जिस्मानी रिश्तों की चाह -55
इन दिनों अपने स्टोर के काम में इतना उलझ गया कि सेक्स की तरफ़ ध्यान ही नहीं जा रहा था। एक रात मेरे छोटे भाई ने बताया कि आपी ने पिछली रात उसका लन्ड चूसा था।
Antarvasna कम्युनिटी को हमारी शानदार भाई बहन कहानियों के कलेक्शन से आपको पागल कर देने दें।
इन दिनों अपने स्टोर के काम में इतना उलझ गया कि सेक्स की तरफ़ ध्यान ही नहीं जा रहा था। एक रात मेरे छोटे भाई ने बताया कि आपी ने पिछली रात उसका लन्ड चूसा था।
सुबह उठ कर नीचे जाने लगा तो सीढ़ियों में आपी मिली, उन्होंने अपनी छाती प्लास्टिक के टब से छिपाई हुई थी। देखा तो उनकी कमीज भीगी थी और चूचियाँ पूरी नुमाया थी।
आपी की चूत चूसने के साथ मैं उनकी चूत में उंगली करने लगा। फ़िर मैंने उनकी गांड में जीभ लगा दी और थोड़ी देर बाद आपी की गांड में उंगली घुसा दी तकरीबन डेढ़ इन्च…
रात के तीन बजे आते ही आपी ने मुझे जगा कर नंगा किया, खुद नंगी हुई और मेरा लंड चूसने लगी। फ़िर मैंने आपी को 69 पोजिशन में करके उनकी चूत चाटी, चूत में उंगली की।
आपी ने जो किया, उससे दिखा कि आपी हमें कितना प्यार करती हैं. लेकिन रात को भी मैं इंतजार करता रहा लेकिन आपी नहीं आई तो मैं सो गया. जब मेरी गहरी नींद टूटी तो..
चार दिन से आपी के हमारे कमरे में ना आने से मैं नाराज था. आपी मुझे मनाने लगी लेकिन मैं रूठा रहा. तो आपी ने में गेट के पास ही अपनी सलवार नीचे सरका दी!
आपी तीन दिन से कमरे में नहीं आई थी। चौथे दिन भी जब वक्त बीत गया तो मैं उन्हें देखने निकला। वो अपने कमरे में अम्मी और हनी के साथ थी। आपी ने मुझे देख लिया और…
आपी मेरा लंड चूस कर मलाई चाट कर गई तो उसके बाद दो दिन नहीं आई। हम दोनों भाई लंड पकड़े इन्तज़ार करते रहे। क्या क्या हुआ इन दो दिनों में… कहानी पढ़ कर जानिए!
आपी मेरा लन्ड चूसना चाह रही थी लेकिन उनको बार बार उबकाई आ रही थी। फ़िर भी उन्होंने कोशिश जारी रखी। कहानी को पढ़ कर देखिये कि आपी इस कोशिश में कितनी कामयाब हुई
मैं आपी के नंगे बदन पर बैठ कर उनकी चूचियों के बीच लंड रखा कर चोद रहा था तो लंड आपी के लबों को छू रहा था. तभी आपी ने जीभ निकाल कर लंड के सुपारे पर छुआया!
चचेरी बहन से मेरा चक्कर था। एक रात वो हमारे घर रुकी तो मैं उसे चोदने कमरे में गया जहाँ वो मेरी सगी बहन के साथ सो रही थी। अन्धेरे में क्या से क्या हो गया!
अगले दिन मैं कॉलेज से आया तो देखा कि आपी और फ़रहान कम्प्यूटर के सामने थे और ब्ल्यू फ़िल्म देख रहे थे। आपी फरहान की मुठ मार रही थीं। मुझे भी जोश आ गया।
आपी की जांघों में लन्ड रगड़ने से उन्हें मज़ा आने लगा और वो खुद लन्ड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रखने लगी। तभी आईने में आपी को ऐसा दिखा कि वो मुझसे चुद रही हों।
मेरी छेड़छाड़ से आपी गर्म होकर अपने कमरे में हाथ से मज़ा लेने लगी। रात को हमारे कमरे में आई तो एकदम नंगी हो कर अपने नंगे बदन को शीशे में जो देखना शुरू किया तो…
सुबह नाश्ते के वक्त मैं आपी की बगल में बैठा और उनकी जांघ पर हाथ रख दिया। एकदम ही खौफ से उनका चेहरा लाल हो गया। इसके बाद क्या हुआ, कहानी के इस भाग में पढ़िये।
आपी मेरे द्वारा चूत का दाना चाटने से, फ़रहान आपी द्वारा मुठ मारने से झड़ गया। मेरे मज़े के लिये आपी ने फ़रहान को मेरा लन्ड चूसने को कहा और मुझे चूमने लगी।
मैं और फ़रहान अपनी बड़ी बहन के नंगे बदन से चिपके पड़े थे, वो उनकी गांड चाट रहा था और मैं चूत में उंगली कर रहा था। तभी आपी ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया।
आपी ने मेरी मुठ मार मुझे और फ़रहान ने आपी की चूत चाट उन्हें झड़वा दिया। उसके बाद वो चली गई और अगली रात गयारह बजे के बाद आपी हमारे कमरे में आई… तो क्या हुआ?
अब आपी अपने भाइयों यानि मेरे और फ़रहान से बिल्कुल बेपर्दा होकर अपना नंगा हुस्न नुमाया कर रही थी। मैं उन्हें चूम रहा था और फ़रहान उनके नंगे जिस्म से खेलने में लगा था।
मैं अपनी ज़ुबान से चाटता हुआ रान से घुटने.. और फिर पिण्डलियों से हो कर पाँव तक पहुँचा और आपी की सलवार को उनके जिस्म से अलग करके पीछे फेंक दिया।
भैया अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे ऊपर लेट गए, मैं भी आँखें बन्द करके पड़ी रही और भैया के लिंग के प्रवेश कराने का इंतजार करने लगी। भैया ने एक हाथ से अपने लिंग को मेरी योनि के प्रवेश द्वार पर रख कर जोर का धक्का मारा..
मैंने आपी की टाँगों को खुलता महसूस कर लिया था और उनकी चूत से बहते पानी ने भी मुझे यह समझा दिया था कि अब आपी का दिमाग उनकी चूत के कंट्रोल में आ गया है..
भाई बहन की चुदाई की यह कहानी शराब के नशे में भाई द्वारा अपनी छोटी बहन की चूत चुदाई की है जिसमें बहन ने भी मज़ा लेकर अपनी चूत चुदवाई क्योंकि बहन की यह पहली चुदाई नहीं थी.
मैंने अपनी बहन के हसीन उभारों को देखा और अपने दोनों हाथों में आपी के उभार पकड़ कर दबाए और निप्पल को सहलाने के फ़ौरन बाद ही अचानक से आगे बढ़ कर आपी का खूबसूरत गुलाबी निप्पल अपने मुँह में ले लिया।
मर्दों का तो कुछ नहीं जाता और ना ही कोई ऐसा सबूत होता है.. जो उनके कुंवारेपन को चैलेन्ज कर सके, जबकि लड़कियाँ अगर अपना कुंवारापन खो दें.. तो वे उसे कभी छुपा नहीं सकती हैं।
मैंने अपनी उंगलियाँ आपी की चूत के दाने से उठाईं और चूत के अन्दर दाखिल करने के लिए नीचे दबाव दिया ही था कि आपी फ़ौरन बोलीं- सगीर.. रुको ना.. हाय प्लीज.. उईईई.. और ऊपर.. रगड़ो ना.. आआहह..
मेरे और आपी के जिस्म पर सिर्फ़ हमारी सलवारें ही थीं और आपी के सीने के उभारों पर उनकी खुली हुई ब्रा रखी हुई थी। मैंने अपने दोनों घुटने आपी की टाँगों के इर्द-गिर्द टिकाए और उनके सीने के उभारों पर अपना सीना रखते हो आपी के ऊपर लेट गया।
आपी ने मेरे सख़्त हाथ को अपने नर्म और मुलायम उभार पर महसूस किया और एक 'अहह..' भरते हुए मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और मेरे हाथ को हटाने के बजाए अपने हाथ से मेरे हाथ को दबाने लगीं।
मैंने आपी के कूल्हों में अपने लण्ड को ज़रा और दबाया.. तो उन्होंने मेरे लण्ड के दबाव से बचने के लिए अपने कूल्हों को दायें बायें हरकत दी तो उसका असर उलटा ही हुआ और मेरा लण्ड आपी के कूल्हों की दरार में मुकम्मल फिट हो गया।
मैं खाना खाते-खाते नज़र उठा कर आपी के सीने के उभारों और पूरे जिस्म को भी देख लेता था। आपी ने मेरी नजरों को महसूस कर लिया था, लड़कियों की सिक्स सेंस्थ इस मामले में बहुत तेज होती है।
अपनी बहन के सीने के दोनों उभारों को अपने दोनों हाथों में दबोचा और आपी की चूत पर अपना मुँह रखते हुए उनकी चूत के दाने को पूरी ताक़त से अपने होंठों में दबा लिया और चूस लिया।
आपी का जिस्म… कमर से थोड़ा नीचे से साइड्स से उनकी कूल्हे बाहर की तरफ निकलना शुरू हो जाते थे और एक खूबसूरत गोलाई बनाते हुए रानों की शुरुआत पर वो गोलाई खत्म हो जाती थी।
सलवार का ऊपरी किनारा वहाँ पहुँच गया था.. जहाँ से आपी के कूल्हों की गोलाई शुरू होती थी। सलवार थोड़ा और नीचे हुई.. तो उनके खूबसूरत शफ़फ़ और गुलाबी कूल्हों का ऊपरी हिस्सा और दोनों कूल्हों के दरमियान वाली लकीर नज़र आने लगी।
आपी ने अपना हाथ डिल्डो की तरफ बढ़ाया और अपने लेफ्ट हैण्ड की मुट्ठी में उसे थाम लिया और उठा कर अपना राईट हैण्ड की नर्मी से डिल्डो की पूरी लंबाई पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर फेरने लगीं।
सम्पादक जूजा हम भाइयों की जिद पर आपी ने अपनी कमीज उतार कर अपनी नंगी चूचियाँ हमें दिखाई और जब आपी क़मीज़ पहनने लगी तो हम उदास हो गए। तब आपी ने एक बार अपनी
उनके गुलाबी मम्मों पर हरी नीली रगों का जाल था और एक-एक रग साफ देखी और गिनी जा सकती थी। आपी ने अंगड़ाई लेने के अंदाज़ में अपनी टाँगें सीधी कीं और पाँव ज़मीन पर टिकाते हुए टाँगों को थोड़ा खोल लिया..
यह मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन तरीन नज़ारा था… मेरी आपी.. मेरी वो सगी बहन.. जिसकी हया.. जिसके पर्दे.. जिसकी पाकीज़गी.. की पूरा खानदान मिसालें देता था.. वो मेरे सामने बगैर क़मीज़ के खड़ी थीं… उसके मम्मे मेरी नजरों के सामने थे।
मैं भी धड़ल्ले से बोली- वो मैं सम्भाल लूंगी, तुम बेफिक्र रहो! लेकिन उस रात भाभी को चोदने के बाद तुम मुझको आखिरी बार ज़रूर उसी कमरे में चोदोगे, वायदा करो??
'अब मुझे ये बताओ कि बाजी के जिस्म में ऐसी कौन सी चीज़ है.. जिसे देख कर तुम्हें बहुत मज़ा आता है और तुम्हारा जी चाहता है बार-बार देखने का?' आपी सवालिया नजरों से मुझे देखने लगीं।
'अच्छा जी तो मेरे सोहने भाई की कहाँ-कहाँ नज़र पड़ी है.. और क्या-क्या देखा है जनाब ने.. अपनी सग़ी बाजी और सग़ी खाला का?' आपी ने ये कह कर सोफे से पाँव उठाए और टाँगें सीधी करते हुए पाँव ज़मीन पर टिका दिए।
आपी का भी एक हाथ टाँगों के दरमियान और दूसरा उनके एक उभार पर था.. फिर आहिस्तगी से उन्होंने अपनी सलवार से ही अपनी टाँगों के बीच वाली जगह को साफ किया और फिर सीधी बैठीं!
वो बोली- अरे भैया, तब मैं थी भी कितनी, अब तो दो बच्चे हो गए हैं, और तीन जानों ने चूसे हैं, इनको तो खुद बहत पसंद हैं, बहुत दबाते हैं और बहुत पीते हैं।
जैसे-जैसे दास्तान आगे बढ़ती जा रही थी आपी की बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी। वो कभी टाँगों को आपस में भींचती थीं तो कभी अपनी दोनों रानों को एक-दूसरे से रगड़ देती थीं..
मेरी मौसी की लड़की 15 साल बाद हमारे घर आई, शादी हो चुकी है. कोई समय था जब हम दोनों आपस में काफी आगे बढ़ गए थे. मैं बार बार उसे पुराने वक़्त की यादें दिला रहा था और वो बार बार बचती जा रही थी।
जब आपी ने देखा तो उनकी ब्रा मेरे बायें हाथ में थी और मैं कप के अन्दर ज़ुबान फेर रहा था। मैंने आपी को देखा लेकिन अब मैं अपनी मंज़िल के बहुत क़रीब था इसलिए अपने हाथ को रोक नहीं सकता था।
मैंने अपनी बहन को लंड पकड़ने को कहा तो वो मना करने लगी लेकिन फ़िर पकड़ लिया, कहने लगी कि अब तुम क्या करना चाहते हो। वो भी चाह रही थी पर डर रही थी।
मेरी बहन की अन्तर्वासना मेरी चूमा चाटी से जागृत होने लगी तो मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसकी ब्रा के कप उसके स्तनों से ऐसे उठाए जैसे ढक्कन खोला हो!
मैंने उसको अपनी टांगों के बीच में बैठने के लिए कहा और उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख कर ज़ोर का धक्का मारने को कहा और उसने वैसे ही किया।
मेरे जिद करने पर मेरी बहन नंगी होकर अपना नंगा बदन दिखाने को राजी हो गई। लेकिन उसने मुझे उसके पास जाने से मना किया, बाथरूम में जाकर उसने अपनी शर्ट उतार दी।
एक बार नहाते हुए लिंग पर साबुन लगाते समय मुझे गुदगुदी सी महसूस हुई। मैंने उसे और रगड़ा तो मुझे और अच्छा लगा। मैंने अपने दोस्त से पूछा तो उसने मुझे बताया।
दीदी की मालिश करते हुए मैंने उसकी ब्रा और नाइटी उतरवा कर नंगी कर लिया और उसकी चूचियों की मालिश करने लगा। दीदी की कामुकता शिखर पर पहुंच गई थी, अब वो चुदने को आतुर थी।
अंधेरा होने के कारण मेरा हाथ उसकी जाँघ को छू गया, उसकी नंगी जांघ बहुत ही नरम और चिकनी थी। मैं उसे सहलाने लगा.. मुझे बहुत मज़ा आने लगा और शायद दीदी को भी मज़ा आ रहा था क्योंकि वो कुछ नहीं बोल रही थी और ना ही मुझे रोक रही थी..
मेरी बड़ी बहन की शादी तय हुई तो उसे दुल्हा पसन्द नहीं था। हम दोनों शॉपिंग करने गये तो लोकल ट्रेन में भीड़ के कारण हम दोनों आपस में सट गए और उत्तेजित हो गये।
मैं बोली- भैया आपने अपनी सग़ी बहन को चोद दिया। मैं आगे बोली- पापा को अभी फोन करने जा रही हूँ कि भैया ने यहाँ मुझे अकेले पाकर मुझे चोद दिया।
उसने चादर अपने ऊपर ओढ़ ली। अब तो वो मुझसे और भी सटकर लेट गई.. उसने अपनी दोनों बाहें मेरी गर्दन में डाल लीं। मैंने अपना हाथ उसकी चूची पर फेरना शुरू कर दिया.. इस पर वो थोड़ा सीधी लेट गई।
टी-शर्ट पहनते समय मैंने अपनी ब्रा निकाल दी थी। मुझे पता है कि मेरी बड़ी चूचियाँ हैं.. जो टी-शर्ट में पूरी नहीं आ पा रही थीं। इसी वजह से मैं और हॉट लगने लगी।
शिखा बोली- आ जा भाई, आ जा… मैंने काफी देर से तेरी आँखों में मेरे बदन के लिए हवस देखी है… तू आजा मेरे ऊपर और नोच डाल अपनी सगी बहन के बदन को!
नीलेश बोला- कैसी लगी मेरी बहन शिखा? मैंने कहा- यार वो तो कमाल ही है। उसकी चुदाई तो बनती है, कुछ नहीं तो कम से कम उसे एक बार नंगी कर के देख, मस्त एकदम!
हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम गुर लाल है.. मैं पंजाब के लुधियाना की घटना बताने जा रहा हूँ.. जो मेरे साथ घटी थी। यह कहानी मेरी मौसी की बेटी सिमरन की है, अगर कोई
मैं बहुत गर्म हो चुका था इसलिए नेहा की चूत पर अपना लंड सेट किया और बोला- तुझे अंगेरजी में चुदने में मज़ा आता है पर मुझे हिंदी में गाली देना और सुनना पसंद है।
मैं उसकी चूत चाटते हुए उसके पानी के निकलने का इंतज़ार करने लगा। काजल काफ़ी ज़ोर लगा रही थी। काफ़ी ज़ोर लगाने के बाद उस्का पेशाब निकल पड़ा। मैं उसका पूरा मूत पी गया और तब तक पीता रहा..
झड़ने के बाद वो मेरा सारा माल पी गई और लंड को चाट कर साफ़ कर मेरे बदन पर उंगली फिराने लगी। मैं उठा और उसके लहँगे को घुटनों तक उठा दिया और उसके पैरों को चूमने लगा।
‘डान्स पे चान्स मार ले’ गाना आ रहा था। काजल को वो गाना बहुत पसंद था.. इसलिए वो डान्स करने लगी। वो अपने मस्त चूतड़ हिला-हिला कर डान्स कर रही थी। उसको देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था..
मेरी दोनों बहनों के चूतड़ों के उभार मस्त दिख रहे थे और चोलियाँ चूचियों तक ही थीं। चोली और लहंगे के अलावा बाकी का भाग नंगा था.. मतलब कमर.. पेट पूरा नंगा था.. मेरा तो फिर से लंड खड़ा हो गया।
मैंने शिखा को पूरी सब्जी का कौर खिलाया तो जानकर थोड़ा गिरा दिया जो शिखा के बूब्स पर गिरा। मैं सबके सामने उसके बूब्स के अंदर हाथ डाल के वो आलू निकाल कर खा गया
मैंने कहा- देख कुंवारी चूत तो सिर्फ हम दोनों में से एक को ही मिल सकती है। मेरे चोदने के बाद मैं उन्हें इतना खोल लूंगा कि तू भी आराम से दोनों को चोद पाएगा।
नेहा सोच रही थी कि इतने सारे लोगों के बीच आखिर उसकी चुदाई कैसे होगी। शिखा सोच रही थी कि नीलेश हो लाये ही क्यूँ। मधु को कोई आईडिया नहीं था कि हो क्या रहा है।
मैं मामा के घर गया, वहाँ मामी व उनकी बेटी थी। मैं अपनी बहन से बात करने लगा। मेरे मन को बहन की जवानी विचलित कर रही थी। हिम्मत करके मैंने उसे चुम्बन के लिए कह दिया।
मामा के घर में मौसेरी बहन की कुंवारी रसीली चूत को चोदने का मज़ा मैंने लिया, उसे कैसे पटाया मैंने, फिर कैसे चोदा, इस कहानी में पढ़ कर बहन की चूत चुदाई का मज़ा लीजिए !
मेरी चुदाई बहुत दिनों से नहीं हुई थी.. मैं चुदास से तड़प रही थी। ऐसे में भाई की याद आई.. मैंने सोचा कि यह मेरी प्यास बुझा सकता है, मुझे उसे किसी तरह पटाना ही होगा।