चला गया. वहां रात भर हमने चुदाई की एक दूसरी की गांड चोदी और खूब मजे किए.

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