तेरी याद साथ है-19
प्रेषक : सोनू चौधरी "प्लीज जान...अपने हाथ ऊपर करो और मैं जो करने जा रहा हूँ उसका मज़ा लो..." मैंने उसे समझाते हुए कहा। "हाय राम...पता नहीं तुम क्या क्या
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार पड़ोसी कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
प्रेषक : सोनू चौधरी "प्लीज जान...अपने हाथ ऊपर करो और मैं जो करने जा रहा हूँ उसका मज़ा लो..." मैंने उसे समझाते हुए कहा। "हाय राम...पता नहीं तुम क्या क्या
प्रेषक : सोनू चौधरी मैंने प्रिया को आँख मारी और उसे लेकर धीरे से बिस्तर पे लेट गया। लेट कर मैंने उसे अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपना एक पैर उठाकर उसके
प्रेषक : सोनू चौधरी रिंकी की अक्षतयोनि का शील भंग करने के बाद: दिल तो मेरा भी नहीं कर रहा है जान, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है और सबके वापस आने का वक़्त हो
प्रेषक : सोनू चौधरी रिंकी ने एक नज़र आईने पे डाली और उस दृश्य को देखकर एक बार के लिए शरमा सी गई। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को फिर से थामा और
प्रेषक : सोनू चौधरी उह्ह्ह...जान, थोड़ा धीरे करना...तुम्हारा लंड सच में बहुत ज़ालिम है, मेरी हालत ख़राब कर देगा।" रिंकी ने डरते हुए अपना सर उठा कर मुझसे कहा
प्रेषक : सोनू चौधरी "रिंकी ने देरी नहीं की और उठ कर मेरे दोनों पैरों के बीच आकर मुझ पर लेट गई। उसका नंगा बदन मेरे नंगे बदन से चिपक गया। मेरा लंड अब भी
प्रेषक : सोनू चौधरी "जैसे ही उसने अपनी जीभ का स्पर्श मेरे सुपारे से किया मेरे लंड ने एक जोर का ठुनका मारा और एक प्यारी सी काम रस की बूँद बिल्कुल ओस की
प्रेषक : सोनू चौधरी "दोनों बहनें बिल्कुल समझदार हैं...समय गँवाने का चांस ही नहीं रखतीं।" मैंने मन ही मन सोचा और अपने हाथों को उसकी स्कर्ट के अन्दर डालने
प्रेषक : सोनू चौधरी मैंने उस वक़्त एक छोटी सी निकर पहनी हुई थी जो कि मेरे जांघों के बहुत ऊपर तक उठा हुआ था। जब रिंकी ने अपने हाथ रखे तो वो आधा मेरे निकर पे
प्रिया ने भी मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमते हुए कहा,"ठीक है मेरे स्वामी, अब मैं जाती हूँ। लेकिन कल हम अपना अधूरा काम पूरा करेंगे।" और मुझे आँख
प्रेषक : सोनू चौधरी मैंने उसका हाथ पकड़ा और वापस अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और उसकी चूत की खुशबू लेते हुए अपना काम चालू कर दिया। उसकी आवाजें बढ़ने लगी
प्रेषक : सोनू चौधरी मैंने अपनी हथेली को उसके जांघों से ऊपर सरका दिया और धीरे धीरे ज़न्नत के दरवाज़े तक पहुँचा दिया। उफ्फ्फ्फ़...इतनी गर्मी जैसे किसी धधकती
प्रेषक : सोनू चौधरी मेरा लण्ड फिर से शरारत करने लगा और अपन सर उठाने लगा। मैं ऐसी तरह से बैठा था कि चाह कर भी अपने लण्ड को हाथों से छिपा नहीं सकता था।
प्रेषक : सोनू चौधरी अपने कमरे में पहुँचा और कपड़े बदलकर एक हल्की सी टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन लिया। घड़ी पर नज़र गई तो देखा 9 बज रहे थे। दीदी कहीं दिखाई नहीं दे
आपने मेरी कहानी के पहले चार भाग पढ़े ! अब आगे- तभी बाहर से घंटी की आवाज़ आई और हम तीनों चौंक गए... "रिंकी... रिंकीऽऽऽऽऽ... दरवाज़ा खोलो !" यह प्रिया की आवाज़
प्रेषक : जीत फ़्रॉम भुज सबसे पहले मैं अन्तर्वासना के सभी पाठकों को अपना परिचय देना चाहूंगा, मेरा नाम जीत है। मैं एक 21 साल का युवक हूँ। मेरी लम्बाई 5'6"
मेरा नाम संगीता है। मैं गुजरात के धोलका नामक शहर से हूँ. मेरा रंग गोरा, बदन 38-28-36 है, जिससे दिखने में तो कोई भी मुझे खूबसूरत कह सकता है। घर में मेरे
प्रेषक : तेज ठाकुर उसने मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछा- अगर टीवी देखना हो तो यहाँ आकर देख लीजिये, वहाँ से साफ़ नहीं दिख रहा होगा। उसे लगा कि मैं टी वी देख रहा
प्रेषक : तेज ठाकुर मेरे प्यारे अन्तर्वासना के प्यारे और उत्तेजना से भरपूर पाठको, आप सबको मेरा खड़े लंड का प्रणाम। मेरा नाम तेज ठाकुर है, मैं उत्तर प्रदेश
प्रेषक : सोनू चौधरी रिंकी ने चुम्बन वहाँ पप्पू के लंड पर किया था और मुझे ऐसा लगा जैसे उसने मेरे विकराल लंड पर किया हो। हाँ भाई, मैंने अपने लंड को विकराल
प्रेषक : सोनू चौधरी पता नहीं जब पूरी पैंटी उतर जाएगी और उसकी चूत सामने आएगी तो क्या होगा। खैर मैंने सोचना बंद किया और फ़िर से देखना शुरू किया। अब तक पप्पू
प्रेषक : सोनू चौधरी आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथों से पकड़ा और मेरी आँखों में देखा। उनकी आँखें कुछ अजीब लग रही थीं लेकिन उस वक्त मेरा दिमाग कुछ भी सोचने
प्रेषक : सोनू चौधरी मेरा नाम सोनू है, जमशेदपुर में रहता हूँ। जमशेदपुर झारखण्ड का एक खूबसूरत सा शहर जो टाटा स्टील की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है। वैसे
प्रेषक : अंशु आंटी बोली- अंशु बेटा, कहाँ लगी? चलो, रोते नहीं ! चलो उठो ! मैंने अपने दोनों हाथ उनके कंधों पर रख लिए और उनके खुले हुए वक्ष से चिपक कर रोने
प्रेषक : अंशु मेरा नाम अंशु है, 23 साल का लड़का हूँ। मेरा लण्ड 7 इंच लम्बा और दो इंच मोटा है। मेरा हमेशा से ही लड़कियों और आंटियों के साथ सेक्स करने का मन
नमस्कार, मेरा नाम मकसूद है, उम्र 22 साल है। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूँ। मैं आज मेरे जीवन की सत्य घटना बताने जा रहा हूँ। एक बार की बात है, तब मैं
वो जिस्म की आग से तप रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा जैसे कह रही हो- मेरे जिस्म में समा जाओ ! मैंने उसके जिस्म को ऐसे चाटना शुरु किया जैसे वो कोई लॉलीपॉप
दोस्तो, मैं अपनी सच्ची कहानी आपको बता रहा हूँ। मेरा नाम संदीप है, करनाल का रहने वाला, 23 साल का एक कुंवारा लड़का हूँ। वैसे मैं दिल्ली में कोचिंग ले रहा
प्रेषक : चन्दन मेरा नाम चन्दन है, हरियाणा का रहने वाला हूँ, बी.टेक फ़ाइनल में पढ़ता हूँ। बात एक साल पहले की है जब मेरे पड़ोसी, जिन्हें मैं चाचा चाची कहता था,
लेखिका : उषा मस्तानी रजनी उठी और उसने मुस्करा कर मुझे देखा और जमीन पर बैठते हुए मेरा कुरता ऊपर उठाकर लोड़ा मुँह में ले लिया और एकाग्रता से लोड़ा चूसने लगी।
आधे घंटे में हम घर पहुँच गए। भाभी हम दोनों को देखकर बोलीं- रजनी क्या हो गया था? तेरे होटल से फोन आया था, तीन लड़कियाँ धंधा करते हुए पकड़ी गई हैं, उनमें तू
मैं सोमवार रात को 10 बजे आया, सुरेखा और दिन की तरह 11 बजे आकर मेरी गोद में नंगी बैठ गई और मुझसे चिपकते हुए बोली- आज तो चोदोगे न? मैंने निप्पल उमेठते हुए
लेखिका : उषा मस्तानी दो दिन बाद सुबह नल चलने की आवाज़ आई मैंने देखा तो 5 बज़ रहे थे। सुरेखा नहाने की तैयारी कर रही थी, मतलब वो वापस आ गई थी। सुरेखा अब भी
लेखिका : उषा मस्तानी सपना ने मुझे आवाज़ लगाई- राकेश, कॉफी पिओगे? मैंने हाँ कर दी। दस मिनट बाद मैं नीचे कॉफी पीने आ गया, भाभी अकेली थीं, उन्होंने बताया कि
लेखिका : उषा मस्तानी उसकी आँखों से आनन्द चमक रहा था। लंड मुँह से बाहर निकाल कर बोली- मुँह में चूसने में मज़ा आ गया। एक बार और चोदिये, ऊ उह उइ उई एक बार और
सुरेखा की तरफ देखती हुई नर्स बोली- तू भी अपनी चूत साफ़ रखा कर ! झांटे देख कितनी बड़ी बड़ी हो रहीं हैं। सन्डे की सन्डे झांटे साफ़ करने की क्रीम लगा कर डेटोल से
अब वो आराम से नहा सकती थी। अगले मिनट उसने अपनी मैक्सी उतार दी। सुरेखा के बदन पर अब सिर्फ एक लाल पैंटी थी। उसने एक जोर की अंगड़ाई ली। वाह ! क्या नंगा हसीन
मेरा नाम राकेश है, 4 साल पहले मैंने एम बी ए किया था। अभी हाल मैं ही मैंने एक नई कम्पनी कल्याण में ज्वाइन की। मेरी उम्र 27 साल, और मैं औरंगाबाद का रहने
किसी तरह से सुपाड़ा बुर के अन्दर चला गया, पूजा पसीने से लथपथ हो गई पर वादे के मुताबिक आवाज नहीं निकाली, आँख से आँसू छ्लक गये।
असल में शीघ्र पतन कोई खास बिमारी होती ही नहीं है बस मन का भ्रम होता है। एक व्यक्ति पूरा जोश में आने के बाद ज्यादा से ज्यादा 10 मिनट ही सेक्स कर सकता है.
उनकी नाइटी उतार फेंकी और अब ब्रा पर जुट गया ब्रा से मुक्त होते ही चुचियाँ यूं बाहर निकलीं जैसे कोई चिड़िया एकाएक पिंजड़े से आजाद हो गई हो!
फिर वो धीरे धीरे अपने हाथ को मेरी चूची के ऊपर से शरीर पर नचाते हुए बुर के हल्के रोंए से बुर तक ले जाते और एक अंगुली धीरे से बुर के छोटे से छेद में सरका देते।
मेरी बहन ने जैसे ही इनका लण्ड देखा चुप हो गई तभी इनका एक या दो बूंद वीर्य टपक कर हमारी बहन के गाल पर गिर गया। मैं उसके गाल से साफ करने लगी।
मेरा ध्यान तो उनकी चूचियों में था, यह उन्होंने भी देख लिया कि मेरा ध्यान उनके वक्ष पर है, तो न जाने क्यों वो भी गर्म सी होने लगी और पूरी सारी का पल्लू ही हटा कर मेरा पैंट साफ़ करने लगी।
भाभी खुद ही मेरे सामने अपनी चूत को फैला कर लेट गई और मुझे अपनी ओर खींचने लगी। मैंने भी उनके दोनों पैरों को अपने कन्धों पर ले लिया और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर टिका दिया
प्रेषिका : दिव्या डिकोस्टा मम्मी तो राजू से जोर से अपनी चूत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गई और और अपनी चूत में लण्ड घुसा कर ऊपर नीचे हिलने लगी। अह्ह्ह !
मुक्ता बेंजामिन ने यहीं से यानि गोवा (पंजिम) से ही अपने मेल में अपनी एक दिलचस्प कहानी भेजी है, उनका कहना है कि मैंने ये सब अपनी आँखों से देखा है। वे आजकल
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम प्रतीक है, मेरी उम्र 21 साल है, मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। मैं सेक्स का बहत शौक़ीन हूँ। मेरे लण्ड आकार
जब मैंने टाइम देखने के लिए फोन उठाया तो पता चला कि मेरा फोन तो चालू ही रह गया था और शायद विनोद ने बात सुन ली है। मैं डर गई, मैंने सुनील को बताया और अपना
घंटी बजी, दरवाजा खोला तो दूध वाला था। दूध लिया, बाहर देखा तो सुशील मेरी तरफ़ ही देख रहा था, मैंने उसको कहा- सुशील, चाय पीनी हो तो आ जाओ! वो आ गया, उसने
सुशील ने कहा- भाभी, मैं घर हो आता हूँ! माँ को कह आता हूँ कि विनोद भैया के यहाँ कोई नहीं है, भाभी को डर लग रहा है तो मैं वहीं सो जाऊँगा। वैसे सुशील मुझसे
सुनील ने कहा- भाभी, अब तुम कभी प्यासी नहीं रहोगी, अब तुम जब भी बुलाओगी, आपका यह सेवक हाजिर रहेगा! विनोद के आने के बाद जब भी वो बाहर रहता था हम दोनों यह
लेखिका : कामिनी सक्सेना वो मेरे साथ ही बिस्तर पर लेट गई और मेरी चूत को सहलाने लगी- कम्मो, वो दीपक का लण्ड कैसा रहेगा? नया नया जवान लड़का है... मजा आयेगा
दोस्तो, मेरा नाम निहारिका है, यह मेरी पहली कहानी है, आशा करती हूँ आप सभी को पसंद आएगी। बारहवीं कक्षा पास करते ही मुझे बैंक में क्लर्क की नौकरी मिल गई
दोस्तो, मैं फिर से हाज़िर हूँ अपनी एक और आपबीती लेकर। ये सब मेरे साथ करीब 4 महीने पहले हुआ था जो मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहता हूँ। यह घटना तब शुरू हुई
प्रेषक : जय चौहान हाय मेरा नाम जय है, मैं आज आप लोगों को अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। यह घटना चार महीने पहले की है जब मैंने पह।ली बार सेक्स किया।
प्रेषक : गुल्लू जोशी बस में कोई खास भीड़ तो नहीं थी, पर शाम की बस थी जो रात के दस साढ़े दस बजे। तक इन्दौर पहुंचा देती थी। नौकरीपेश लोगों की यह मन पसन्द बस
उसने कहा- मैं जानती हूँ कि तुम साइबर में चैटिंग के लिए जाते हो या औरतों को पटाने को क्योंकि मैं भी तुम्हारी चैटिंग दोस्त हूँ। जिससे तुम हर सन्डे को बात करते हो।
प्रेषिका : सिमरन सोधी हाय दोस्तो, मेरा नाम सिमरन है, मैं 32 साल की शादीशुदा महिला हूँ, मुझे एक 11 साल का बेटा कुंदन और 10 साल की बेटी सिया है। मैं मेरे
भाभी बोली- ठीक है, नहीं बोलूंगी!! अब जाओ और मुझे पढ़ने दो, रात को नौ बजे आना, मैं तुम्हें तुम्हारी किताब वापस कर दूंगी! और मैं उनके यहाँ से चला आया। रात को
मैंने एक बेंच पर दीवार से चिपक कर उस पर खड़ा हो गया और अन्दर झाँकने लगा, भैया और भाभी एक ही पलंग पर थे, भैया भाभी की चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही मसल रहे थे
प्रेषक : विजय पण्डित विजय शर्मा, अपना पहली चुदाई का सच्चा अनुभव बता रहे हैं। उन्हीं की जुबानी और मेरी लेखनी, कुछ इस तरह से है ... मेरे कार्यालय के तीन
लेखिका : कामिनी सक्सेना "विवेक... तुम मुझे प्यार करते हो?" "नहीं... बिलकुल नहीं... तुम मुझे अच्छी लगती हो बस..." "कितने कठोर हो... फिर रात को यहाँ क्यों
लेखिका : कामिनी सक्सेना दिल की कोमल उमंगों को भला कोई पार कर सका है, वो तो बस बढ़ती ही जाती हैं। मैंने भी घुमा फिरा कर माँ को अपनी बात बता दी थी कि मेरी अब
प्रेषिका : श्रुति हेलो मेरा नाम श्रुति है, मेरी उम्र 18 साल है, वैसे तो कालेज में मेरा नाम प्रज्ञाली सिंह है। मैं अन्तर्वासना सेक्स कहानियों की नियमित
प्रेषक : गुल्लू जोशी मेरी नौकरी शहर में लग गई थी। मैंने सबसे पहले वहाँ पर एक किराये का मकान तलाश किया। मेरे साथ मेरा मित्र भी था। मैंने और मेरे मित्र
प्रेषक : प्रेम अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सलाम। अन्तर्वासना में यह मेरी पहली रचना है। यहाँ कहानी नहीं अपितु संस्मरण है। दोस्तों बात तब की है जब मैं
लेखिका : शमीम बानो कुरेशी वो बोला- कल घर के सब लोग एक शादी में जायेंगे, आप उस समय मेरे घर आ जाना, बातें करेंगे।" "बातें करेंगे या चुदाई...?" मैंने उसके
लेखिका : शमीम बानो कुरेशी "क्या बात है अब्दुल, आजकल तो तू मिलने भी नहीं आता है?" मैंने शिकायत भरे स्वर में कहा। "नहीं, ऐसी तो कोई बात ही नहीं... बस अब इन
मैंने उसका टॉप निकाल दिया और मैं उसके सामने की तरफ आ गया। तो उसकी छोटी सी गुलाबी ब्रा मेरे सामने थी जिससे बड़े बड़े चुचे बाहर आ रहे थे।