<p>मेरी उम्र इस वक्त काफी हो गई है लेकिन फिर भी वे पुरानी यादें अभी भी वैसे ही ताज़ा हैं और मेरे ज़हन में वैसे ही हैं जैसे कि कल की बात हो।
यह ऑटोबायोग्राफी लिखने से पहले मैं आपको अपना थोड़ा सा परिचय दे दूँ।</p>
<p>मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक बड़े जमींदार के घर में पैदा हुआ था, मैं अपने माता-पिता की एकलौती औलाद हूँ और बड़े ही नाज़ों से पाला गया हूँ।</p>
<p>ढेर सारे मिले लाड़ प्यार के कारण मैं एक बहुत ही ज़िद्दी और झगड़ालू किस्म के लड़के के रूप में जाना जाता था। मैं जीवन की शुरुआत से ही औरतों की प्रति बहुत आकर्षित था।</p>
मालकिन की बेटी छोटी मेमसाब, हम साथ साथ खेल भी लेते। एक दिन वो कॉलेज जाते वक्त बोली- मेरा मन नहीं है कॉलेज जाने का, क्यूँ ना कुछ वक्त तुम्हारे साथ गुज़ारूँ!
मैंने अपने घरेलू काम के लिए एक नौकरानी रखी थी, उसका नाम शोभा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ बलाउज़ में से साफ दिखाई देती थी। उसके कूल्हों का तो क्या कहना… जब वह मटका कर चलती, तो मन करता कि अभी साली की गांड में लंड घुसा कर चोद डालूँ। वो पूरा दिन मेरे घर में रहती थी... छुट्टी वाले दिन वो और मैं टीवी देख रहे थे तो... वो कैसे चुदी मुझसे गालियाँ दे दे कर... इस कहानी में पढ़िए...
राधे बच्चा देने के लिए मीरा की नौकरानी ममता की चुदाई करने वाला है... ममता उसे बेडरूम में ले गई और अपनी साड़ी उतारने लगी.. उसके बाद राधे उसको नंगी करके उसकी जाँघों को चाटते हुए उसकी चूत पर आ गया... आगे क्या हुआ...खुद इस कहानी में पढ़िए...
मीरा की नौकरानी ममता आज बन ठन कर आई थी, राधे उसे बच्चा देने के लिए उसकी चुदाई करने वाला है... ममता के उकसाने पे राधे उसे वहीं खुले में पकड़ कर चूमने लगा तो ममता उसे बेडरूम में ले गई और अपनी साड़ी उतारने लगी.. आगे क्या हुआ...खुद इस कहानी में पढ़िए...
ममता ने बड़े जोश से राधे का लौड़ा चूस कर उसका माल चाट लिया और अगले दिन चूत चुदवाने की बात कह कए चली गई… दूसरी तरफ़ नीरज ने अपनी नई गर्लफ़्रेन्ड स्कूल गर्ल रोमा को मिलने बुलाया और … खुद पढ़िये कि क्या हुआ आगे…
मेरे कमरे पे कपड़े धोने एक लड़की आने लगी। वो मेरे साथ खुल गई... एक बार वो अपने घर में अकेली होने के कारण डर से रात को मेरे कमरे में ठहर गई तो रात में मैं खुद को नहीं रोक पाया और उसे बाहों में ले लिया … इस कहानी में पढ़िए !
मेरे कमरे पे कपड़े धोने एक लड़की आने लगी। वो मेरे साथ खुल गई... एक बार वो अपने घर में अकेली होने के कारण डर से रात को मेरे कमरे में ठहरने की बात करने लगी… मेरे मना करने पर भी वो आग्रह करके रुक गई तो रात में क्या हुआ… इस कहानी में पढ़िए !
पढ़ाई के वक्त मैंने कमरा किराये पे लिया तो कपड़े धोने एक लड़की आने लगी। वो मेरे साथ खुल गई... मेरे घर मे सारे कपड़े धोने लगी। एक बार वो अपने घर में अकेली होने के कारण डर से रात को मेरे कमरे में ठहरने की बात करने लगी… इस कहानी में पढ़िए !
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के वक्त मैंने एक कमरा किराये पे लिया तो कपड़े धोने, प्रेस करने के लिए एक लड़की आने लगी. वो शादीशुदा थी पर उसका पति दुबई में था.. मेरे अच्छे बर्ताव से वो मेरे साथ खुल कर बातें करने लगी थी... आगे इस कहानी में पढ़िए !
घर में जब कामवाली जवान सुंदर लड़की आई. मेरे लैपटॉप में ब्ल्यू फिल्म देख उसकी चूत गर्म हो गई तो उसने खुद से कैसे नन्गी होकर मुझसे कैसे चुदवाया, इस कहानी में…
घर में जब कामवाली बाई की जरूरत पड़ी तो एक जवान सुंदर लड़की आई. एक दिन उसने मेरे लैपटॉप में ब्ल्यू फिल्म देख ली और जब एब बार घर में कोई नही था तो...
'तुम्हारा लंड तो मुझे तभी पसंद आ गया था.. जब तुमने पहली बार छत से अपना माल मेरे ऊपर गिराया था और उसी दिन से तुम्हें देख रही थी कि कब तुम मेरी अपने लंड से भेंट करवाते हो?'
मैंने फिर उसे पकड़ लिया और खुद ही उसकी साड़ी ऊपर उठाई और अपना लण्ड उसकी चूत पे रख दिया मगर अंदर नहीं जा रहा था, उसने बेड पे लेट कर अपनी टाँगें पूरी तरह से खोल
थोड़ी देर तलवे सहलाने के बाद राहुल धीरे-धीरे पैर चूमता हुआ चूत की ओर बढ़ने लगा और चूत से होकर नाभि में जीभ से सहलाने लगा। रमशा जोश में आकर उससे चिपक गई
कम्मो एक बेहद ही साधारण सा जीवन बिता रही थी। दिन भर सिन्हा जी के घर का सारा काम निबटाती और रात को अपने परिवार के साथ उनके काम में हाथ बटाती। यही कोई 22 के
Bihari ne Choot Ka Bhedan kiya नमस्कार अन्तर्वासना के प्रिय पाठको ! मैं आशिक राहुल आज आपके सामने एक बार फिर प्रस्तुत हूँ एक नई सच्ची कहानी के साथ। सबसे
Bihari ne Punjaban Kamsin ki Seal Todi सबसे पहले तो अन्तर्वासना के सभी पाठको का धन्यवाद जिन्होंने मेरी कहानियों पहली मोहब्बत एक नशा एक जूनून-1 पहली
Mama ki Naukrani ki Choot Chudai हैलो दोस्तों मेरा नाम सिद्धार्थ है। मेरी उम्र 21 साल है। मुझे इंदौर आए अभी कुछ ही दिन हुए.. यहाँ मैं अपने कुछ जरूरी काम
Malkin ke Sath Naukrani ko bhi Choda-4 नमस्कार दोस्तो.. और अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं श्लोक मराठा अहमदाबाद से फिर आपकी सेवा में हाजिर
Naukarani Ki Choot Chatne Ki Katha हाय दोस्तो, मेरा नाम विकास है, मैं अजमेर से हूँ। मैं 28 साल का लड़का हूँ, देखने मैं बिल्कुल ठीक-ठाक हूँ, पर मुझे चूत
दूधवाले ने अपना हाथ सलोनी के पीछे उसके चूतड़ों पर रख दिया, मैंने साफ़ साफ़ देखा कि उसने सलोनी के सिमटे हुए गाउन को और ऊपर तक कर दिया और सलोनी के चिकने चिकने नंगे चूतड़ों पर अपनी मोटी सी भद्दी हथेली को चारों ओर घुमाया।
सलोनी ने मनोज के सामने ही अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलकर पेटीकोट को नीचे करके बाँधा, इस दौरान उसने पेटीकोट को ऐसे घुमाकर ठीक किया कि उसके पेटीकोट का कट आगे से सलोनी की चूत के दर्शन तक करा गया।
अंकल ने दीदी को कपड़े पहनाने के लिए उनके सभी कपड़े उतार दिए... वैसे भी उन्होंने केवल एक नाईटी ही पहनी थी, वो अंकल के सामने ऐसे ही नंगी घूम रही थी, अंकल उनको बार बार छू रहे थे।
मुझे लग रहा था कि मुझे अपना लण्ड उसकी बुर में प्रवेश कराने के लिए बहुत ही मेहनत करनी होगी क्योंकि उसकी बुर की दोनों पुत्तियाँ आपस में बुरी तरह से चिपकी थी
सलोनी के बाद मुझे अगर किसी की चूत पसंद आई थी तो वो मधु की ही थी, बिल्कुल मक्खन की टिक्की की तरह... उसकी चूत की याद आते ही मैंने मधु को बिस्तर के किनारे पर ही पीछे को लिटा दिया।
रेणुका मैंने मम्मी से इंग्लिश में बात तो क़ी, पर सारी घटना के बारे में कुछ भी नहीं बताया। फिर मैंने रामदीन को यह कहते हुए फोन थमा दिया कि मम्मी उससे कुछ
रेणुका मुझे इस बात का पता था कि मरद चुदाई में ‘इसे’ हम लोगों के ‘बिल’ में डालते हैं। 'जैसा भी है, लेकिन यह मर्द का लौड़ा तेरी चूत में आज ज़रूर घुसेगा।”
रेणुका प्रिय पाठको, मैं एक बहुत ही सेक्सी बदन की मलिका 22 साल की भरी-पूरी लड़की रेणुका हूँ। यह कहानी कोई चार साल पहले तब शुरू होती है जब मैं एक कमसिन
विजय पटेल हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम विजय है और मैं मेहसाणा के एक गाँव में रहता हूँ, घर पर सब लोग मुझे जॉन कहकर बुलाते हैं क्यूँकि मेरी बॉडी और चेहरा जॉन
मेरा नाम नीता मेहता है। मैं 26 वर्ष की खूबसूरत विवाहित महिला हूँ। जीवन में मुझे हर सुख मिला, मगर एक वो सुख नहीं मिल पाया, जो एक औरत चाहती है, शारीरिक सुख।
कुलदीप वर्मा हैलो दोस्तो, मैं कुलदीप वर्मा श्रीगंगानगर, राजस्थान का रहने वाला हूँ। आज मैं आपको अपने जीवन की एक छोटी सी घटना, जो आज से लगभग 3 साल पहले 2009
हैलो दोस्तो, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है, आशा करता हूँ कि आप सबको पसंद आएगी। मैंने अन्तर्वासना की सभी कहानियाँ पढ़ी हैं। मुझे लगता है कि मुझे भी
इमरान अब लण्ड का सुपारा आधा से लेकर एक इंच तक भी चूत के अंदर चला जा रहा था... मधु ने इतनी कसकर लण्ड पकड़ा था कि...वो वहाँ से इधर उधर न हो इसीलिए चूत में
इमरान मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था... जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या... इतनी
इमरान अचानक मेरी ज़िंदगी ने एक रोमांचक मोड़ ले लिया था... जो अब तक मैं जी रहा था.. वो केवल सूखी नदी की तरह था, अब ऐसा लग रहा था जैसे ज़िंदगी में रस ही रस
इमरान मैंने देखा मधु मेरे बरमुडे को ध्यान से देख रही है... बरमूडा लण्ड वाले भाग से काफी उठ गया था... क्योंकि मेरा लण्ड कुछ सख्त हो गया था... मैं मधु के
इमरान सलोनी ने दरवाजा खोला- ओह आप आ तो गए... क्या हुआ प्रणव भैया ??? उसने सलोनी को देख एकदम से गले लगाया और उसके गाल को चूमा... प्रणव हमेशा ऐसे ही मिलता
इमरान जैसे ही दरवाजा की चटकनी खुलने की आवाज आई... मैंने भी दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया और दरवाजा पूरा खुल गया... ओह माय गॉड... मेरे जीवन का एक और मधुरम
इमरान अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या सलोनी मेरे सामने ही किसी गैर मर्द से चुदवाती है... या उससे पहले मैं सलोनी के सामने... मधु या किसी और कमसिन लड़की
इमरान मैं- अरे यह प्रणव इतनी जल्दी कैसे आ गया? सलोनी- अरे नहीं जानू... मधु होगी... मैंने उसको आज काम करने के लिए बुला लिया था... मधु हमारी कॉलोनी में ही
मेरा नाम विक्रम है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ पर वास्तव में मैं पैदाइशी मोदीनगर का हूँ, वहाँ हमारा पूरा परिवार रहता है। इस समय दिल्ली की एक कंपनी में
विजित पाटिल मैं और मेरी पत्नी, शादी के बाद एक नए घर में खारघर, नवी मुंबई में रहने गए। मैं घर के कामों के लिए कामवाली ढूँढ रहा था। एक दिन मुझे लिफ्ट में एक
प्रेषक : अजय त्रिपाठी नमस्कार दोस्तो, आप सब को मेरा नमस्कार। आज मैं आप लोगों को एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसे सुनकर लड़कों के लण्ड से रस टपकने लगेगा और
प्रेषक : देवव्रत मैं देवव्रत, लखनऊ के अलीगंज में रहता हूँ। यह मेरी आपबीती है जो श्रेया आहूजा के ज़रिये मैं आप को बताना चाहूँगा। मेरी बीवी रेवती अक्सर
प्रेषक : नितिन राज दोस्तो, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है, वैसे मैं अन्तर्वासना की अधिकतर कहानियाँ पढ़ चुका हूँ इसलिए मैंने अपनी कहानी भी आप लोगों
अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज दर्द पर आनन्द हावी होने लगा, मैं महसूस कर रही थी कि उसका XL साइज़ का लिंग लगातार योनि के संकुचित मार्ग को धीरे-धीरे फैलाता अन्दर सरक रहा है। मैंने आँखे
फिर नहाने के वक़्त भी दिमाग अपनी जगह नहीं था, झटका तब लगा जब किसी के दरवाज़े पर जोर देने से वो खुल गया। मैंने पीछे घूम कर देखा तो सामने ही रफीक खड़ा
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को आदाब ! आपकी सेवा में मैं अपनी एक ऐसी दोस्त की कहानी लेकर हाज़िर हूँ, जिसके पास बताने को कहानियाँ तो कई हैं मगर लिखने का हुनर
उसकी चूत बिल्कुल एक अनचुदी और अनछुई थी। चूत की दोनों फाँकें चिपकी हुई थीं। दरार के बीच में चने के दाने सा उभरा हुआ उसकी भगनासा, उसकी भगन को देख कर मुझे कमलगटा के बीज की याद आ जाती है जो हरे रँग का होता है.
मेरे नौकर की बीवी कमाल की लड़की है. देखने में वो किसी अप्सरा से कम नहीं लगती है. उसकी टाँगें केले के तने की तरह, कमर पतली और लहरदार, भारी नितम्ब, उठावदार चूचियाँ जैसे दो उन्मत्त पर्वत शिखर, जो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को आतुर हों, सुराही की तरह गला, कोमल से हाथ, लाल गुलाबी होंठ, सुतवां नाक, कमल पंखुरियों से नयन, चौड़ा माथा, घने काले बाल, जिसमें फँस कर कोई भी अपने होश गवां बैठे. उस लड़की को देख कर बड़े-बड़ों के होश गुम हो जाएँ.
दोस्तो, लड़की को उत्तेजित करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस उसे गर्म करने का तरीका ठीक होना चाहिये। मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही कामोत्तेजित करके
प्रिय अन्तर्वासना के पाठको ! आप सब को इस नाचीज़ तृष्णा का सप्रेम प्रणाम ! मुझे अन्तर्वासना पढ़ते हुए अभी सिर्फ एक माह ही हुआ है और इतने कम समय में ही मैं
मैंने एक एक कर के अपने सारे कपड़े उतारे, एकदम नंगी होकर बिस्तर पर तकिया बाँहों में भरकर हाथ चूत के दाने को मसलते हुए 'शाम मुझे चोदो! दीपक, मेरे राजा, मुझे चोदो!' कहने लगी।
मेम साहब मेरे ऊपर यानि लंड के ऊपर अपनी चूत रखकर बैठ गई। जैसे ही वो मेरी लंड के ऊपर बैठ कर नीचे हुई, मेरी तो वाट लग गई, मेरे लौड़े की सारी खाल खिंच कर नीचे आ गई और मैं दर्द के मारे चीखने लगा।
"साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खूब चोदिये, चोदना बन्द मत कीजिये !" प्रेषक : रोहित शर्मा मेरा नाम रोहित है ! मैं गंगानगर में अपने गाँव से पढ़ने
प्रेषक : निखिल शर्मा हेलो, मेरा नाम निखिल है, मेरी उमर 24 साल है। यह कहानी एक साल पहले की है। हमारे यहाँ गीता सफाई का काम करती थी। गीता एक शादीशुदा औरत थी
मैंने चादर उतार फेंकी। मेरे गोरे जिस्म को काली ब्रा पैंटी में देख बुड्डों के लुल्लों में जान आ जाती है, मैंने उसके पजामे के नाड़े को खींच दिया। पजामा गिर गया.
मैं बहुत चुदक्कड़ औरत हूँ, स्कूल के दिनों से मैंने चुदाई का रस चख लिया था, मैंने जिंदगी में कई लंड लिए, लेकिन बच्ची होने के बाद मेरी छोटे लंड से तसल्ली नहीं हो पाती, मेरे पति मुझसे उम्र में काफी बड़े हैं.
प्रिये मित्रो, मेरा नाम रोहन है, मैं 25 वर्ष का ऊंचे कद, चौड़ी छाती वाला एक तंदरुस्त जवान हूँ और पंचकूला में अपनी 23 वर्षीय पत्नी पूनम तथा छह माह के बेटे
लेखक : हर्ष कपूर दोस्तों और चाहने वालों को नमस्कार। यह मेरी पहली कहानी है। मैं जबलपुर, मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक बड़े
दोस्तो, मैं आपको एक चुदाई का किस्सा सुनाता हूँ... चुदाई की यह कहानी सुनकर आप का लंड और मुंह तो गीला होना तय है... मैंने कुछ ही दिन पहले अपना कमरा चेंज
उसकी गांड के छेद पर लगाने में लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाया, वो बोली- बाबू... जरा धीरे करना... मुझे डर लग रहा है... ज्यादा दर्द तो नहीं होगा ना?'
बापू कहाँ मानते हैं। वो तो अम्मा को अपना हथियार चूसने को भी कहते हैं पर अम्मा को घिन आती है इसलिए वो नहीं चूसती इस पर बापू को गुस्सा आ जाता है और वो उसे उल्टा करके जोर जोर से पिछले छेद में चोदने लग जाते हैं।
मैंने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से उसके नितम्बों को सहलाने लगा। अचानक मेरी एक अंगुली उसकी गांड के छेद से जा टकराई।
उसकी कुंवारी बुर से आती मादक महक से मैं तो मस्त ही हो गया। उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया। अब मैंने अपनी जीभ को थोड़ा सा नुकीला बनाया और उसकी फांकों के बीच में लगा कर ऊपर नीचे करने लगा।
मैंने उसे बाजू से पकड़ कर उठाया और इस तरह अपने आप से चिपकाए हुए वाशबेसिन की ओर ले गया कि उसका कमसिन बदन मेरे साथ चिपक ही गया। मैं अपना बायाँ हाथ उसकी बगल में करते हुए उसके उरोजों तक ले आया।
मैं उसकी तेज़ होती साँसों के साथ छाती के उठते गिरते उभार और अभिमानी चूचकों को साफ़ देख रहा था। जब कोई मनचाही दुर्लभ चीज मिलने की आश बंध जाए तो मन में उत्तेजना बहुत बढ़ जाती है।
मैं उठकर उसके पास आ गया और उसके होंठों को अपनी अगुलियों से छुआ। आह… क्या रेशमी अहसास था। बिल्कुल गुलाबी रंगत लिए पतले पतले होंठ सूजे हुए ऐसे लग रहे थे जैसे संतरे की फांकें हों।
प्रेषक : मयंक अग्रवाल यह कहानी है मेरे एक दोस्त की जिसे मैं उसी के शब्दों में पेश कर रहा हूँ, कहानी पढ़ कर कृपया अपने विचार जरूर दीजिये। मेरा नाम रेमो है,