अनजानी और प्यासी दिव्या-1
स्लीपर बस में रात में मेरी नजर एक हसीं कली पर पड़ी, वो मुझे ही देख रही थी मेरे लंड ने हलचल शुरू कर दी। कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक अनजानी को जानी पहचानी बनाया!
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार कोई मिल गया कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
स्लीपर बस में रात में मेरी नजर एक हसीं कली पर पड़ी, वो मुझे ही देख रही थी मेरे लंड ने हलचल शुरू कर दी। कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक अनजानी को जानी पहचानी बनाया!
मेरे धक्कों की स्पीड बहुत तेज़ हो गई तो भाभी ने हिलना बंद कर दिया और मेरे लण्ड की करामात का आनन्द लेने लगी। घुड़चढ़ी पोज़ में भाभी 2 बार स्खलित हो गई!
काफ़ी देर तक चूत को चूसने के बाद अपने मुँह में लेकर मेरे मम्मों को पीने लगा। अब मुझे भी मस्ती सी आ रही थी, वो मेरी चूत में उंगली भी कर रहा था।
बदल सिंग को ऐसी हुस्न परी के जिस्म को छूने का जो मौका मिल रहा था, वो पायल के करीब आया और गले से हाथ को ले जाता हुआ उसके मम्मों पर जाकर रुक गया और धीरे-धीरे उनको दबाने लगा।
ट्रेन में भीड़ के कारण मुझे अपनी सहेली के साथ ए सी कोच में बिना टिकट चढ़ना पड़ा. टीटी आया तो उसे पैसे देकर टालने की कोशिश की लेकिन उसकी कामुक नज़र तो हम दोनों की जवानी पर थी.
एक मॉल के पीछे से जाते हुए एक लड़के को मुठ मारते देखा, उसका लुंड बढ़िया था तो मैं उसे देखने लगी. उसने मुझे देखा तो अपने पास बुलाया, मैं खुद को रोक नहीं पाई और...
मेरी बातें सुनकर वो हँस पड़ी.. और बोली की वर्जिन तो मैं भी नहीं हूँ.. फिर तुम्हारी सिम कैसे हो गई? यह सुनकर मुझे लगा कि लड़की चुदने वाली है..
मैं अपने भाई को उसके स्कूल से लेकर आता हूँ, एक आंटी भी अपने बच्चे को लेने आने लगी। वो हर रोज मुझे अर्थपूर्ण नज़रों से देखने लगी। उसने मुझे पटा कर अपने बदन की प्यास बुझाई, इस कहानी में पढ़ें!
पूजा मेरे लंड को मसलते हुए बोली- यार, मेरी चूत में आग लगाकर तुम यहाँ आ गए.. चलो अब जल्दी से मेरी इस टपकती चूत को अपने लंड से शांत कर दो.. क्योंकि इस चूत ने बहुत लौड़े खाए हैं.. इसकी आग सिर्फ़ लौड़े से ही बुझेगी।
होली पर मथुरा जाते समय ट्रेन में एक लड़की मिली जो मेरे पास ही बैठी थी। थोड़े ही समय में वो मुझसे पट गई तो मैंने उसे टॉयलेट में चलने को कहा मगर उसने मना कर दिया।
मैं आधार कार्ड बनाने एक गाँव के स्कूल में काफ़ी दिन रहा। वहाँ खाना बनाने वाली एक आंटी ने मुझे पटा कर अपनी गांड और चूत मरवाई, पढ़ें इस कहानी में!
लड़की का कमीज उसकी छाती तक उठा हुआ था और उसकी ब्रा भी ऊपर सरकी हुई थी जिससे उसकी चूचियाँ आधी नंगी दिख रही थीं... गोल गोल दूधिया रंग के नुकीले वक्ष थे उसके जो बिल्कुल तने हुए थे।
दिल्ली एयरपोर्ट पर एक महिला की चूचियां दिख रही थी, मैं उन्हें देखता रहा तो उसने मुझे अपना कार्ड दिया और कहा- फोन करना! मैंने Whatsapp पर उसे मैसेज किया तो उसने मुझे अपने घर बुला लिया.
यह कहानी मुम्बई में मिली एक भाभी की है जब मैं वहाँ अपने मामा मामी के घर गया था। वो मामी की सहेली थी, हमारी दोस्ती हो गई, उसके बाद तो वो खुद ही मेरे नीचे आ गई…
अन्दर उसने पैंटी पहनी हुई थी.. जिसकी वजह से मैं उसकी चूत को खुलकर नहीं सहला पा रहा था.. और इधर मेरा लंड अपने पूरे शवाब पर था। मैंने एक हाथ से उसकी सलवार को खोला, दूसरे हाथ से लंड बाहर निकाला.
उसके होंठ काँपने लगे, धड़कनें और तेज हो गई। मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा, साथ ही उसको किस भी करने लगा। हम नंगे होकर एक दूसरे के बदन से खेलने लगे।
रचना की भाभी काफी गोरी चिट्टी थी, लाल साड़ी में लो कट ब्लाउज में बड़ी ही सुन्दर लग रही थी। ॠचा भाभी की आँखें बड़ी-बड़ी, नाक तोते की चोंच जैसे नुकीली थी उसकी।
मैं उनके लिंग के ऊपर बैठने उठने लगी जिससे लिंग योनि में अन्दर बाहर होने लगा। मेरी पकड़ कुछ पलों के धक्कों में फिर से मजबूत हो गई और मेरी योनि भी कसने लगी।
मेरी हालत अब और बुरी होने लगी थी, मैं वासना के सागर में गोते लगाने लगी थी, मेरा मन पल दर पल बदल रहा था। कभी उनके झटके मेरी चीख निकाल देते और सोचने लगती 'भगवान् ये जल्दी से झड़ जाएँ'
इन दिनों में उसके चूत इतनी बार चुद चुकी थी कि जोर से धक्का देने का कोई फ़ायदा नहीं रहा, आसानी से चूत ने गपक लिया और अब चूत और लंड की थाप सुनाई दे रही थी और दोनों के मुँह से आह-ओह आह-ओह की आवाज आ रही थी।
मौसम खराब था और आधे रास्ते में ही बारिश शुरु हो गई थी, छतरी के नीचे कोई लड़की खड़ी किसी की मदद पाने के लिए वहाँ बारिश में खड़ी हुई है। उसने मुझे हाथ के इशारे से रोका..
मेरी बस निकल जाने के कारण मुझे एक ट्रक में लिफ़्ट लेनी पड़ी। रास्ते में वो जंगल की तरफ़ मुड़ गये और पैसे मांगने लगे। मेरे पास पैसे नहीं थे तो मुझे अपना बदन उनके हवाले करना पड़ा।
धीरे-धीरे उसकी साड़ी को ऊपर करते हुए उसकी मोटी जांघों के बीच आ गया, जैसे-जैसे मैं उसकी योनि के पास जो अभी भी साड़ी से छिपी हुई थी, पहुँच रहा था, रचना की तड़प बढ़ती जा रही थी और उसकी सिसकारी तेज होती जा रही थी।
मेरी कहानी पढ़ कर एक शादीशुदा महिला ने मुझे मेल की, दोस्ती की। उसके पति विदेश में थे तो वो विरह की आग में जल रही थी। उसने मुझे अपने घर बुलाया।
वो मुझे गाली देने लगी थी अपनी चूत को मेरे मुंह से रगड़ने लगी, उसकी चूत की प्यास कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी, वो चिल्ला रही थी- ले भोसड़ी के, मेरी चूत चाट ! ले मादरचोद… चाट भोसड़ी के चाट…
मैं बेरहम बनकर जंगली चुदाई का मन बना चुका था। उसकी बात को अनसुना करके एक बार पूरा लण्ड निकाला और फिर से एक झटके से पूरा चूत में उतार दिया।
मैंने उसकी सलवार नीचे खिसका दी और जल्दी से अपनी पैन्ट भी नीचे खिसका कर जैसे ही लंड बाहर निकाला.. तो उसकी लंड को देखकर एक हिचकी सी निकल गई
मैंने उसके ऊपर लेट कर उसके लबों को चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में किस और उसकी चूची के मसलने का नतीजा सामने आया.. उसकी गांड उछलने लगी.. अब वो मेरे चूतड़ों को अपने हाथों से दबाने और मसलने लगी थी।
ट्रेन की यात्रा के शुरु में ही एक मां बेटी मिल गई। ट्रेन में बहुत भीड़ थी तो हमें सट कर बैठना पड़ा। लड़की से बातचीत होने लगी, दोस्ती हो गई… आगे की घटना कहानी में पढ़िये…
वो कमर उठा-उठा कर मुझे बुला रही थी। मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी.. अब वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने थी। मैं गौर से उसके जिस्म को देख रहा था। नारी सौंदर्य सच में ऐसा होता है.. कंचन सी कोमल सी काया.. गोरी-गोरी त्वचा..
यह कहानी जबलपुर की ममता और मेरे दोस्त मुंबई के राजीव जी की है जो फेसबुक में मिले और अंत में दोनों ने ही सम्भोग की परम संतुष्टि को प्राप्त किया...
पाँच मर्द मुझे यमुना किनारे ले गये और वहाँ खुले में सबने मेरे सारे छेद ठोक कर मुझे होटल छोड़ गये। सुबह उठी तो देखा कि वेटर सफ़ाई कर रहा है और मैं पूरी नंगी हूँ…
रचना ने मुझे ऐसे जकड़ा था कि मेरा हाथ उसके चूतड़ों पर ही था। उसके इस तरह मेरे जिस्म को सहलाने से मेरे रोम-रोम में मस्ती छा गई। मेरा हाथ उसकी गांड को सहला रहा था।
उसकी चूत चूमने मात्र से ही उसने अपनी टांगों को फैला दिया, अब उसकी चूत बिल्कुल स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी, दोनों फांकों को खोलते हुए उसकी गुलाबी चूत के अन्दर मैंने अपनी जीभ डाल दी।
मैं एक लड़की से फेसबुक पर मिला, पहले बातें हुई, फिर सेक्स चैट होने लगी, फिर बदन के कामुक अंग दिखाने पर बात आ गई. उसके बाद हमने मिलने का प्रोग्राम बनाया और हम सेक्स तक जा पहुंचे...
मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और उसके गाल को चूमते हुए बोला- क्या तुम मुझे अपनी चूत दिखाओगी? 'लेकिन मैं ट्रेन में अपनी चूत तुम्हें कैसे दिखा सकती हूँ?'
मैं अब उसके चूत में ऊँगली डाल चुका था और चूत के दाने को सहला रहा था जिससे सोनिया अपने चूतड़ खूब हिला हिला कर मज़ा ले रही थी, ऐसा लग रहा था कि वो कभी भी झड़ सकती है।
मेरी सहेली हॉस्टल में चुदती थी, मुझे भी चुदाई के लिये उकसाती थी। एक बार हम सहेलियाँ घर जा रही थी तो वोल्वो बस में उसका प्रेमी अपने दोस्त के साथ आया। और फ़िर…
सोनिया ने एक शाम मुझे अपने घर बुलाया। मैं उसके घर पहुंचा तो उसे देखता रह गया, रेशमी गाउन उसके शरीर से चिपका हुआ था, चूची पेट नाभि जांघ सब के उभार- गहराई दिख रही थी।
कार से सफ़र करते हुए रात को एक ढाबे में रुके वहीं रात बिताने की मज़बूरी थी क्योंकि रास्ते में खतरा था. ढाबे वाला हमें अपने घर ले गया और वहाँ क्या हुआ, इस कहानी में!
हम मूवी देखने तय समय पर हॉल तक पहुँच गए। जैसे ही वो आई, मेरी तो सांस ही रुक गई… सफ़ेद रंग का लॉन्ग टॉप पहन कर बिल्कुल परी जैसी लग रही थी सोनिया!
वाइफ़ स्वैपिंग की कहानी पढ़ के मुझे एक मेल मिला एक विवाहिता लड़की का, वो मुझे मिलना चाहती थी. हम मिले भी और जो हुआ, इस कहानी में पढ़िए...
चण्डीगढ़ से देहरादून लौटते समय एक युवती मेरे साथ बैठी और रास्ते भर उसने मुझे खूब मज़े दिये क्योंकि रात का सफ़र था। फ़िर आधी रात को उसके घर तक छोड़ने गया तो…
ट्रेन में बहुत भीड़ थी.. वो औरत मेरे पैरों के ठीक नीचे अपने चूतड़ मेरे पैरों की उंगलियों पर टिकाकर लेट गई थी। मैं कुछ नहीं बोला.. मेरी गाण्ड फटने लगी कि एक अजनबी औरत मुझसे ऐसे बर्ताव कर रही है।
दिल्ली मेट्रो की भीड़ में एक लड़की मेरे साथ चढ़ी मैं उसके पीछे था. कोशिश की तो बात बन गई और उतरने के बाद उसका नम्बर भी ले लिया. फिर उसी शाम को हम मिले!
अब बारी मेरी थी.. उसके लंड का टेस्ट लेने का, मैंने उसके लंड पर थोड़ा का थूक निकाल कर लगाया और अपने होंठों से किस्सी करने लगी।
मैं मुंबई से इलाहाबाद के लिए ट्रेन से आ रहा था, 27-28 साल की एक विवाहिता लड़की ट्रेन के 2AC कोच में आई, उसकी आवाज़ से मेरी आँख खुली, देखा कि काफी मस्त बदन की लड़की थी वो… भरे भरे चूचे…
फर्स्ट एसी ट्रेन में एक हसीना मेरे कूपे में आई. बात शुरू हुई तो वो प्यार में धोखा खाई थी, भावुक हो गई थी. ट्रेन के झटके से वो मेरे ऊपर आ गिरी और काम हो गया.
थोड़ी देर उंगली से खेलने के बाद मेरी योनि को उन्होंने और फैला दिया.. तो मैं कराह उठी और अपनी जुबान मेरी योनि से चिपका दी। वो मेरी योनि को चूसने लगे और जुबान को मेरी चूत के छेद पर धकेलने लगे।
मैं बिलकुल नंगी किसी दूसरे की छत पर क्या कर रही हूँ.. मेरी हया और हालत इस बात की चीख-चीख कर गवाही दे रही थी कि मैं चुदने आई हूँ।
मैंने राजे को फर्श पर घुटनों के बल बिठा दिया, अपनी टाँगें खूब चौड़ी करके मैं बिस्तर के सिरे पर बैठ गई और उसके मुंह से चूत लगा दी। बहुत टाइम से रुका हुआ स्वर्ण अमृत की सुरर्र सुरर्र सुरर्र करती हुई धारा राजे के मुंह में जाने लगी।
चुदाई की फच्च फच्च, मेरी आहें व सीत्कारें, राजे के मुंह से निकलती हुई हैं हैं हैं और मस्त गालियों की आवाज़ों से कमरा गूंज उठा। यदि कोई घर के बाहर सुन रहा होता तो फ़ौरन समझ लेता यहाँ एक मस्त चुदाई का खेल चल रहा है।
राजे भी बिस्तर पे चढ़ गया और मेरी टाँगें खूब चौड़ी कर के फैला दीं, एक तकिया उठाकर मेरे चूतड़ों के नीचे जमाया तो बुर उसके लंड का स्वागत करने के लिए ऊपर को उठ गई।
अन्तर्वासना पर हिन्दी सेक्स स्टोरी पढ़ने वालों की सेवा में चूतेश का प्रणाम… विशेषकर पाठिकाओं की चूतों को लौड़े की 21 तुनकों की सलामी! करीब एक महीना पहले
मैं दिखने में आकर्षक हूँ कि कोई भी लड़की आराम से पटा सकूँ। एक बार पूल पार्टी में अपने दोस्तों के साथ गया था.. एक बहुत सुन्दर लड़की मेरे करीब आई.. उसने मेरे सीने पर जानबूझ कर एक धौल जमाई और कहा- ऊ..सॉरी!
उसका यह पहली बार है.. उसकी योनि पूरी गीली हो गई थी। मैंने जैसे ही उसकी योनि पर हाथ फेरने लगा.. वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी भरने लगी.. आहें भरने लगी 'आह्ह.. आह्ह.. उम्म उम्म उम्म.. आह्ह.. हह ह ह..'
मैं अपने दोस्त की शादी के कार्ड बाँट रहा था, एक घर में एक कमसिन हसीन लड़की ने दरवाजा खोला. लेकिन अन्दर कुछ ऐसा हुआ कि मुझे वो कुंवारी चूत चोदने को मिल गई!
मैं उनके ऊपर अपनी टाँगें फैला कर बैठ गई। मैंने एक हाथ से योनि को फ़ैलाने की कोशिश की.. और दूसरे हाथ से लिंग को पकड़ सीधा कर योनि के छेद पर रास्ता दिखाते हुए कमर नीचे दबाने लगी।
मैं वॉल्वो बस में पीछे की सीट पर सो रहा था कि मेरी पैन्ट पर एक हाथ महसूस हुआ. मैंने आँख खोल कर देखा तो वो एक हसीं लड़की का हाथ था. मैंने उससे पूछा तो सॉरी बोलने लगी.
मैंने सबसे पहले अपनी साड़ी निकाली और बोली- ये नीचे टाँगों और मेरी चूचियों को ढकने में काम आती है। अब बारी थी मेरे ब्लाउज की.. तो मैं उसके हुक एक-एक करके खोलने लगी।
उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी योनि के दोनों होंठों को दोनों हाथों की उंगलियों से फैला कर छेद को चूम लिया.. ऐसा लगा जैसे एक बिजली का झटका मेरी योनि से होता हुआ मेरे दिमाग में चला गया।
ठीक है.. मेरी रानी.. मैं देखती हूँ.. अब तू तैयार हो जा अच्छे से.. तेरे जिस्म पर एक भी बाल नहीं होना चाहिए.. ना नीचे.. ना बगलों में.. और ये वाले ब्रा-पैन्टी पहनना नए वाले.. क्योंकि इसमें तेरी चूचियों का साइज़ अच्छा उभर कर आएगा।
मैं घबरा सी गई और पता नहीं मेरे मुँह से ऐसा क्यों निकल गया कि जल्दी कर लो.. मुझे शाम तक जाना है। इतना सुनने की देर थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
रात में भीड़ भरी ट्रेन में एक लेडी मेरे साथ खड़ी थी टॉयलेट के पास.. एक बो बार मेरा हाथ उसके मम्मों से छुआ तो उसने कुछ नहीं कहा बल्कि मुझसे बात करने लगी. मैं तो शुरू हो गया.
मेरे दफ्तर की लड़की से मेरा चक्कर चला तो वो मुझे पाने घर ले गई लेकिन उसकी मम्मी ने हमें रंगेहाथ पकड़ लिया. उन्होंने अपनी बेटी को एक कमरे में बंद कर दिया लेकिन मुझे अपने कमरे में ले गई!
एक सेक्सी मूवी में मुझे एक लड़की मिली, उसे मैं अपने कमरे में ले आया चोदने के लिये। कमरे में आते ही उसने सेक्सी खेल खेलने शुरु किये, मेरी आंखों पर पट्टी बांध कर मुझे बेड से बांध दिया।
मेरा वो दोस्त मुझसे मिलने और सम्भोग के लिए इतना उत्सुक हो चुका था कि वो किसी भी हद तक जाने को तैयार था। मुझे वो रोज परेशान करने लगा तब मैंने यह बात तारा को बताई।
सन्नी- साली.. तू दिखती छोटी है.. मगर चुदक्कड़ बहुत बड़ी है.. पता नहीं किसने तेरी चूत को खोला होगा। साला जरूर कोई दमदार बंदा ही होगा.. जिसका मेरे से भी बड़ा है..
काफी दिन नीरस बिताने के बाद मेरी सहेली के बताने पर एक रिटायर्ड फौजी से ऑनलाइन दोस्ती हुई तो उसके साथ खुल कर बातें होने लगी और एक दिन उसने मुझे कैम पर खुद को दिखाया.
मैं अपने भैया के साथ किसी के घर गया तो वहाँ एक सुन्दर भाभी मिली। उन्होंने मेरा फ़ोन नम्बर ले लिया और मुझे फ़ोन किया। फ़िर एक रात मुझे अपने घर बुला लिया।